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मांगल गीतों से गूंजी श्रीनगर नगरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Mon, 09 Jan 2017 10:44 PM IST
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श्रीनगर में मांगल गीत प्रतियोगिता में अपनी बारी का इंतजार करती महिलाएं।
- फोटो : amar ujala.
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अदिति स्मृति न्यास की ओर से सोमवार से राज्य स्तरीय मांगल गीत प्रतियोगिता शुरू हो गई है। पहले दिन महिलाओं ने कनके जौलू मां चौंडांड्यू पार त्वे मेरी लाडी इकुली नि भेजलू...आज बटी लाडी बिराड़ी ह्वे ग्याई... दानू मां का दान गौ कन्या दान अन्न दान भूमि दान सब कोई देला तुम देला बाबा जी गौ कन्या दान.. जैसे बेटी की विदाई के मांगल गीत गाए।
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कमलेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना के बाद शहर क्षेत्र में संस्कृति यात्रा आयोजित की गई। इसके बाद पारंपरिक मांगल गीतों और वाद्ययंत्रों के साथ स्थानीय वेडिंग प्वाइंट में मुख्य अतिथि गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एमएसएम रावत ने प्रतियोगिता का शुभारंभ करते हुए कहा कि मांगल प्रतियोगिता विलुप्त हो रही गढ़वाली परंपराओं को पुनर्जीवित करने में मील का पत्थर साबित होगी।
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आयोजन समिति के गिरीश पैन्यूली ने कहा कि प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा पीढ़ी को गढ़वाली व कुमाऊंनी संस्कृति की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में राज्य भर की 72 टीमें प्रतिभाग कर रही हैं। जिसमें से प्रतिदिन 24 टीमें अपनी प्रस्तुति देंगी। प्रत्येक टीम में अधिकतम आठ महिलाएं शामिल हो सकती हैं।
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पहले दिन गायत्री मांगल समिति, मांगल दल त्वींचा, शहरी ग्रामीण उत्थान समिति पौड़ी, मांगल समिति पौड़ी, गणेश मांगल समिति घसिया महादेव सबसे अधिक अंको के साथ आगे रहे। निर्णायक की भूमिका में प्रसिद्ध संस्कृति व रंगकर्मी प्रो डीआर पुरोहित, माधुरी बर्त्वाल, मनोज थापा आदि शामिल थे। प्रतियोगिता के आयोजन में लोक गायक अनिल बिष्ट, एसपी खंगरियाल, संजय कुमार गुप्ता, संतोष तिवाड़ी, त्रिभुवन उनियाल, विजय रावल आदि उपस्थित थे। प्रतियोगिता का संचालन डा. संजय पांडेय ने किया।
क्या होते हैं मांगल गीत
श्रीनगर। शादी, जन्मोत्सव, मुंडन आदि जैसे मांगलिक समारोह के दौरान मांगलगीत गाए जाते है। मांगल गीतों में देव स्तुति के साथ ही हंसी मजाक भी शामिल होता है। विशेषकर शादी समारोह में बारातियों के स्वागत के दौरान गाए जाने वाले मांगल काफी रोचक होते हैं।
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हमारा पहनावा, रीति-रिवाज विलुप्ति की कगार पर हैं, लेकिन कोई सहेजने को तैयार नहीं। युवा पीढ़ी हमारी संस्कार, परंपरा को आगे बढ़ा सके, इसके लिए ऐसे आयोजन जरूरी है।
ठूमा देवी, 75 वर्षीय, प्रतिभागी, नागकोट अगस्त्यमुनि,
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मांगल गीतों में सीख, आशीर्वाद, संस्कार होते हैं। शादी के दौरान अलग-अलग मांगल गीत होते हैं। विदाई के समय जहां माता पिता को ढांसस बंधाने के लिए मांगल गीत गाए जाते हैं। वहीं बारात स्वागत के दौरान माहौल को खुशनुमा करने के लिए मजाकिया अंदाज में रोचक मांगल गाए जाते हैं। इन्हें संजोना जरूरी है।
चंदा देवी, 70 वर्षीय , नागकोट निवासी