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खौफ के साये से बाहर निकला केरन: एलओसी पर गूंजने लगे पर्यटकों के ठहाके, गोलियों की जगह ले रही शांति
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कुपवाड़ा। उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बसा केरन इलाका जो कभी सीमा पार से होने वाली भारी गोलाबारी और खौफ के लिए जाना जाता था, आज शांति और पर्यटन की एक नई मिसाल पेश कर रहा है। कभी जहां गोलियों की तड़तड़ाहट और मोर्टार शेलिंग के डर से लोग सहमे रहते थे, वहां आज दूर-दराज से आ रहे पर्यटकों की चहल-पहल और मुस्कुराहट देखने को मिल रही है।
किशनगंगा नदी और खूबसूरत नीलम घाटी के किनारे स्थित यह सुरम्य इलाका अब पूरे देश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन चुका है। केरन की सबसे खास बात यह है कि यह पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ सरहद को बेहद करीब से देखने का अनूठा अनुभव प्रदान करता है। किशनगंगा नदी भारत और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है, जहां से पार के गांवों और लोगों की गतिविधियों को साफ देखा जा सकता है।
वर्षों तक गोलाबारी का दंश झेलने वाले इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा बदलाव फरवरी 2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर समझौते से आया। सीजफायर के बाद बनी शांति की स्थिति ने सीमावर्ती निवासियों के जीवन में नया भरोसा जगाया और पर्यटन के रास्ते खोले।
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पर्यटन के इस नए दौर से सीमावर्ती निवासियों को मिले सुकून और राहत पर बात करते हुए स्थानीय निवासी नजीर अहमद ने कहा, ''''सालों तक हमने अपनी आंखों के सामने घरों को तबाह होते और अपनों को खोते देखा है। हर पल यह डर बना रहता था कि कब कोई गोला आकर हमारे घर पर गिर जाए। आज जब हम अपनी ही गलियों में पर्यटकों को हंसते-खेलते और तस्वीरें खींचते देखते हैं तो यकीन नहीं होता कि यह वही केरन है। इस शांति ने हमें नई जिंदगी दी है।
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका और रोजगार के नए साधन भी पैदा हुए हैं। कई परिवारों ने अपने घरों को होमस्टे में बदल दिया है, वहीं युवा पर्यटकों को गाइड करने और घोड़ा सवारी जैसी सेवाएं देकर कमाई कर रहे हैं। क्षेत्र में पैदा हुए नए अवसरों और भविष्य की जरूरतों पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय युवा फरहान ने कहा, ''''पर्यटन ने हम जैसे स्थानीय युवाओं को अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार दिया है। अब हमें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता लेकिन अगर सरकार यहां मोबाइल नेटवर्क, पक्की सड़कों और कचरा प्रबंधन का बेहतर इंतजाम कर दे तो केरन पूरे कश्मीर का सबसे पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन सकता है।
भारतीय सेना ने भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स को केरन का दौरा कराकर इस छिपे हुए पर्यटन स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी भी सामने आ रही है। मोबाइल कनेक्टिविटी न होना, सार्वजनिक शौचालयों की कमी और किशनगंगा के किनारों पर पर्यटकों द्वारा फेंका जाने वाला प्लास्टिक कचरा चिंता का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण जारी है और वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण के लिए योजना बनाई जा रही है। अगर बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए तो केरन उत्तर कश्मीर की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगा।
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किशनगंगा नदी और खूबसूरत नीलम घाटी के किनारे स्थित यह सुरम्य इलाका अब पूरे देश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन चुका है। केरन की सबसे खास बात यह है कि यह पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ सरहद को बेहद करीब से देखने का अनूठा अनुभव प्रदान करता है। किशनगंगा नदी भारत और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है, जहां से पार के गांवों और लोगों की गतिविधियों को साफ देखा जा सकता है।
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वर्षों तक गोलाबारी का दंश झेलने वाले इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा बदलाव फरवरी 2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर समझौते से आया। सीजफायर के बाद बनी शांति की स्थिति ने सीमावर्ती निवासियों के जीवन में नया भरोसा जगाया और पर्यटन के रास्ते खोले।
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पर्यटन के इस नए दौर से सीमावर्ती निवासियों को मिले सुकून और राहत पर बात करते हुए स्थानीय निवासी नजीर अहमद ने कहा, ''''सालों तक हमने अपनी आंखों के सामने घरों को तबाह होते और अपनों को खोते देखा है। हर पल यह डर बना रहता था कि कब कोई गोला आकर हमारे घर पर गिर जाए। आज जब हम अपनी ही गलियों में पर्यटकों को हंसते-खेलते और तस्वीरें खींचते देखते हैं तो यकीन नहीं होता कि यह वही केरन है। इस शांति ने हमें नई जिंदगी दी है।
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका और रोजगार के नए साधन भी पैदा हुए हैं। कई परिवारों ने अपने घरों को होमस्टे में बदल दिया है, वहीं युवा पर्यटकों को गाइड करने और घोड़ा सवारी जैसी सेवाएं देकर कमाई कर रहे हैं। क्षेत्र में पैदा हुए नए अवसरों और भविष्य की जरूरतों पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय युवा फरहान ने कहा, ''''पर्यटन ने हम जैसे स्थानीय युवाओं को अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार दिया है। अब हमें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता लेकिन अगर सरकार यहां मोबाइल नेटवर्क, पक्की सड़कों और कचरा प्रबंधन का बेहतर इंतजाम कर दे तो केरन पूरे कश्मीर का सबसे पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन सकता है।
भारतीय सेना ने भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स को केरन का दौरा कराकर इस छिपे हुए पर्यटन स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी भी सामने आ रही है। मोबाइल कनेक्टिविटी न होना, सार्वजनिक शौचालयों की कमी और किशनगंगा के किनारों पर पर्यटकों द्वारा फेंका जाने वाला प्लास्टिक कचरा चिंता का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण जारी है और वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण के लिए योजना बनाई जा रही है। अगर बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए तो केरन उत्तर कश्मीर की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगा।