{"_id":"69dfeb2caf727c0c600d3c39","slug":"jammu-kashmir-news-srinagar-news-c-10-lko1027-888200-2026-04-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: दृष्टिबाधित जैनब नेे 10वीं की परीक्षा में पाए 95 प्रतिशत अंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: दृष्टिबाधित जैनब नेे 10वीं की परीक्षा में पाए 95 प्रतिशत अंक
विज्ञापन
श्रीनगर। लगन और निरंतरता के साथ तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए, श्रीनगर की एक दृष्टिबाधित छात्रा ने बुधवार को घोषित सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक हासिल करके एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी लिखी है। उसने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प के आगे कोई बाधा नहीं टिकती।
श्रीनगर के बादशाह नगर, नटीपोरा की रहने वाली और पूरी तरह से दृष्टिबाधित छात्रा जैनब बिलाल ने 500 में से 475 अंक हासिल किए। वह छात्रों के लिए, विशेष रूप से उन छात्रों के लिए जो शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, आशा और प्रेरणा की एक किरण बनकर उभरी है। जैनब ने कहा कि उसे एक अच्छे परिणाम की उम्मीद थी। प्रदर्शन को देख कर खुश हूं। मेरी उम्मीद थी कि परिणाम अच्छा होगा, लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह, मेरे अंक बहुत अच्छे आए हैं। सच कहूं तो, मैंने इतने ज्यादा अंक लाने के बारे में नहीं सोचा था। मेरे माता-पिता मेरे सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। मेरी मां, पिता और यहां तक कि मेरे दादाजी भी हर कदम पर मेरे साथ खड़े रहे। मैं दिल्ली पब्लिक स्कूल, श्रीनगर के अपने सभी शिक्षकों को भी धन्यवाद देना चाहूंगी। जैनब ने स्कूल के लर्निंग रिसोर्स सेंटर का भी विशेष रूप से जिक्र किया और कहा कि इसने उसे न केवल शैक्षणिक सहायता प्रदान की, बल्कि भावनात्मक और मानसिक संबल भी दिया। वह सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि वह कंप्यूटर से संबंधित कुछ करना चाहूंगी, शायद बैचलर इन कंप्यूटर एप्लीकेशंस। माता-पिता को कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि उनका बच्चा कुछ हासिल नहीं कर सकता। उन्हें अपने बच्चों का साथ देना और उन पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीनगर के बादशाह नगर, नटीपोरा की रहने वाली और पूरी तरह से दृष्टिबाधित छात्रा जैनब बिलाल ने 500 में से 475 अंक हासिल किए। वह छात्रों के लिए, विशेष रूप से उन छात्रों के लिए जो शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, आशा और प्रेरणा की एक किरण बनकर उभरी है। जैनब ने कहा कि उसे एक अच्छे परिणाम की उम्मीद थी। प्रदर्शन को देख कर खुश हूं। मेरी उम्मीद थी कि परिणाम अच्छा होगा, लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह, मेरे अंक बहुत अच्छे आए हैं। सच कहूं तो, मैंने इतने ज्यादा अंक लाने के बारे में नहीं सोचा था। मेरे माता-पिता मेरे सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। मेरी मां, पिता और यहां तक कि मेरे दादाजी भी हर कदम पर मेरे साथ खड़े रहे। मैं दिल्ली पब्लिक स्कूल, श्रीनगर के अपने सभी शिक्षकों को भी धन्यवाद देना चाहूंगी। जैनब ने स्कूल के लर्निंग रिसोर्स सेंटर का भी विशेष रूप से जिक्र किया और कहा कि इसने उसे न केवल शैक्षणिक सहायता प्रदान की, बल्कि भावनात्मक और मानसिक संबल भी दिया। वह सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वह कंप्यूटर से संबंधित कुछ करना चाहूंगी, शायद बैचलर इन कंप्यूटर एप्लीकेशंस। माता-पिता को कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि उनका बच्चा कुछ हासिल नहीं कर सकता। उन्हें अपने बच्चों का साथ देना और उन पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
विज्ञापन