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Srinagar: संकटग्रस्त ईरान से 30 से अधिक कश्मीरी छात्रों की घर वापसी, परिजनों ने ली राहत की सांस; आज और लौटेंगे

Sun, 18 Jan 2026 01:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 18 Jan 2026 01:02 AM IST
सार

आज और छात्रों के लौटने की उम्मीद है। वहीं अभिभावकों ने कहा कि हमारे बच्चे सुरक्षित घर पहुंचे हैं इससे बड़ी खुशी हमारे लिए कोई नहीं है।

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Srinagar: Over 30 Kashmiri students return home from crisis-hit Iran
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच शनिवार को करीब तीस से अधिक छात्र ईरान से कश्मीर घाटी लौट आए। रविवार को और छात्रों के लौटने की उम्मीद है। वहीं अभिभावकों ने कहा कि हमारे बच्चे सुरक्षित घर पहुंचे हैं इससे बड़ी खुशी हमारे लिए कोई नहीं है।

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बड़गाम जिले के मागाम की जोहा सैयदा वापस लौटी हैं। पिता सैयद अख्तर ने बताया कि बेटी जोहा तेहरान यूनिवर्सिटी की छात्रा है। शुक्रवार को ईरान से निकली थी और आज वह सुरक्षित श्रीनगर पहुंची है। उनके वापसी में कई छात्र संगठनों और एक्स स्टूडेंट्स ने अच्छी भूमिका निभाई है। वे समय-समय पर हमें अपडेट देते रहे हैं। वहां हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं लेकिन उनिवेर्सित्य प्रबंधन ने उनकी अच्छे से देखभाल की और लगातार अपडेट मिलते रहे। ज्यादा परेशानी तब हुई जब इंटरनेट बंद हुआ। कई छात्र खुद लौटे हैं।
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जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि तीस से ज्यादा कश्मीरी छात्र ईरान से सुरक्षित भारत लौट आए हैं। एक ग्रुप शिराज से शारजाह और फिर दिल्ली के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट से आया। दूसरी फ्लाइट सीधे तेहरान से दिल्ली के लिए थी। तेहरान में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने छात्रों को एयरपोर्ट तक पहुंचाने में मदद की।
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खुएहामी ने कहा कि सभी छात्रों ने अपने खर्च पर यात्रा की और इन दोनों फ्लाइट्स में काफी संख्या में तीर्थयात्री भी सवार थे। छात्र सुरक्षित रूप से घरों को लौट गए हैं। उम्मीद है कि आज और छात्र आएंगे क्योंकि उन्होंने कॉमर्शियल फ्लाइट्स बुक कर ली हैं। तेहरान में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने जेकेएसए को बताया है कि भारत सरकार का औपचारिक निकासी अभियान अभी भी रुका हुआ है। दूतावास छात्रों के सीधे संपर्क में है। निकासी जरूरी हुई तो उन्हें आधिकारिक चैनलों के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से सूचित करेगा।

खुएहामी ने कहा, जेकेएसए लगातार विदेश मंत्रालय (एमईए) और तेहरान में भारतीय दूतावास के साथ संपर्क और तालमेल बनाए हुए है जो ईरानी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ईरान में बचे सभी छात्र सुरक्षित और ठीक हैं। छात्रों के परिवारों ने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के अधिकारियों का आभार जताया है।

कश्मीर के 2000 से अधिक छात्र गए हैं ईरान
एसोसिएशन ने कहा कि कश्मीर घाटी के करीब 2000 से अधिक छात्र कुछ सप्ताह से ईरान में तनावपूर्ण हालातों के बीच फंसे हैं। इसके चलते उनके अभिभावक काफी चिंतित थे। यह चिंता तब और ज्यादा बढ़ गई जब वहां कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हो गया था लेकिन शनिवार को करीब तीस से अधिक छात्र कश्मीर घाटी लौटे हैं, जिससे सभी अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।

234 छात्रों की पढ़ाई अधर में फंसी
अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध के हालात बन रहे हैं। इससे ईरान में पढ़ रहे जम्मू-कश्मीर के मेडिकल के करीब 234 छात्र पढ़ाई अधूरी छोड़ लौट रहे हैं। इससे इन छात्रों की पढ़ाई अधर में फंस गई है क्योंकि इनको पढ़ाई पूरी करने के लिए यहां के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलेगा। वापस आ रहे छात्रों में 70 प्रतिशत कश्मीर और 30 प्रतिशत छात्र जम्मू के बताए जा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. संदीप डोगरा ने बताया कि विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र यहां अपनी पढ़ाई किसी भी मेडिकल कॉलेज में जारी नहीं रख पाएंगे। उनको कहीं प्रवेश नहीं दिया जा सकता। नियमों के अनुसार ऐसे छात्रों को भारत सरकार से मान्यता प्राप्त किसी विदेश के मेडिकल कॉलेज में ही दोबारा प्रवेश लेना होगा। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वह देश में वापस आएंगे तो वे यहां प्रैक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एक्जामिनेशन (एफएमजी) को पास करेंगे। ऐसा न करने वाले छात्रों को प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।

विदेश से पढ़ाई कर आए 2367 डॉक्टर
डॉ. संदीप ने बताया कि पांच साल में विदेश में पढ़ाई करने के बाद एफएमजी परीक्षा पास कर जम्मू-कश्मीर में आने वाले 2367 डॉक्टरों ने अपना रजिस्ट्रेशन काउंसिल के पास कराया है। यह आंकड़ा 2021 से 2025 तक का है। एफएमजी परीक्षा कठिन होने से 20 प्रतिशत डॉक्टर ही विदेश से आकर इसे उत्तीर्ण कर पाते हैं। बिना परीक्षा पास किए वे देश में प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं। वहीं, इस अवधि में जम्मू कश्मीर में पढ़ने वाले 3215 डॉक्टरों ने काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया है। 2270 डॉक्टरों ने दूसरे प्रदेशों मेें प्रैक्टिस के लिए एनओसी मांगी है।


ईरान में पढ़ाई छोड़कर आने के बाद छात्र यहां किसी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं ले सकेंगे। नियमों के अनुसार उनको पढ़ाई विदेश जाकर ही पूरी करनी होगी। मौजूदा समय में 234 छात्र ईरान में पढ़ने गए जो लौट रहे हैं। इनमें से कितने वापस आ चुके हैं यह जानकारी नहीं है।
-डॉ.संदीप डोगरा, रजिस्ट्रार, जम्मू-कश्मीर मेडिकल काउंसिल

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