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Srinagar: कम्पोजिट अस्पताल में असिस्टेंट कमांडेंट से 'दुर्व्यवहार' CH प्रशासन ने भाई के इलाज से किया इनकार

Thu, 29 Sep 2022 03:04 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Thu, 29 Sep 2022 03:04 PM IST
सार

कश्मीर के कम्पोजिट अस्पताल (सीएच) प्रशासन ने कथित तौर पर उनके भाई का इलाज करने से इनकार कर दिया। इसके चलते उन्हें भाई के लिए निजी क्लीनिक जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

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bsf Assistant Commandant alleged misbehaved in Composite Hospital srinagar kashmir
Jammu - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक असिस्टेंट कमांडेंट (एसी) के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि कश्मीर के कम्पोजिट अस्पताल (सीएच) प्रशासन ने कथित तौर पर उनके भाई का इलाज करने से इनकार कर दिया। इसके चलते उन्हें भाई के लिए निजी क्लीनिक जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

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सूत्रों ने बताया कि असिस्टेंट कमांडेंट, प्रभात चतुर्वेदी ने महानिदेशक (बीएसएफ) को एक पत्र लिखकर गृह मंत्रालय को अपनी आपबीती सुनाई है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि संयुक्त सचिव स्तर का एक अधिकारी इस मामले की जांच करेगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गृह मंत्रालय का एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही सीएच कश्मीर पहुंच चुका है।
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प्रभात चतुर्वेदी द्वारा लिखे गए पत्र का विवरण साझा करते हुए, सूत्रों ने कहा कि असिस्टेंट कमांडेंट ने नई दिल्ली में बीएसएफ के उच्च अधिकारियों को संबंधित डीआईजी के हाथों कथित दुर्व्यवहार के बारे में अवगत कराया है। असिस्टेंट कमांडेंट ने एमएचए और डीजी, बीएसएफ को लिखे अपने पत्र में सीएच कश्मीर के संबंधित डीआईजी सहित कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट रूप से इस अनैतिक निर्णय और उत्पीड़न के लिए नामित किया है।
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बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट प्रभात सिंह चतुर्वेदी के भाई का इलाज करने वाली डॉ मुन्तखाब नाफी ने अमर उजाला के साथ विशेष बात करते हुए बताया, "वो अपने भाई को 18 सितंबर को मेरे पास लेकर आए। मैंने उन्हें उसी तरह से देखा जैसे मैं बाकी के मरीजों को देखती हूं। वो गैंग्रीन के मरीज थे जोकि काफी गंभीर स्थिति थी। उनकी फैमिली हिस्ट्री भी थी। उन्हें बताया गया कि उनके परिवार के चार सदस्यों की इस बीमारी के चलते जान चली गई थी। वह डायबिटीज के भी मरीज है, जिसके बाद मैंने कुछ इन्वेस्टिगेशन के लिए कहा। इस बीच मैंने इलाज शुरू किया। इंट्रावीनस एंटीबायोटिक और ड्रेसिंग शुरू की।"

उनके अनुसार, 'उनका इलाज चल रहा था। डॉ. मुन्तखाब ने बताया कि मरीज ने उनसे कहा कि जख्म काफी ठीक हो रहा है। मैंने नर्स से ड्रेसिंग खोलने के लिए कही ताकि मैं देख सकूं।' उन्होंने कहा कि उन्होंने देखा कि काफी सुधार आया था लेकिन बीच में ऐसी गंभीर बीमारी का ट्रीटमेंट अधूरा नहीं छोड़ सकते। डॉक्टर ने बताया इस दौरान जब वो मरीज को देखने के बाद वापस ओपीडी में लौटी तो इतने में मरीज के भाई प्रभात उनके पास पहुंचे और उनके सामने उसे रोते हुए पूछने लगे कि क्या वो उनके भाई का ट्रीटमेंट करने से इनकार तो नहीं करेंगी। डॉ मुन्तखाब के अनुसार वो यह सुनकर दंग रह गई और कहा कि वो ऐसा क्यों करेंगी।

उन्होंने मरीज के भाई से कहा कि वह अपनी ड्यूटी निभाऊंगी क्योंकि मेरे लिए मेरे मरीज मेरी प्राथमिकता है। डॉ मुन्तखाब ने कहा कि मरीज के भाई ने उनसे कहा कि कुछ उच्च अधिकारी मेरे यूनिट के मुझसे बोल रहे हैं कि वो अपने भाई का ट्रीटमेंट यहां नहीं कराएंगे और अपने भाई को यहां से ले जाओ। उन्होंने कहा कि इस बीच दोपहर को उनके पास डीआईजी मेड का रनर आया और उनसे कहा कि उन्हें डीआईजी बुला रहे हैं। डॉक्टर ने बताया कि डीआईजी से पूछे जाने पर उन्होंने उनसे कहा कि वो 'चतुर्वेदी' का इलाज नहीं करेंगी। 

