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Srinagar News: ऑपरेशन सिंदूर को 11 माह बीते, उड़ी में आज भी बंकरों का अभाव
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उड़ी में बंकर। संवाद
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- एलओसी से सटे गांवों के लोगों की सुरक्षा अभी भी अनिश्चित, खुद को असुरक्षित कर रहे हैं महसूस
साकिब नबी
बारामुला। जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) से सटे उड़ी सेक्टर में ऑपरेशन सिंदूर के लगभग 11 माह बाद भी भूमिगत बंकरों का अभाव बना हुआ है। इससे वहां के निवासी स्वयं को सीमा पार से होने वाली गोलाबारी के प्रति असुरक्षित महसूस करते हैं।
सीमावर्ती गांवों के लोगों का आरोप है कि आधिकारिक आश्वासनों के बावजूद बंकरों के निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऑपरेशन की बरसी करीब आने के बावजूद जमीन पर कोई भी काम होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा। उड़ी के सलामाबाद गांव के एक निवासी ने बताया कि लगभग एक साल बीत चुका है लेकिन एक भी बंकर नहीं बना। गोलाबारी के दौरान हमारे पास छिपने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है।
चरुंडा में लोगों ने बताया कि वर्ष 2020 में बनाए गए सामुदायिक बंकर अब इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। यहां जलभराव और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। स्थानीय निवासी लियाकत अली कहा कि हमारी सुरक्षा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। जहूर अहमद ने बताया कि सिलिकोट में मौजूद बंकर भी जर्जर हालत में हैं।
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उड़ी प्रशासन ने हाल ही में बताया था कि संवेदनशील इलाकों में अस्थायी आश्रय प्रदान करने के लिए 80 से अधिक ओवरहेड प्रोटेक्शन ट्रेंच (ऊपर से ढकी खाइयां) बनाई गई हैं। लोगों का तर्क है कि ये ट्रेंच भूमिगत बंकरों की जगह नहीं ले सकतीं। कमलकोट के एक निवासी ने कहा कि ट्रेंच भारी गोलाबारी का सामना नहीं कर सकतीं। जब भी तनाव बढ़ता है तो हमें या तो वहां से भागना पड़ता है या फिर किसी असुरक्षित जगह पर शरण लेनी पड़ती है। सीमा पर तनाव बढ़ने पर कई वादे किए जाते हैं, शांति बहाल होने पर प्रशासन इन्हें भूल जाता है।
500 से अधिक बंकरों की मिली थी मंजूरी, लोग-बोले काम शुरू नहीं हुआ
इस साल की शुरुआत में तत्कालीन जिला उपायुक्त मिंगा शेरपा ने घोषणा की थी कि गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर गृह विभाग के समन्वय से उड़ी सेक्टर के लिए 500 से अधिक बंकरों को मंजूरी दे दी है। उम्मीद थी कि इनका निर्माण कार्य अप्रैल 2026 से शुरू हो जाएगा। हालांकि लोगों का कहना है कि इस दिशा में अब तक काम शुरू नहीं हुआ।
अधिकारियों से प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह
हाथलंगा उड़ी के लतीफ अहमद सहित स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है। साथ ही कहा कि बंकरों की लगातार कमी सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इसकी चर्चा केवल तभी होती है जब तनाव बढ़ता है। इन्हें शांतिपूर्ण समय में बनाया जाना चाहिए जब निर्माण कार्य संभव हो।
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उड़ी के कुछ हिस्सों में ओवरहेड प्रोटेक्शन ट्रेंच बनाई गई हैं लेकिन यह भी बताया कि भूमिगत सामुदायिक बंकरों के निर्माण में अभी और समय लगेगा। संवाद
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साकिब नबी
बारामुला। जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) से सटे उड़ी सेक्टर में ऑपरेशन सिंदूर के लगभग 11 माह बाद भी भूमिगत बंकरों का अभाव बना हुआ है। इससे वहां के निवासी स्वयं को सीमा पार से होने वाली गोलाबारी के प्रति असुरक्षित महसूस करते हैं।
सीमावर्ती गांवों के लोगों का आरोप है कि आधिकारिक आश्वासनों के बावजूद बंकरों के निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऑपरेशन की बरसी करीब आने के बावजूद जमीन पर कोई भी काम होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा। उड़ी के सलामाबाद गांव के एक निवासी ने बताया कि लगभग एक साल बीत चुका है लेकिन एक भी बंकर नहीं बना। गोलाबारी के दौरान हमारे पास छिपने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है।
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चरुंडा में लोगों ने बताया कि वर्ष 2020 में बनाए गए सामुदायिक बंकर अब इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। यहां जलभराव और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। स्थानीय निवासी लियाकत अली कहा कि हमारी सुरक्षा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। जहूर अहमद ने बताया कि सिलिकोट में मौजूद बंकर भी जर्जर हालत में हैं।
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उड़ी प्रशासन ने हाल ही में बताया था कि संवेदनशील इलाकों में अस्थायी आश्रय प्रदान करने के लिए 80 से अधिक ओवरहेड प्रोटेक्शन ट्रेंच (ऊपर से ढकी खाइयां) बनाई गई हैं। लोगों का तर्क है कि ये ट्रेंच भूमिगत बंकरों की जगह नहीं ले सकतीं। कमलकोट के एक निवासी ने कहा कि ट्रेंच भारी गोलाबारी का सामना नहीं कर सकतीं। जब भी तनाव बढ़ता है तो हमें या तो वहां से भागना पड़ता है या फिर किसी असुरक्षित जगह पर शरण लेनी पड़ती है। सीमा पर तनाव बढ़ने पर कई वादे किए जाते हैं, शांति बहाल होने पर प्रशासन इन्हें भूल जाता है।
500 से अधिक बंकरों की मिली थी मंजूरी, लोग-बोले काम शुरू नहीं हुआ
इस साल की शुरुआत में तत्कालीन जिला उपायुक्त मिंगा शेरपा ने घोषणा की थी कि गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर गृह विभाग के समन्वय से उड़ी सेक्टर के लिए 500 से अधिक बंकरों को मंजूरी दे दी है। उम्मीद थी कि इनका निर्माण कार्य अप्रैल 2026 से शुरू हो जाएगा। हालांकि लोगों का कहना है कि इस दिशा में अब तक काम शुरू नहीं हुआ।
अधिकारियों से प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह
हाथलंगा उड़ी के लतीफ अहमद सहित स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है। साथ ही कहा कि बंकरों की लगातार कमी सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इसकी चर्चा केवल तभी होती है जब तनाव बढ़ता है। इन्हें शांतिपूर्ण समय में बनाया जाना चाहिए जब निर्माण कार्य संभव हो।
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उड़ी के कुछ हिस्सों में ओवरहेड प्रोटेक्शन ट्रेंच बनाई गई हैं लेकिन यह भी बताया कि भूमिगत सामुदायिक बंकरों के निर्माण में अभी और समय लगेगा। संवाद