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Srinagar News: सीसीआईके के पर्यटन, पर्यावरण व सेवा क्षेत्र के प्रयासों को सरकार का पूर्ण समर्थन का दिलाया भरोसा
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श्रीनगर। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (सीसीआईके) की कार्यकारिणी बैठक शुक्रवार को श्रीनगर में आयोजित हुई। इसमें कैबिनेट मंत्री जावेद अहमद राणा और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी शामिल हुए। इस दौरान दोनों ने सीसीआईके के पर्यटन, पर्यावरण एवं सेवा क्षेत्र के प्रयासों को सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, नाजुक पर्यावरणीय संपदाओं की रक्षा करना तथा सतत विकास के लिए आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार करना रहा। सीसीआईके ने पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को रखा जिनमें हाउसबोट मरम्मत के लिए लकड़ी की आपूर्ति प्रमुख थी। यह कश्मीर की विरासत पर्यटन को बचाने के लिए लंबे समय से लंबित मांग है।
चैंबर ने इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म तथा वन क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल रिसॉर्ट्स और लग्जरी कैंपिंग सुविधाओं के माध्यम से पर्यटन को विविधता देने पर जोर दिया। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण समिति की मंजूरी के लिए एकल खिड़की प्रणाली को सरल बनाने की मांग की।
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सीसीआईके ने कहा कि मौजूदा बहु-स्तरीय मंजूरी प्रक्रिया पर्यटन, आतिथ्य एवं इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बड़ी बाधा बन गई है। समयबद्ध एवं सरलीकृत तंत्र से अनुपालन बेहतर होगा और निवेश माहौल मजबूत होगा।
सार्वजनिक सुविधाओं के मुद्दे पर चैंबर ने पहलगाम में होटल व्यवसायियों को हो रही अनियमित पेयजल आपूर्ति और सीमित टैंकर सेवाओं की समस्या उठाई। जल शक्ति मंत्री से हस्तक्षेप कर खासकर पीक सीजन में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विश्वसनीय जलापूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की। पर्यावरण संरक्षण चर्चा का अहम हिस्सा रहा। सीसीआईके ने डल, निगीन, वुलर, आंचार सहित अन्य जलाशयों की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई।
चैंबर ने व्यापक सफाई अभियान, अतिक्रमण-मुक्त सख्त सुरक्षा उपायों तथा जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ी सभी सरकारी परामर्श प्रक्रियाओं में औपचारिक रूप से शामिल करने की मांग की। बाबादेम झील की खराब होती स्थिति पर तत्काल पुनर्स्थापना एवं दीर्घकालिक संरक्षण की मांग उठाई। कश्मीर को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए सीसीआईके ने इसे प्रीमियर वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में ब्रांडिंग करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही आरु एवं अन्य पर्यटन स्थलों पर प्रवेश शुल्क की संरचना की समीक्षा कर इसे प्रतिस्पर्धी और पर्यटक-अनुकूल बनाने की मांग की। मंत्री जावेद और सलाहकार वानी ने भरोसा दिलाया कि सभी वाजिब मांगों को समयबद्ध एवं प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
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बैठक का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, नाजुक पर्यावरणीय संपदाओं की रक्षा करना तथा सतत विकास के लिए आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार करना रहा। सीसीआईके ने पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को रखा जिनमें हाउसबोट मरम्मत के लिए लकड़ी की आपूर्ति प्रमुख थी। यह कश्मीर की विरासत पर्यटन को बचाने के लिए लंबे समय से लंबित मांग है।
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चैंबर ने इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म तथा वन क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल रिसॉर्ट्स और लग्जरी कैंपिंग सुविधाओं के माध्यम से पर्यटन को विविधता देने पर जोर दिया। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण समिति की मंजूरी के लिए एकल खिड़की प्रणाली को सरल बनाने की मांग की।
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सीसीआईके ने कहा कि मौजूदा बहु-स्तरीय मंजूरी प्रक्रिया पर्यटन, आतिथ्य एवं इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बड़ी बाधा बन गई है। समयबद्ध एवं सरलीकृत तंत्र से अनुपालन बेहतर होगा और निवेश माहौल मजबूत होगा।
सार्वजनिक सुविधाओं के मुद्दे पर चैंबर ने पहलगाम में होटल व्यवसायियों को हो रही अनियमित पेयजल आपूर्ति और सीमित टैंकर सेवाओं की समस्या उठाई। जल शक्ति मंत्री से हस्तक्षेप कर खासकर पीक सीजन में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विश्वसनीय जलापूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की। पर्यावरण संरक्षण चर्चा का अहम हिस्सा रहा। सीसीआईके ने डल, निगीन, वुलर, आंचार सहित अन्य जलाशयों की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई।
चैंबर ने व्यापक सफाई अभियान, अतिक्रमण-मुक्त सख्त सुरक्षा उपायों तथा जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ी सभी सरकारी परामर्श प्रक्रियाओं में औपचारिक रूप से शामिल करने की मांग की। बाबादेम झील की खराब होती स्थिति पर तत्काल पुनर्स्थापना एवं दीर्घकालिक संरक्षण की मांग उठाई। कश्मीर को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए सीसीआईके ने इसे प्रीमियर वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में ब्रांडिंग करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही आरु एवं अन्य पर्यटन स्थलों पर प्रवेश शुल्क की संरचना की समीक्षा कर इसे प्रतिस्पर्धी और पर्यटक-अनुकूल बनाने की मांग की। मंत्री जावेद और सलाहकार वानी ने भरोसा दिलाया कि सभी वाजिब मांगों को समयबद्ध एवं प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।