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Srinagar News: श्रीनगर शहर में भालू का आतंक बरकरार, कर्फ्यू जैसी स्थिति
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- वन्यजीव विभाग की टीमें लगातार पकड़ने का प्रयास जारी रखे हुए है
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। एक हफ्ते से ज्यादा समय से श्रीनगर में एक अजीब तरह का कर्फ्यू लगा हुआ है। यह कर्फ्यू अधिकारियों ने नहीं लगाया है बल्कि दो काले भालुओं ने लगाया है जो शहर में घुस आए हैं और जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनकी रात की हरकतों ने पूरे इलाकों को ठप कर दिया है।
कैंपस की जिंदगी खराब कर दी है। तलाशी अभियान शुरू किया गया और लोग घबराकर मजाक कर रहे हैं कि ये जानवर घाटी के बड़े संस्थानों का सिटी टूर कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ये दोनों भालू दारा के जंगल से आए हैं। उन्होंने शहरी माहौल में खुद को बहुत अच्छे से ढाल लिया है। उनका पीछा तेज रफ्तार मोटरसाइकिलों ने किया। कुत्तों के झुंड ने उन्हें घेर लिया है और थर्मल ड्रोन से उनकी निगरानी की गई फिर भी वे हर पकड़ने की कोशिशों से बच निकलते हैं। वन्यजीव विभाग टीमों का कहना है कि अपना पूरा जोर लगाने के बावजूद भालू उनसे एक कदम आगे रहते हैं।
यह सिलसिला 27 नवंबर को शुरू हुआ जब निगीन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) के सिक्योरिटी कैमरों में पहली बार उनकी साफ तस्वीर कैद हुई। कुछ ही घंटों में वन्यजीव विभाग के अधिकारी कैंपस पहुंच गए लेकिन तब तक जानवर वहां से जा चुके थे। दो दिन बाद एक भालू हजरतबल में कश्मीर यूनिवर्सिटी कैंपस के पास दिखाई दिया। गली के कुत्तों ने उसका पीछा किया और वह घबराया हुआ लग रहा था। वह लड़कियों के हॉस्टल कॉम्प्लेक्स में कूद गया और रेस्पांस टीम के पहुंचने से पहले ही गायब हो गया।
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इसके बाद शहर भर में कई बार उन्हें देखा गया। उन्हें सौरा में शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) में देखा गया जहां देर रात सीसीटीवी में हलचल के कारण सिक्योरिटी को गेट बंद करने पड़े। उन्हें मीरवाइज मंज़िल के आस-पास भी देखा गया। बाद में, स्थानीय लोगों ने एक भालू को निगीन झील में तैरते हुए सीसीटीवी कैमरे के जरिये देखा गया। उनकी सबसे हालिया पुष्टि सद्रबल में देर रात को हुई।
भालुओं के बार-बार दिखने से स्थानीय लोगों की रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ा है। कई सुबह-सुबह खुलने वाले व्यापारिक संस्थानों के मालिकों को अपना काम शुरू करने में देरी करनी पड़ रही है। बेकरी वाले जो आमतौर पर ठंड के बावजूद सुबह होने से पहले ही काम शुरू कर देते हैं। अब सुरक्षा कारणों से बहुत देर से दुकान खोल रहे हैं। बार-बार भालुओं के दिखने से उत्तरी श्रीनगर में शाम को डर का माहौल बन गया है। हजरतबल, कनीतार, निगीन, सोवरा और आस-पास के इलाकों में माता-पिता ने बच्चों को शाम ढलने के बाद बाहर निकलने से रोक दिया है।
वन्यजीव विभाग ने जारी की एडवाइजरी
वन्यजीव अधिकारियों ने कई एडवाइजरी जारी की हैं जिसमें निवासियों से जंगल के किनारों पर खाने का कचरा न फेंकने की अपील की गई है। इस वजह से जंगली जानवर इंसानी बस्तियों में और अंदर आ रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक जानवरों का आना बड़े इकोलॉजिकल बदलावों से जुड़ा है। स्वस्थ जंगलों की वजह से भालुओं की आबादी बढ़ी है। लेकिन इंसानी दखल, सर्दियों के बिगड़े हुए साइकिल, खाने की कमी और मौसम में बदलाव जानवरों को उनके नेचुरल घर से बाहर धकेल रहे हैं, ऐसे समय में जब उन्हें सुस्त होकर आराम करना चाहिए। इस बीच विभाग की विभिन्न टीमें ट्रैंक्यूलाइज़र बंदूकें और ड्रोन लेकर विभिन्न बस्तियों में निगरानी कर रही हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। एक हफ्ते से ज्यादा समय से श्रीनगर में एक अजीब तरह का कर्फ्यू लगा हुआ है। यह कर्फ्यू अधिकारियों ने नहीं लगाया है बल्कि दो काले भालुओं ने लगाया है जो शहर में घुस आए हैं और जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनकी रात की हरकतों ने पूरे इलाकों को ठप कर दिया है।
