फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   jammu kashmir five govt employees terminated having terror links

टेरर नेटवर्क पर वार: जम्मू कश्मीर में आतंकियों के लिए काम कर रहे 2 कांस्टेबल और शिक्षक समेत पांच कर्मचारी बर्खास्त

Thu, 31 Mar 2022 12:36 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Thu, 31 Mar 2022 12:36 AM IST
सार

जम्मू कश्मीर में आतंकियों के साथ गठजोड़ के चलते पांच सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। इनमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

विज्ञापन
jammu kashmir five govt employees terminated having terror links
jammu kashmir - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

सरकारी अमले में रहकर आतंकियों के लिए काम करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई तेज हो गई है। उप राज्यपाल प्रशासन ने दो पुलिस कांस्टेबल, शिक्षक समेत और पांच सरकारी मुलाजिमों को बर्खास्त कर दिया है। आतंकियों और अलगाववादियों से गठजोड़ रखने वाले ये कर्मचारी जांच पड़ताल में न सिर्फ दहशतगर्दों के करीबी पाए गए, बल्कि आतंकी वारदातों को अंजाम देने से लेकर युवाओं को आतंक की राह पर धकेलने जैसी गतिविधियाें में शामिल हैं।

विज्ञापन

बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में पुलिस विभाग में कांस्टेबल

बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में पुलिस विभाग में कांस्टेबल तौसीफ मीर, कांस्टेबल शाहिद हुसैन राथर, शिक्षक अरशद अहमद, कंप्यूटर ऑपरेटर गुलाम पर्रे और अर्दली शराफत अली खान शामिल हैं। संदिग्ध गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों के चाल चलन की समीक्षा करने वाली कमेटी की सिफारिश पर उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने संविधान के अनुच्छेद 311 (2)(सी) के तहत इन्हें बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।

विज्ञापन

आतंकियों को पनाह दी, युवक दहशतगर्द बनाए

तौसीफ अहमद मीर (कांस्टेबल) :- तौसीफ मीर का पिता अल जिहाद तंजीम का आतंकी था, जो 1997 में मुठभेड़ में मारा गया। मीर पुलिस में भर्ती हो गया, लेकिन वह हिजबुल मुजाहिदीन के सरगनाओं के संपर्क में रहा। आरोप है कि मीर ने जून 2017 में शोपियां जिले में पांच आतंकियों को पनाह दी और एक पुलिस एसपीओ व एक कांस्टेबल को मारने की कोशिश की।

विज्ञापन
विज्ञापन


उसने स्थानीय युवकों को आतंकी तंजीम में शामिल करवाना शुरू किया। इसी के चलते तौसीफ पर पीएसए लगाया गया। जुलाई 2017 में तौसीफ को निलंबित कर दिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तौसीफ को खतरा बताते हुए एलजी प्रशासन ने अब उसे बर्खास्त कर दिया है।

हिंसा भड़काई, आईएस से लिंक 

गुलाम हसन पर्रे (कंप्यूटर ऑपरेटर) :- पर्रे प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी का सक्रिय सदस्य रहा है। वर्ष 2009 में परीमपोरा में हिंसक प्रदर्शन के लिए पर्रे ने ही लोगाें को उकसाया था। उसे अलगाववादियों ने युवकों को आतंकी बनाने का जिम्मा सौंपा था। जम्मू-कश्मीर में जब इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने माहौल बिगाड़ने की साजिश रची तो पर्रे ने प्रदेश में आईएस की गतिविधियों को आगे बढ़ाया। 

पथराव करवाया, टेरर फंडिंग में भी हाथ

अरशद अहमद (शिक्षक) :- दक्षिण कश्मीर में अवंतिपोरा का अरशद जमात-ए-इस्लामी की गतिविधियाें में शामिल रहा। उसने हिजबुल मुजाहिदीन से नजदीकियां बढ़ाकर शिक्षक रहते हुए आतंकी गतिविधियों का समर्थन किया। जांच के अनुसार उसने युवकों की भीड़ जुटाकर अवंतिपोरा में सीआरपीएफ के जवानों पर पथराव करवाया था। यही नहीं, अरशद ने आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग भी करवाई।

