फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Srinagar, Highcourt, Petition Cancel

अदालतें अभियोजन की जुबान बनकर काम नहीं कर सकतीं : हाईकोर्ट

विज्ञापन
Srinagar, Highcourt, Petition Cancel
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


श्रीनगर। जेएंडके और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने का फैसला करते समय अदालत सिर्फ अभियोजन की बात मानकर उसकी जुबान नहीं बन सकती। उसे रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए ताकि यह तय किया जा सके कि आरोपी के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।

सरकार की ओर से दायर एक क्रिमिनल रिविजन याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस संजय धर की बेंच ने भ्रष्टाचार के एक मामले में मंजूर अहमद डार को बरी करने के फैसले को सही ठहराया। यह मामला विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन कश्मीर की ओर से दर्ज एफआईआर से जुड़ा था जिसमें डार (जो सुंबल के तहसील ऑफिस में अर्दली थे) भी आरोपी थे।
विज्ञापन


यह मामला इन आरोपों से जुड़ा था कि तत्कालीन ऑफिस कानूनगो नजीर अहमद वानी और तहसीलदार सैयद शब्बीर अहमद अंद्राबी ने रेवेन्यू म्यूटेशन (राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव) लागू करने के लिए एक शिकायतकर्ता से 40,000 रुपये की रिश्वत मांगी और ली थी। प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, 35,000 रुपये का भुगतान एक बेयरर चेक के जरिए किया गया था जिसे कथित तौर पर नजीर अहमद वानी ने मंज़ूर अहमद डार को कैश कराने के लिए दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed