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बाल मजदूरों को स्कूल खुलने का इंतजार

Thu, 06 Nov 2014 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,उधमपुर
ब्यूरो/अमर उजाला,उधमपुर Updated Thu, 06 Nov 2014 01:44 AM IST
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child labourer's are wating for their school

ढाबों या दुकानों पर काम करने वाले बच्चों को अब भी स्कूल जाने का इंतजार है। इस संबंध में 2013 में सर्वे पूरा करके प्रोजेक्ट रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास जमा करवाने के बाद भी जिले में नए चाइल्ड लेबर स्कूल खोलने को मंजूरी नहीं मिल सकी है।

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अभी तक केंद्र सरकार रिपोर्ट पर समीक्षा करने में जुटी हुई है, जबकि पूरे जिले में 4750 बाल मजदूर शिक्षा मिलने की उम्मीद में हैं।

मासूम बच्चों के हाथों से जूठी प्लेंटे छुड़वाकर कलम की ताकत थमाने के उद्देश्य से राज्य का पहला चाइल्ड लेबर स्कूल अक्तूबर 2007 में उधमपुर शहर के जखैनी इलाके में खोला गया था।
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जून 2009 में चिनैनी, डुडु व पंचैरी ब्लाक में 10 नए चाइल्ड लेबर स्कूल खोले गए। वर्तमान समय में जिला के 11 चाइल्ड लेबर स्कूलों में 482 बच्चे बाल मजदूरी छोड़कर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इसके अलावा 4750 से ज्यादा बाल मजदूर स्कूल खुलने के इंतजार में हैं।
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2013 में बाल मजूदरों के पहचान के लिए जिला की 1000 आंगनबाड़ी वर्कर्स को सर्वे का कार्य दिया। आंगनबाड़ी वर्कर्स ने अपने सेंटर के दायरे में पड़ते घरों में पहुंचकर जानकारी हासिल की कि 14 वर्ष तक के कितने बच्चे पढ़ाई छोड़कर काम कर रहे हैं। बच्चे को बाल मजदूरी करने के लिए कहां पर भेजा गया है।


आंगनबाड़ी वर्कर्स की ओर से गांववासियों को चाइल्ड लेबर स्कूलों में बच्चों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी देकर जागरूक भी किया गया।

आंगनबाड़ी वर्कर्स ने सर्वे की फाइनल रिपोर्ट को नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट डायरेक्टर को सौंपा, जिसमें यह बात सामने आई की जिले में 4750 से ज्यादा बाल मजदूर हैं, जोकि जम्मू, कटड़ा, उधमपुर व अन्य कई इलाकों में होटलों, ढाबों व घरों में काम कर रहे हैं।

चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट डायरेक्टर की तरफ से इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को भी सौंपा गया, लेकिन अभी तक नए स्कूलों को मंजूरी नहीं मिल सकी है।

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