कश्मीर पर्यटन को लग सकता है बड़ा झटका: श्रीनगर एयरपोर्ट बंदी से कारोबार पर संकट, व्यापारियों ने जताई चिंता
श्रीनगर एयरपोर्ट पर रनवे मरम्मत और रखरखाव कार्य के कारण प्रस्तावित बंदी को लेकर पर्यटन और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई है। हितधारकों का कहना है कि इससे पीक टूरिस्ट सीजन में 12 हजार से अधिक दैनिक यात्रियों और घाटी के पर्यटन कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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कश्मीर में व्यवसायी और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बंद करने के फैसले पर चिंता जताई। यह बंद रनवे की जरूरी मरम्मत और सुधार के काम के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सरकार और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) से अपील की है कि वे इस फैसले पर फिर से विचार करें क्योंकि इससे टूरिस्ट सीजन के पीक टाइम पर बुरा असर पड़ सकता है। इस बीच पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने ट्रेनों की संख्या बढाने और वैकल्पिक एयरपोर्ट की मांग पर जोर दिया है। बता दें कि श्रीनगर एयरपोर्ट के प्रस्तावित प्लान के मुताबिक 1 जुलाई से 30 सितंबर, 2026 तक हर सोमवार और मंगलवार को रनवे बंद रह सकता है।
साथ ही भारतीय वायुसेना द्वारा किए जाने वाले मेंटेनेंस के काम के कारण 1 अक्तूबर से 16 अक्तूबर तक ऑपरेशन पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव भी हैकश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) ने कहा कि इस बंदी से घाटी के टूरिज्म सेक्टर को बहुत बड़ा झटका लगेगा जो पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद अब संभल रहा था। केसीसीआई के अध्यक्ष जावेद अहमद टेंगा ने कहा कि इससे टूरिज्म सेक्टर पर असर पड़ेगा। यह सेक्टर पहले से ही दबाव में है और इससे बहुत बुरा असर पड़ेगा। एयरपोर्ट की मरम्मत और अपग्रेडेशन जरूरी है लेकिन बेहतर विकल्प ढूंढे जाने चाहिए ताकि टूरिस्ट और आम जनता पर कम से कम असर पड़े। अगर फ्लाइट ऑपरेशन रोकना जरूरी ही है तो सरकार को जम्मू-कश्मीर रेलवे लाइन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ानी चाहिए। ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर (टाक) ने इस बंदी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इस कदम से टूरिज्म सेक्टर को बहुत बड़ा नुकसान होगा।
टाक के अध्यक्ष फारूक कुठू ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। बेशक, हमें एयरपोर्ट के रखरखाव की जरूरत है लेकिन एएआई और सरकार को टूरिज्म से जुड़े लोगों और नागरिकों का भी ध्यान रखना चाहिए था। हमारा टूरिज्म पहले से ही पटरी पर लौट रहा है और इस बंदी से हमें निश्चित रूप से एक और झटका लगेगा। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा की छुट्टियों के दौरान घाटी आने की योजना बना रहे टूरिस्ट फ्लाइट ऑपरेशन में रुकावट को लेकर डरे हुए हैं और पहले से ही बुकिंग कैंसिल हो रही हैं। हमें पहले से ही ऐसी पूछताछ मिल रही हैं। हम सरकार से अपील करते हैं कि वह इस पर गंभीरता से विचार करे।
इस बीच कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने वैकल्पिक एयरपोर्ट सुविधा की भी जोरदार मांग की है। उनका कहना है कि इस कदम से पीक सीजन के दौरान यात्रियों और टूरिज्म सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है। इन प्रस्तावित पाबंदियों से 12,000 से ज्यादा यात्रियों पर असर पड़ने की उम्मीद है जो टूरिज्म के व्यस्त सीजन के दौरान आने-जाने वाली उड़ानों के लिए रोजाना श्रीनगर एयरपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। श्रीनगर एयरपोर्ट पर अभी रोजाना औसतन 12,000 से ज्यादा यात्री आते-जाते हैं जिनमें पर्यटक, बिजनेस के लिए यात्रा करने वाले, तीर्थयात्री और स्थानीय लोग शामिल हैं।
घाटी की एक बड़ी होटल चेन के मालिक आसिफ बुर्जा ने इस बात पर जोर दिया कि एयरपोर्ट का अपग्रेडेशन बहुत जरूरी है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि एयरपोर्ट को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। भविष्य के लिए मरम्मत और अपग्रेडेशन का काम बहुत जरूरी है। यह यात्रियों की सुविधा का मामला है लेकिन साथ ही लोगों को होने वाली परेशानी कम करने की कोशिश भी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बंद रहने के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिन दिनों एयरपोर्ट खुला रहे, उन दिनों उड़ानों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। कोई वैकल्पिक इंतजाम किया जाना चाहिए ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। साथ ही, उन्होंने ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाने की बात कही।
सीएम ने भरोसा दिया, पीएम से करेंगे बात : चाया
जम्मू-कश्मीर होटलियर्स क्लब के चेयरमैन मुश्ताक चाया ने कहा कि अगर पहले से वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए तो घाटी के टूरिज्म सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है। इस फैसले का असर पूरे टूरिज्म उद्योग पर पड़ेगा। हर दिन हज़ारों यात्री श्रीनगर एयरपोर्ट से यात्रा करते हैं और पीक सीजन के दौरान किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर टूरिज्म, होटलों, ट्रांसपोर्टर्स और यात्रा से जुड़े दूसरे सेक्टर पर पड़ेगा। हमने मुख्यमंत्री से बात की और उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि वह दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि हम उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी मिलेंगे और उनसे वैकल्पिक इंतजाम सुनिश्चित करने का अनुरोध करेंगे। हितधारक चाहते हैं कि बंद रहने की अवधि के दौरान आम लोगों की उड़ानों के लिए अवंतीपोरा एयरपोर्ट को एक अस्थायी विकल्प के तौर पर देखा जाए। इसके अलावा दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों से और ज्यादा सीधी ट्रेन सेवाएं शुरू की जानी चाहिए।