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Srinagar News: स्किम्स के इंटर्न डॉक्टरों की भूख हड़ताल शुरू
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब और अधिक उग्र हो गया है। स्किम्स मेडिकल कॉलेज, बेमिना के वर्ष 2021 बैच के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी है। आठ दिनों से जारी धरने के बावजूद सरकार की ओर से कोई आधिकारिक और लिखित आदेश जारी न होने के विरोध में डॉक्टरों ने यह कदम उठाया है। घाटी के करीब 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों, दो बीडीएस कॉलेजों और एफएमजी छात्रों सहित लगभग 2,000 इंटर्न डॉक्टर इस प्रदर्शन के समर्थन में उतर चुके हैं। डॉक्टरों की स्पष्ट मांग है कि उनके मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 किया जाए और केवल मौखिक आश्वासनों के बजाय सरकार तुरंत लिखित आदेश जारी करे।
प्रदर्शन में शामिल डॉ. आइमन ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि हर मेडिकल कॉलेज से छात्र भूख हड़ताल में शामिल हो रहे हैं और यदि प्रशासन ने जल्द ही लिखित आदेश जारी नहीं किया, तो यह आंदोलन एक बड़े सामूहिक प्रदर्शन का रूप ले लेगा।
इसी बीच डॉ. फराज़ ने प्रशासनिक देरी और दबाव बनाने की कोशिशों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों से यह फाइल लंबित है और आठ दिनों की हड़ताल के बाद भी सरकार कोई ठोस फैसला नहीं ले सकी है। मात्र 12,300 के स्टाइपेंड में गुजारा करना असंभव है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन द्वारा छात्रों और उनके अभिभावकों को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन हक की इस लड़ाई में डॉक्टर किसी धमकी से पीछे नहीं हटेंगे।
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आंदोलन के रुख पर बात करते हुए एक अन्य इंटर्न डॉक्टर ने सरकार के ढुलमुल रवैये पर अल्लामा इक़बाल का शेर दोहराते हुए कहा, ''''जिस खेत से देहक़ां को मयस्सर नहीं रोज़ी, उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो।'''' उन्होंने बताया कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक महीने का और समय मांग रही है, लेकिन तीन साल के लंबे इंतजार के बाद अब केवल मौखिक बातें स्वीकार्य नहीं हैं। डॉक्टरों ने सरकार पर नैतिक दबाव बनाने के लिए फिलहाल 48 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल शुरू की है और संकेत दिया है कि यदि सरकार 1 अक्टूबर से लागू होने वाला कोई भावी लिखित आदेश भी जारी कर देती है, तो बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि प्रशासन के साथ बातचीत के दरवाजे अभी भी खुले हैं, लेकिन अब सिर्फ आश्वासनों के आधार पर हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। जब तक सरकार आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक यह भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
डॉक्टरों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा, आवाज दबाने के लिए धमकियां बंद करे सरकार — वहीद पर्रा
पीडीपी नेता और पुलवामा से विधायक वहीद पर्रा ने इंटर्न डॉक्टरों की भूख हड़ताल का पुरजोर समर्थन करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश के सबसे होनहार छात्र सालों की मेहनत और रतजगे के बाद डॉक्टर बनते हैं, लेकिन सरकार उनके योगदान को नजरअंदाज कर रही है। इन डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड ''''न्यूनतम मजदूरी कानून'''' के मानकों पर भी खरा नहीं उतरता। वहीद पर्रा ने कहा कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाले रखने वाले इन डॉक्टरों के न्याय की कीमत महज 40 करोड़ है, जिसे देने के बजाय सरकार डॉक्टरों के माता-पिता को उनके बच्चों का करियर बर्बाद करने की धमकियां दे रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं को डरा-धमकाकर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास तुरंत बंद होना चाहिए।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब और अधिक उग्र हो गया है। स्किम्स मेडिकल कॉलेज, बेमिना के वर्ष 2021 बैच के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी है। आठ दिनों से जारी धरने के बावजूद सरकार की ओर से कोई आधिकारिक और लिखित आदेश जारी न होने के विरोध में डॉक्टरों ने यह कदम उठाया है। घाटी के करीब 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों, दो बीडीएस कॉलेजों और एफएमजी छात्रों सहित लगभग 2,000 इंटर्न डॉक्टर इस प्रदर्शन के समर्थन में उतर चुके हैं। डॉक्टरों की स्पष्ट मांग है कि उनके मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 किया जाए और केवल मौखिक आश्वासनों के बजाय सरकार तुरंत लिखित आदेश जारी करे।
प्रदर्शन में शामिल डॉ. आइमन ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि हर मेडिकल कॉलेज से छात्र भूख हड़ताल में शामिल हो रहे हैं और यदि प्रशासन ने जल्द ही लिखित आदेश जारी नहीं किया, तो यह आंदोलन एक बड़े सामूहिक प्रदर्शन का रूप ले लेगा।
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इसी बीच डॉ. फराज़ ने प्रशासनिक देरी और दबाव बनाने की कोशिशों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों से यह फाइल लंबित है और आठ दिनों की हड़ताल के बाद भी सरकार कोई ठोस फैसला नहीं ले सकी है। मात्र 12,300 के स्टाइपेंड में गुजारा करना असंभव है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन द्वारा छात्रों और उनके अभिभावकों को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन हक की इस लड़ाई में डॉक्टर किसी धमकी से पीछे नहीं हटेंगे।
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आंदोलन के रुख पर बात करते हुए एक अन्य इंटर्न डॉक्टर ने सरकार के ढुलमुल रवैये पर अल्लामा इक़बाल का शेर दोहराते हुए कहा, ''''जिस खेत से देहक़ां को मयस्सर नहीं रोज़ी, उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो।'''' उन्होंने बताया कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक महीने का और समय मांग रही है, लेकिन तीन साल के लंबे इंतजार के बाद अब केवल मौखिक बातें स्वीकार्य नहीं हैं। डॉक्टरों ने सरकार पर नैतिक दबाव बनाने के लिए फिलहाल 48 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल शुरू की है और संकेत दिया है कि यदि सरकार 1 अक्टूबर से लागू होने वाला कोई भावी लिखित आदेश भी जारी कर देती है, तो बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि प्रशासन के साथ बातचीत के दरवाजे अभी भी खुले हैं, लेकिन अब सिर्फ आश्वासनों के आधार पर हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। जब तक सरकार आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक यह भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
डॉक्टरों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा, आवाज दबाने के लिए धमकियां बंद करे सरकार — वहीद पर्रा
पीडीपी नेता और पुलवामा से विधायक वहीद पर्रा ने इंटर्न डॉक्टरों की भूख हड़ताल का पुरजोर समर्थन करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश के सबसे होनहार छात्र सालों की मेहनत और रतजगे के बाद डॉक्टर बनते हैं, लेकिन सरकार उनके योगदान को नजरअंदाज कर रही है। इन डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड ''''न्यूनतम मजदूरी कानून'''' के मानकों पर भी खरा नहीं उतरता। वहीद पर्रा ने कहा कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाले रखने वाले इन डॉक्टरों के न्याय की कीमत महज 40 करोड़ है, जिसे देने के बजाय सरकार डॉक्टरों के माता-पिता को उनके बच्चों का करियर बर्बाद करने की धमकियां दे रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं को डरा-धमकाकर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास तुरंत बंद होना चाहिए।