Srinagar: पीडीडी फर्जी नियुक्ति घोटाले में ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई, तीन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
ईओडब्ल्यू ने पीडीडी में फर्जी नियुक्ति घोटाले के मामले में दो आरोपियों और एक मृत पूर्व इंजीनियर के खिलाफ बारामुला की भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में चार्जशीट दाखिल की है।
विस्तार
इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) श्रीनगर ने बारामुला की भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में दो आरोपियों और एक मृत पूर्व इंजीनियर के खिलाफ एक कथित पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (पीडीडी) नौकरी घोटाले में चार्जशीट दाखिल की है। इस घोटाले में फर्जी नियुक्ति आदेश, जाली सर्विस रिकॉर्ड और अवैध वेतन भुगतान शामिल हैं।ईओडब्ल्यू के प्रवक्ता ने कहा कि क्राइम ब्रांच जम्मू कश्मीर के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू), श्रीनगर ने एफआईआर संख्या 46/2023 के तहत भ्रष्टाचार निरोधक अदालत, बारामुला के समक्ष चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट कुनन बाबागुंड बांदीपोरा के नासिर अहमद मीर, अरागाम बांदीपोरा के मुश्ताक अहमद मलिक (कीपीडीसीएल में एक सरकारी कर्मचारी) और केपीडीसीएल/ईडी सुंबल के एक मृत पूर्व कार्यकारी इंजीनियर (जो जम्मू के निवासी थे) के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि यह मामला एक लिखित शिकायत से शुरू हुआ था जिसमें पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (पीडीडी) में धोखाधड़ी से नियुक्तियों का आरोप लगाया गया था। जांच के दौरान यह पाया गया कि नासिर अहमद मीर ने एक मनगढ़ंत नियुक्ति आदेश का उपयोग करके नौकरी हासिल की थी जिसे कथित तौर पर 1994 के एसआरओ-43 के तहत जारी किया गया था।उन्होंने कहा कि उक्त आदेश सरकारी रिकॉर्ड में गायब पाया गया जिससे इसकी प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह पैदा हो गया। जांच में आगे पता चला कि मुश्ताक अहमद मलिक, जो उस समय वरिष्ठ सहायक के रूप में कार्यरत थे, ने नासिर अहमद मीर के लिए एक जाली सर्विस बुक तैयार की थी, जिसमें झूठा दिखाया गया था कि उनकी नियुक्ति एसआरओ-43 के तहत हुई है।
प्रवक्ता ने कहा कि फोरेंसिक विश्लेषण ने पुष्टि की है कि सर्विस बुक में की गई प्रविष्टियां मुश्ताक अहमद मलिक द्वारा लिखी और हस्ताक्षरित की गई थीं। इसके अलावा कोई भी आधिकारिक प्रेषण या रसीद रिकॉर्ड कथित नियुक्ति आदेश के जारी होने का समर्थन नहीं करता था।उन्होंने कहा कि उस समय के तहसीलदार, बांदीपोरा द्वारा किए गए सत्यापन ने पुष्टि की कि नासिर अहमद मीर एसआरओ-43 के तहत नियुक्ति के लिए पात्र नहीं थे क्योंकि उनके परिवार की ऐसी कोई परिस्थितियां मौजूद नहीं थीं जो उन्हें इसके लिए योग्य बनातीं। इसके बावजूद मृत कार्यकारी इंजीनियर ने 2009 में बिना उचित सत्यापन के वेतन वितरण की सुविधा प्रदान की जो कथित नियुक्ति की तारीख के तीन साल से भी अधिक समय बाद किया गया था।
प्रवक्ता ने बताया कि जांच में आरोपियों के बीच एक आपराधिक साजिश का पता चला है जिसमें जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी पद का दुरुपयोग शामिल है। इसके आधार पर धारा 420, 468, 471 और 120-बी आरपीसी के तहत अपराध साबित हुए हैं साथ ही इसमें शामिल सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान भी लागू होते हैं। प्रवक्ता ने कहा कि न्यायिक निर्णय के लिए आरोप पत्र (चार्जशीट) जमा कर दिया गया है।