उन्होंने कहा कि मैंने उनसे लिखित में मांगा। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा डीआईजी से यहां तक कहा गया कि हमारे देश ने मुंबई हमले के दोषी आतंकी अजमल कसाब तक का इलाज करने से मना नहीं किया ये तो एक फौजी का भाई है। मैंने उनसे कहा कि यह मरीज मर जाएगा लेकिन उसके बावजूद भी वो नहीं मानें। डॉ मुन्तखाब ने बताया कि उन्होंने अगले दिन डीआईजी मेड से कहा कि इस अस्पताल में मैं अपनी नैतिक जिम्मेदारियों के साथ समझौता नहीं करुंगी और मैंने रिजाइन किया और फिलहाल मैं अपनी 14 दिनों की एअर्नेड लीव पर हूं। 

उन्होंने कहा कि इसके बाद मैंने उन्हें इलाज के लिए बाहर भेजा। और उस दिन भी गाडी की अनुमति नहीं दी गई और उसके भाई को रिस्क लेकर ऑटो में उसे ले जाना पड़ा। डॉ मुन्तखाब ने बताया कि इससे पहले भी उनके साथ सही व्यवहार नहीं किया गया, उनकी ड्यूटी में रोकटोक की जाती रही है।  

क्या कहना है मरीज का

वहीं, इस मामले को लेकर जब मरीज नीतीश चतुर्वेदी (38) ने बताया, "मेरा इलाज 16 सितंबर को शुरू हुआ था। दिन में तीन बार इंजेक्शन और ड्रेसिंग के लिए जाता था। इलाज बहुत अच्छा चल रहा था और जो घाव था उसमें काफी सुधार हुआ था।" यह पूछे जाने पर कि इलाज करने से मना क्यों किया गया, नीतीश ने कहा कि इसका तो वह ही जवाब दे सकते हैं। मुझे तो इतना बताया गया कि यहां इलाज नहीं हो पाएगा। और उस समय मैं अस्पताल में ही था जब उन्होंने मुझसे कहा कि आपको कैंपस से निकलना है। नीतीश ने बताया कि बाहर से उनका इलाज करवाना संभव नहीं था क्योंकि मैं अकेले मूवमेंट नहीं कर सकता था और हर समय भैया रिस्क लेकर बाहर नहीं निकल सकते थे। क्योंकि घाटी में जो हालात हैं उनके चलते। नितीश ने कहा कि अब वो अपने होमटाउन रांची लौट आए हैं। 

यहां का इलाज ऐसे ही है क्योंकि इन लोगों ने पहले ही बोल दिया था कि उनके बस का है नहीं। यह सिर्फ एम्प्यूटेशन के चक्कर में ही थे। नितीश ने कहा कि इससे पहले तीन डॉक्टरों से कंसल्ट किया जिसमें दो ने कहा था कि एम्प्यूटेशन की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां मैं अकेला हूं और मेरी सबसे बड़ी समस्या है अकेले मेरी मूवमेंट मुश्किल होती है। घर में कोई नहीं, भैया वहां पर हैं और मेरे माता-पिता, बीवी-बच्चा कोई है नहीं मेरा। अकेले होने का खामियाजा होता ही है। 

नितीश ने कहा कि अब तो सेहत का नुकसान ही हो रहा है। यहां केवल एम्प्यूटेशन के लिए बोल रहे हैं लेकिन उसके बाद भी कोई गारंटी नहीं कि घाव सही होगा या नहीं। क्योंकि एम्प्यूटेशन के बाद देखभाल चाहिए और अकेला आदमी कितना कर पाएगा। कैंपस से निकाले जाने के कारण के बारे में पूछने पर नितीश ने कहा मेरे को असली कारण का कुछ पता नहीं, सही से बड़े भैया को पता होगा और उन्होंने शायद मुझे इसलिए कारण यह सोच कर नहीं बताया होगा कि कहीं मैं बुरा न मान जाऊं। यह एक कारण उन्होंने कहा कि आप 18 से ऊपर हैं इसलिए डिपेंडेंट नहीं।

गौरतलब है कि नितीश से जब यह कहा गया कि अपने भाई का नंबर मिल पाएगा तो उन्होंने कहा कि उनके बड़े भाई से उनकी बात हुई है। वो अभी श्रीनगर में हैं। और उन्होंने उनसे कहा कि कोई टीम आई जिनके साथ वो व्यस्त हैं। समय मिलने पर वो आपसे खुद संपर्क करेंगे। आपका नंबर उन्हें दे दिया है। 


इस बीच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एमएचए से जॉइंट सेक्रेटरी के नेतृत्व में एक टीम यहां मामले में हस्तक्षेप करने पहुंची है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। इसको लेकर बीएसएफ के प्रवक्ता से भी दो-तीन बार संपर्क साधने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।

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