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98.43 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करना शेर-ए-कश्मीर के सपने की पूर्ति : चौधरी मुहम्मद रमजान
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अतिरिक्त महासचिव और राज्यसभा सांसद चौधरी मुहम्मद रमजान ने रविवार को उल्लास -एनबीएसके के तहत 98.43 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करने पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों में वृद्धि नहीं है, बल्कि अनगिनत शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों, स्वयंसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और शिक्षार्थियों के अथक प्रयासों, प्रतिबद्धता और समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने कश्मीर के दूरदराज के पहाड़ी इलाकों से लेकर जम्मू के मैदानी इलाकों तक हर घर और बस्ती तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि जब शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के प्रसार और इसे समाज के हर वर्ग के लिए सुलभ बनाने के लिए अपना संघर्ष शुरू किया, तो क्षेत्र में साक्षरता दर बेहद कम थी। शिक्षा काफी हद तक विशेषाधिकार प्राप्त और समृद्ध परिवारों तक ही सीमित थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक कि हर बच्चे और समाज के हर वर्ग को शिक्षा के समान अवसर प्रदान नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि शेर-ए-कश्मीर का दृष्टिकोण केवल साक्षरता तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक सशक्त, प्रबुद्ध और आत्मविश्वासी समाज के निर्माण की आकांक्षा थी।
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श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अतिरिक्त महासचिव और राज्यसभा सांसद चौधरी मुहम्मद रमजान ने रविवार को उल्लास -एनबीएसके के तहत 98.43 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करने पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों में वृद्धि नहीं है, बल्कि अनगिनत शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों, स्वयंसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और शिक्षार्थियों के अथक प्रयासों, प्रतिबद्धता और समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने कश्मीर के दूरदराज के पहाड़ी इलाकों से लेकर जम्मू के मैदानी इलाकों तक हर घर और बस्ती तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि जब शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के प्रसार और इसे समाज के हर वर्ग के लिए सुलभ बनाने के लिए अपना संघर्ष शुरू किया, तो क्षेत्र में साक्षरता दर बेहद कम थी। शिक्षा काफी हद तक विशेषाधिकार प्राप्त और समृद्ध परिवारों तक ही सीमित थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक कि हर बच्चे और समाज के हर वर्ग को शिक्षा के समान अवसर प्रदान नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि शेर-ए-कश्मीर का दृष्टिकोण केवल साक्षरता तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक सशक्त, प्रबुद्ध और आत्मविश्वासी समाज के निर्माण की आकांक्षा थी।
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