आतंकियों तक पहुंचाए हथियार

शाहिद हुसैन राथर (कांस्टेबल) :- उत्तरी कश्मीर में बारामुला के शाहिद ने पुलिस विभाग का हिस्सा रहते हुए कश्मीर घाटी के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय आतंकियों तक हथियार पहुंचाए। आतंकियों के साथ शाहिद का गठजोड़ जून 2021 में सार्वजनिक हुआ। शाहिद दो अन्य लोगों के साथ उड़ी में पकड़ा गया था। उसकी स्विफ्ट कार से 10 ग्रेनेड, दो चीन निर्मित पिस्टल और ड्रग्स बरामद हुई थी। शाहिद से पूछताछ के आधार पर सात और लोग पकड़े गए, जिनसे भारी मात्रा में असलहा बरामद हुआ। 

नकली करंसी गिरोह, दहशतगर्दों का साथ दिया

शराफत अली खान (स्वास्थ्य विभाग में अर्दली) :- कुपवाड़ा जिले के शराफत पर आरोप है कि सरकारी मुलाजिम रहते हुए वह कई आतंकी तंजीमों के संपर्क में रहा। वह भारतीय मुद्रा के नकली नोट मामले में भी शामिल रहा। एक गिरोह के पकड़े जाने पर शराफत का नाम सामने आया था। जून 2021 में शराफत बारामुला में पुलिस कांस्टेबल शाहिद के साथ गिरफ्तार किया गया।

हिजबुल सरगना के दो बेटों, डीएसपी समेत अब तक 34 निकाले जा चुके

टेरर नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार अब तक 34 सरकारी मुलाजिमों को नौकरी से निकाल चुकी है। इनमें हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैय्यद सलाहूदीन के दोनों बेटों, पुलिस में डीएसपी दविंदर सिंह प्रमुख रूप से शामिल हैं।

सरकार ने अप्रैल 2021 में विशेष समिति का गठन कर सरकारी अमले में शामिल ऐसे लोगों के सेवाकाल की समीक्षा करने की कवायद शुरू की, जो आतंकी नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। उच्च स्तरीय यह समिति पिछले रिकॉर्ड और आरोपों के पुख्ता आधार को जांचने के बाद अपनी सिफारिश उप राज्यपाल को भेजती है। उप राज्यपाल रिपोर्ट देखने के बाद अपना फैसला लेते हैं। आदेश जारी होने के बाद बर्खास्त किए गए कर्मचारी केवल हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। ब्यूरो

महबूबा ने केंद्र पर साधा निशाना

कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए महबूबा ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठी सरकार एक तरफ पूरे भारत से सेवानिवृत्त सुरक्षा कर्मियों की भर्ती कर रही है वहीं कश्मीरी कर्मचारियों को जानबूझ कर निशाना बना रही है। वह स्थानीय कर्मचारियों को हटाकर यहां के लोगों को शक्तिहीन बनाना चाहते हैं।

जम्मू-कश्मीर में कर्मियों की बर्खास्तगी को लेकर कोई नई अधिसूचना नहीं
राज्यसभा में केंद्र सरकार ने साफ किया कि सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को लेकर कोई नया नियम लागू नहीं किया गया है। राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न- क्या जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नए नियम अधिसूचित किए हैं, जिसके तहत कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त किया जा सकता है।



इस पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया, किसी कर्मचारी के परिवार का संबंध और सहानुभूति आतंकवादियों के साथ होने पर केंद्र की ओर से उन्हें सेवाओं से बर्खास्त करने का कोई नियम नहीं है। केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के निर्देशों के अनुसार पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए सरकारी कर्मियों के लिए अनिवार्य सतर्कता मंजूरी को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन सरकार ने कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed