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शुगर व ब्लड प्रेशर से बढ़ रहे आंखों के मरीज

Tue, 03 Jan 2017 10:23 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर Updated Tue, 03 Jan 2017 10:23 PM IST
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Sugar and blood pressure are growing patient eyes.

आरओपी (रेटिनोपेथी ऑफ प्रीमैच्युरिटी), डीआर (डायबिटिक रेटिनोपेथी)  और एचटीपी(हायपरटेंसन रेटिनोपेथी) के दृष्टिदोष मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। आंखों की इन बीमारियों की वजह से मरीज आंखों में खून आने, मोतियाबिंद, सफेद मोतिया, रोशनी कम होने जैसी समस्या झेल रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार उच्च रक्तचाप (ब्ल्ड प्रेशर) और मधुमेह (शुगर) से पीड़ित मरीजों को साल में एक बार पर्दे की जांच करानी चाहिए, ताकि वक्त पर इलाज हो सके।

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राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध बेस अस्पताल श्रीकोट गंगानाली के नेत्र रोग विभाग में हर दिन औसतन 150 मरीज पहुंचते हैं। इनमें लगभग 30 फीसदी मरीज डीआर और एचटीपी से पीड़ित मरीज होते हैं। जबकि माह मेें 10-12 बच्चे आरओपी से पीड़ित होते हैं, जिनको बाल रोग विभाग से आंखों की जांच के लिए रेफर किया जाता है।
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कालेज के नेत्र रोग विभाग के प्रभारी एचओडी डा. अच्युत नारायण पांडे बताते हैं कि वर्तमान में भाग दौड़, तनाव, चिंता और असुंतलित भोजन की वजह से लोग मधुमेह और उच्च रक्तचाप का शिकार हो रहे हैं। इन कारणों से मरीज की आंखों में रोशनी कम हो जाती है या आंखों में रक्त का थक्का बन जाता है।
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नवजात बच्चों में भी जन्मजात आरओपी की समस्या हो जाती है। आक्सीजन की कमी, मां के किसी बुखार से पीड़ित होने या अन्य वजहों से आंखों में पर्दे का विकास ठीक ढंग से नहीं हो पाता है।

इससे उसकी नजर कमजोर पड़ जाती है या वह अंधा भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि जन्म लेते वक्त और उसके बाद अभिभावक और चिकित्सक का रोल महत्वपूर्ण होता है। प्रसूति विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ यदि किसी बच्चे की आंखों में कोई असामान्यता देखें, तो तत्काल नेत्र रोग विभाग में रेफर करना चाहिए। वहीं अभिभावक को भी बच्चे की गतिविधि पर नजर रखनी चाहिए।


चिकित्सक की सलाह
मधुमेह या रक्तचाप से पीड़ित होने पर साल में एक बार पर्दे की जांच कराए।
संतुलित आहार का सेवन करे।
तनाव से बचे।
गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषक पदार्थ दें

4 जनवरी को मनाया जाता है ब्रेल दिवस
श्रीनगर।
ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल के जन्म दिवस पर प्रत्येक साल चार जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। ब्रेल का जन्म फ्रांस में हुआ था। जब वह तीन साल के थे, तो दुर्घटनावश अंधेपन के शिकार हो गए। इसके बावजूद पढ़ाई-लिखाई करते रहे। जब 15 साल के थे, तो उन्होंने महसूस कर पढ़ाई और लिखाई का तरीका ईजाद किया। बाद में यह ब्रेल लिपि कहलाई।

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