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Srinagar News: आयात पर निर्भरता घटाएगा नया ट्यूलिप अनुसंधान केंद्र

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Srinagar, New Tulip Research Centre, Anantnag, Dependency will Less in Import
अनंतनाग में स्थानीय पुष्प उत्पादन को देगा बढ़ावा
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संवाद न्यूज एजेंसी
अनंतनाग। कश्मीर घाटी में पर्यटन और फ्लोरीकल्चर (पुष्प उत्पादन) को बढ़ावा देने की कवायद जारी है। अनंतनाग जिले के कोकरनाग क्षेत्र के सगाम में स्थित माउंटेन क्रॉप रिसर्च स्टेशन अब एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन, इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन को उच्च गुणवत्ता वाले ट्यूलिप बल्ब और बीजों की आपूर्ति शुरू करने जा रहा है।
यह अनुसंधान केंद्र शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्काॅस्ट) कश्मीर की ओर से तंगपावा सगाम में 407 कनाल भूमि पर आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों से विकसित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यहां उच्च गुणवत्ता वाले ट्यूलिप बल्बों और बीजों के उत्पादन, प्रजनन (ब्रीडिंग) और शोध पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब तक अधिकांश ट्यूलिप बल्ब विदेशी बाजारों से आयात किए जाते थे लेकिन इस केंद्र की स्थापना से आने वाले वर्षों में स्थानीय स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष परीक्षण के तौर पर लगाए गए ट्यूलिप बल्बों से उत्साहजनक परिणाम मिले। इस वर्ष खेती को भूमि के बड़े हिस्से में विस्तार दिया गया है। पिछले साल यह केंद्र बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करने में सफल रहा जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए। माउंटेन क्रॉप रिसर्च स्टेशन में तैनात डॉ. मोहम्मद अशरफ ने कहा कि यह पहल कश्मीर में ट्यूलिप की खेती को अधिक संगठित और टिकाऊ बनाएगी। उन्होंने बताया कि भारत हर साल विदेशी बाजारों से लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के ट्यूलिप आयात करता है।
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इस निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने सगाम में यह अनुसंधान केंद्र स्थापित किया है जहां इस समय ट्यूलिप की कई किस्मों की खेती की जा रही है। डॉ. अशरफ ने यह भी बताया कि इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के सहयोग से एक योजना के तहत आठ करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है और निर्माण कार्य जारी है।
उन्होंने कहा,आने वाले वर्षों में आयात को न्यूनतम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। माउंटेन रिसर्च सेंटर, तंगपावा सगाम के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. मोहम्मद अयूब मंटू ने को बताया कि इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बीज और बल्ब उत्पादन को अधिकतम करना है।

पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ट्यूलिप की खेती पर जोर
उन्होंने कहा कि सरकार ट्यूलिप बल्बों के आयात पर भारी धनराशि खर्च कर रही थी। लागत कम करने के लिए विभाग ने घरेलू स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा देने का फैसला किया और पिछले दो वर्षों से इस दिशा में काम चल रहा है। किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ट्यूलिप की खेती अपनाने के लिए भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
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