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कश्मीर के सिल्क उद्योग को आधुनिकीकरण से मिलेगी नई पहचान

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Kashmir's silk industry will get a new identity through modernization
श्रीनगर की सिल्क फैक्ट्री में काम करते कारीगर।
श्रीनगर। दुनिया कश्मीर के पशमीना के बारे में तो दुनिया जानती है परंतु यहां के रेशम के बारे में लोग कम जानते हैं। अपनी पहचान को स्थापित करने के लिए कश्मीर का सिल्क उद्योग फिर से नई उड़ान भरने को तैयार है। वर्ष 2014 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए श्रीनगर के सबसे बड़े रेशम कारखाने का प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत वर्ल्ड बैंक की मदद से इस हेरिटेज फैक्ट्री का आधुनिकीकरण किया गया है। इस पर 18 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हाल ही में प्रदेश के उपराज्यपाल ने इसका उद्घाटन भी किया है। अब हर साल 3 लाख मीटर सिल्क तैयार किया जाएगा। पहले इसकी कारखाने की उत्पादन क्षमता सिर्फ 50 हजार मीटर थी। दुनिया के बीच इसकी बेहतर मार्केटिंग के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
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इकनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी (ईआरए) के सीईओ आबिद राशिद शाह बताते हैं कि विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित झेलम-तवी फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट पीएम विकास पैकेज के तहत जम्मू - कश्मीर में इसके तहत सिल्क इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करने की कोशिश है। सिल्क इंडस्ट्री को आधुनिक बाजार से कैसे जोड़ा जाए, इस पर काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि राजबाग स्थित इस फैक्ट्री के आधुनिकीकरण के तहत न सिर्फ बिल्डिंग खूबसूरत बनाई गई है, बल्कि आयातित मशीनों से इसकी क्षमता बढ़ाई गई है। इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव रहा है और आने वाले समय में कश्मीर के रेशम को पुख्ता पहचान मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहली बार तैयार किए गए डेटाबेस से पता चला है कि 3.5 लाख लोग विभिन्न उद्योगों से जुड़े हुए हैं। करीब 40 हजार परिवार हैं जो सीधे तौर पर इससे जुड़े हुए हैं। आबिद ने बताया कि हमने एक परामर्श दात्री संस्था को भी जोड़ा है जो प्रदेश के उत्पादों की ब्रांडिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेगी।
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आठ किस्मों पर सिमट गया था उत्पादन
सिल्क फैक्ट्री के प्रबंधक मीर इलाही ने बताया कि वर्ष 2014 में जब बाढ़ आई थी तब 50 प्रतिशत से अधिक मशीनरी क्षतिग्रस्त हो गई थी। 50 प्रतिशत स्पिंडल क्षतिग्रस्त हो गए थे। उन्होंने बताया कि पहले हम रेशम की 38 किस्मों का उत्पादन करते थे लेकिन नुकसान के कारण कुल आठ किस्मों का ही उत्पादन हो पा रहा था। अब हमें आधुनिक मशीनें और उपकरण मिले हैं। हम नई किस्में बना रहे हैं।

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38 किस्म का रेशम उत्पादित होगा
सिल्क उत्पादन का काम करने वाले किसान जावेद अहमद शाह ने बताया कि नई मशीनों से ज्यादा प्रोडक्शन होगा तो वेतन भी बढ़ेगा। जावेद ने बताया कि नई मशीन से काम अच्छा निकल रहा है, डिजिटल मशीन हैं। सरकार के इस कदम से कश्मीर का सिल्क उद्योग फिर से उभरेगा। कश्मीर घाटी में रेशम की 38 से अधिक किस्मों का उत्पादन किया जाता है।
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