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J&K: घाटी में धर्मगुरुओं ने नशों के खिलाफ मोर्चा संभाला, बोले- नशा बेचने वालों की 'नमाज-ए-जनाजा' नहीं होंगी

Sat, 09 May 2026 06:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 09 May 2026 06:21 AM IST
सार

जम्मू कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने एक औपचारिक फतवा जारी किया, जिसमें नशों की तस्करी से होने वाली सारी कमाई को 'हराम' करार दिया गया है। इस फतवे के मुताबिक मस्जिदें और दरगाहें नशा बेचने वालों से किसी भी तरह का चंदा या दान स्वीकार नहीं कर सकतीं।
 

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Mufti will not conduct funeral prayers for drug smugglers in the Valley
मुफ्ती नासिर उल इस्लाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में 100-दिवसीय नशा-विरोधी अभियान जैसे-जैसे पूरे जम्मू-कश्मीर में जोर पकड़ रहा है, ऐसे में घाटी के कई हिस्सों में नमाज पढ़ाने वाले इमाम और धर्मगुरु भी इस लड़ाई में सबसे आगे आ गए हैं। यह पहली बार है जब इमामों द्वारा नशों के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में इतनी अहम भूमिका निभाई जा रही हो। 'नशा मुक्त जम्मू कश्मीर अभियान के तहत 'जमीयत-ए-आइमा मस्जिद सोपोर' एक जागरूकता अभियान शुरू करने जा रही है, जिसके तहत मस्जिदों के मंचों का इस्तेमाल करके सीधे परिवारों तक पहुंचा जाएगा। 

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मौलवी रियाज अहमद बोले कि यह हमारी जिम्मेदारी है। हम कब तक पीछे रहेंगे। इससे पहले ही, एक खूनी संघर्ष में हमारी कई पीढ़ियां तबाह हो चुकी हैं। पहले आतंकवाद और अब यह नशा हमारी युवा पीढ़ी के लिए चुनौती बनता जा रहा है।  हम उन्हें दोबारा खोने का जोखिम नहीं उठा सकते। उन्होंने आगे कहा कि नशों के खिलाफ आवाज उठाना हर किसी का फर्ज है। हम यहां  प्रशासन की जगह लेने नहीं आए हैं। हम तो अपने नैतिक प्रभाव से प्रशासन का साथ देने आए हैं। 
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बारामुला के मौलवी गुलाम रसूल ने कहा कि मस्जिद सिर्फ इबादत की जगह नहीं है, बल्कि यह समाज को सही राह दिखाने का भी एक जरिया है। वर्षों तक हमने सिर्फ नमाज पढ़ी। अब हमें लोगों को आगाह भी करना होगा। नशे की सुई भी गोली जितनी ही खतरनाक है। इस महीने की शुरुआत में मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी उमर फारूक ने कहा था कि अल्लाह की नजर में हर इंसान की जान कीमती है और उन्होंने नशों के खिलाफ मिलकर कदम उठाने को आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया था। 
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एक अहम कदम उठाते हुए जम्मू कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने एक औपचारिक फतवा जारी किया, जिसमें नशों की तस्करी से होने वाली सारी कमाई को 'हराम' करार दिया गया है। इस फतवे के मुताबिक मस्जिदें और दरगाहें नशा बेचने वालों से किसी भी तरह का चंदा या दान स्वीकार नहीं कर सकतीं। इसके अलावा ऐसे पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने या किसी भी तरह के भलाई के काम के लिए भी नहीं किया जा सकता। ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की कोई ढील नहीं दी जा सकती। मैं समाज से अपील करता हूं कि वे नशा बेचने वालों का सामाजिक बहिष्कार करें। 

अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए ग्रैंड मुफ्ती ने एक बड़ा बयान दिया कि नशा बेचने वाले से बड़ा गुनेहगार कोई नहीं है और ऐसे लोगों का नमाज-ए-जनाजा नहीं पढ़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज के, इंसानियत के खासकर बच्चों के दुश्मन हो उनके साथ कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। अगर मरने से पहले वो तौबा कर लें और लोगों के सामने माफी मांगें तब तो ठीक है। लेकिन वह अड़े रहे अपने नापाक कार्यों को अंजाम देने के लिए तो कैसे उनका जनाजा पढ़ेंगे। लोगों को पूरी तरह से ऐसे तत्वों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए।      

पुलवामा में समाज-सेवी मौलाना शौकत अहमद डार ने भी कहा कि नशों की समस्या अब एक बहुत ही गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है। मैंने कई परिवारों को अपनी जमीन, अपने गहने और यहां तक कि अपनी इज्जत भी बेचते हुए देखा है और यह सब सिर्फ नशे की एक खुराक के लिए होता है। हमने यह कसम खाई है कि हम हर शुक्रवार को इस मुद्दे पर आवाज उठाएंगे, जब तक कि नशे का शिकार हुआ आखिरी इंसान भी इस दलदल से बाहर नहीं निकल जाता। ऐसे ही काफी सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मगुरु हैं जिनका कहना है कि धार्मिक नेताओं के शामिल होने से अभियान का स्वरूप बदल जाता है। पहले सिर्फ पुलिस, प्रशासन और डॉक्टर ही बात करते थे। वह बात दिमाग तक पहुंचती थी। लेकिन जब कोई इमाम या धर्मगुरु बात करता है तो वह दिल तक पहुंचती है। 


गौरतलब है कि उनका कहना है कि एलजी मनोज सिन्हा के अभियान ने हमें गति दी। अब जब इमाम खुद इस बारे में खुलकर बात कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब तीन सप्ताह में पूरी घाटी में 50 हज़ार से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों में 51 लाख से ज्यादा नागरिकों ने हिस्सा लिया है। करीब 1500 से अधिक यूथ क्लब सक्रिय किए हैं और मस्जिदों तथा अन्य धार्मिक संस्थानों में नशे के खिलाफ सैंकड़ों उपदेश दिए गए हैं।

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