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चिनाब दरिया पर एशिया का सबसे बड़ा झूला पुल तैयार
Udhampur
Updated Fri, 08 Nov 2013 05:42 AM IST
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डोडा। सड़क सुविधा से वंचित अस्सर त्रुंगल के दरिया चिनाब के पार रहने वाले 15 से 20 पंचायतों के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। उनके आवागमन के लिए 15 करोड़ 36 लाख की लागत से मोटरेबल झूला पुल का बनकर तैयार हो गया है। इसकी लंबाई 325 मीटर है। खास बात यह है कि इसे रस्सियों के सहारे बनाया गया है, जिसे एशिया में सबसे बड़ा बताया जा रहा है। पुल के अभाव में लोग अब तक किश्तियों और गंडोले के सहारे आवाजाही करते थे, जो जोखिम भरा था। किश्तियों के पलटने से चार विद्यार्थियों की मौत हो चुकी है।
2007 में बगलिहार पनबिजली परियोजना के तहत बने डैम के कारण चिनाब का पानी ऊपर आ गया था। इसकी वजह से जम्मू-डोडा-राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाले त्रुंगल पुल और कोडा पुल बह गए। इसके साथ ही लोग पूरी तरह से शहरों से कट गए। लोगों का शहरों से संपर्क बना रहे, इसको ध्यान में रखते हुए पीडीडी ने दो गंडोले और किश्तियां लगवाईं। हालांकि यह भी कम जोखिम भरा नहीं था। बताया जाता है कि किश्तियों के पलटने से चार विद्यार्थियों को अपनी जान गवानी पड़ी हैं। इसके बाद विभाग ने इस जगह रस्सियों के सहारे पुल का निर्माण कार्य शुरू किया, जो अब बनकर तैयार है। इसे तैयार करने में आठ वर्षों का समय लगा। जल्द मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इसका उद्घाटन कर सकते हैं। इसकी तैयारियां भी चल रही हैं। वहीं लोगों का कहना है कि पुल तो बना दिया गया, लेकिन उस पार अभी पैदल चलने का रास्ता नहीं है। डोडा-कास्तीगढ़ से चिल-छछतर मार्ग तक जोड़ने के लिए अभी भी आठ किमी सड़क नहीं बनी है। इसलिए जब तक यह मार्ग नहीं बन जाता, पुल सिर्फ पैदल चलने के काम ही आ सकता है। चिल पंचायत के चेयरमैन देवेंद्र सिंह ने बताया कि हम अपने को देश दुनिया से कटा हुआ ही मानते रहे हैं। लेकिन पुल बनने से हम भी दुनिया के साथ जुड़ सकेंगे। पहले राशन लाने, बीमार होने और गर्भवती महिलाओं को दरिया पार ले जाने में परेशानी आती थी। बरसात के मौसम में किश्तियां और गंडोले बंद हो जाते हैं। पंचायतों में कोई शादी या अन्य आयोजन हो, तो जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती थी। करमैल रामगढ़ के सरपंच मोहम्मद फारूक मीर ने बताया कि पुल तो बन गया है, लेकिन पुल के पार मार्ग का काम जल्द शुरू होना चाहिए, तभी इसका फायदा है। बताया जा रहा है कि पैसे की कमी की वजह से उस पार काम नहीं हो पा रहा है। हम प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि इसका काम जल्द शुरू कराया जाए। जिलाधीश डोडा मुबारक सिंह ने बताया कि पुल से 20 टन तक वजन पार किया जा सकेगा। इससे 60 से 70 हजार लोगों को राहत मिलेगी। इस पुल को एशिया का सबसे लंबा मोटरेबल सस्पेंशन पुल भी कहा जा सकता है।
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2007 में बगलिहार पनबिजली परियोजना के तहत बने डैम के कारण चिनाब का पानी ऊपर आ गया था। इसकी वजह से जम्मू-डोडा-राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाले त्रुंगल पुल और कोडा पुल बह गए। इसके साथ ही लोग पूरी तरह से शहरों से कट गए। लोगों का शहरों से संपर्क बना रहे, इसको ध्यान में रखते हुए पीडीडी ने दो गंडोले और किश्तियां लगवाईं। हालांकि यह भी कम जोखिम भरा नहीं था। बताया जाता है कि किश्तियों के पलटने से चार विद्यार्थियों को अपनी जान गवानी पड़ी हैं। इसके बाद विभाग ने इस जगह रस्सियों के सहारे पुल का निर्माण कार्य शुरू किया, जो अब बनकर तैयार है। इसे तैयार करने में आठ वर्षों का समय लगा। जल्द मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इसका उद्घाटन कर सकते हैं। इसकी तैयारियां भी चल रही हैं। वहीं लोगों का कहना है कि पुल तो बना दिया गया, लेकिन उस पार अभी पैदल चलने का रास्ता नहीं है। डोडा-कास्तीगढ़ से चिल-छछतर मार्ग तक जोड़ने के लिए अभी भी आठ किमी सड़क नहीं बनी है। इसलिए जब तक यह मार्ग नहीं बन जाता, पुल सिर्फ पैदल चलने के काम ही आ सकता है। चिल पंचायत के चेयरमैन देवेंद्र सिंह ने बताया कि हम अपने को देश दुनिया से कटा हुआ ही मानते रहे हैं। लेकिन पुल बनने से हम भी दुनिया के साथ जुड़ सकेंगे। पहले राशन लाने, बीमार होने और गर्भवती महिलाओं को दरिया पार ले जाने में परेशानी आती थी। बरसात के मौसम में किश्तियां और गंडोले बंद हो जाते हैं। पंचायतों में कोई शादी या अन्य आयोजन हो, तो जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती थी। करमैल रामगढ़ के सरपंच मोहम्मद फारूक मीर ने बताया कि पुल तो बन गया है, लेकिन पुल के पार मार्ग का काम जल्द शुरू होना चाहिए, तभी इसका फायदा है। बताया जा रहा है कि पैसे की कमी की वजह से उस पार काम नहीं हो पा रहा है। हम प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि इसका काम जल्द शुरू कराया जाए। जिलाधीश डोडा मुबारक सिंह ने बताया कि पुल से 20 टन तक वजन पार किया जा सकेगा। इससे 60 से 70 हजार लोगों को राहत मिलेगी। इस पुल को एशिया का सबसे लंबा मोटरेबल सस्पेंशन पुल भी कहा जा सकता है।
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