कैंपस की जिंदगी खराब कर दी है। तलाशी अभियान शुरू किया गया और लोग घबराकर मजाक कर रहे हैं कि ये जानवर घाटी के बड़े संस्थानों का सिटी टूर कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ये दोनों भालू दारा के जंगल से आए हैं। उन्होंने शहरी माहौल में खुद को बहुत अच्छे से ढाल लिया है। उनका पीछा तेज रफ्तार मोटरसाइकिलों ने किया। कुत्तों के झुंड ने उन्हें घेर लिया है और थर्मल ड्रोन से उनकी निगरानी की गई फिर भी वे हर पकड़ने की कोशिशों से बच निकलते हैं। वन्यजीव विभाग टीमों का कहना है कि अपना पूरा जोर लगाने के बावजूद भालू उनसे एक कदम आगे रहते हैं।
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यह सिलसिला 27 नवंबर को शुरू हुआ जब निगीन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) के सिक्योरिटी कैमरों में पहली बार उनकी साफ तस्वीर कैद हुई। कुछ ही घंटों में वन्यजीव विभाग के अधिकारी कैंपस पहुंच गए लेकिन तब तक जानवर वहां से जा चुके थे। दो दिन बाद एक भालू हजरतबल में कश्मीर यूनिवर्सिटी कैंपस के पास दिखाई दिया। गली के कुत्तों ने उसका पीछा किया और वह घबराया हुआ लग रहा था। वह लड़कियों के हॉस्टल कॉम्प्लेक्स में कूद गया और रेस्पांस टीम के पहुंचने से पहले ही गायब हो गया।
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इसके बाद शहर भर में कई बार उन्हें देखा गया। उन्हें सौरा में शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) में देखा गया जहां देर रात सीसीटीवी में हलचल के कारण सिक्योरिटी को गेट बंद करने पड़े। उन्हें मीरवाइज मंज़िल के आस-पास भी देखा गया। बाद में, स्थानीय लोगों ने एक भालू को निगीन झील में तैरते हुए सीसीटीवी कैमरे के जरिये देखा गया। उनकी सबसे हालिया पुष्टि सद्रबल में देर रात को हुई।
भालुओं के बार-बार दिखने से स्थानीय लोगों की रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ा है। कई सुबह-सुबह खुलने वाले व्यापारिक संस्थानों के मालिकों को अपना काम शुरू करने में देरी करनी पड़ रही है। बेकरी वाले जो आमतौर पर ठंड के बावजूद सुबह होने से पहले ही काम शुरू कर देते हैं। अब सुरक्षा कारणों से बहुत देर से दुकान खोल रहे हैं। बार-बार भालुओं के दिखने से उत्तरी श्रीनगर में शाम को डर का माहौल बन गया है। हजरतबल, कनीतार, निगीन, सोवरा और आस-पास के इलाकों में माता-पिता ने बच्चों को शाम ढलने के बाद बाहर निकलने से रोक दिया है।
वन्यजीव विभाग ने जारी की एडवाइजरी
वन्यजीव अधिकारियों ने कई एडवाइजरी जारी की हैं जिसमें निवासियों से जंगल के किनारों पर खाने का कचरा न फेंकने की अपील की गई है। इस वजह से जंगली जानवर इंसानी बस्तियों में और अंदर आ रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक जानवरों का आना बड़े इकोलॉजिकल बदलावों से जुड़ा है। स्वस्थ जंगलों की वजह से भालुओं की आबादी बढ़ी है। लेकिन इंसानी दखल, सर्दियों के बिगड़े हुए साइकिल, खाने की कमी और मौसम में बदलाव जानवरों को उनके नेचुरल घर से बाहर धकेल रहे हैं, ऐसे समय में जब उन्हें सुस्त होकर आराम करना चाहिए। इस बीच विभाग की विभिन्न टीमें ट्रैंक्यूलाइज़र बंदूकें और ड्रोन लेकर विभिन्न बस्तियों में निगरानी कर रही हैं।