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तेज रफ्तार हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण जीएमसी राजोरी की दीवार ढह गई
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राजोरी। राजोेरी शहर से सटे कोटधड़ा महरा इलाके में रविवार को सरकारी मेडिकल कॉलेज की निर्माणाधीन दीवार गिरने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार तेज रफ्तार हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण जीएमसी राजोरी की दीवार ढह गई। इसमें महरा निवासी बुजुर्ग व्यक्ति करम चंद (75) पुत्र घुरमुख सिंह मलबे में दब गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरू किया गया। मौक़े पर मौजूद कुछ चश्मदीदों ने बताया कि कि दीवार के मलबे को साफ करने में लंबा समय लगा। क्योंकि निर्माणाधीन दीवार बहुत बड़ी थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। घटना के तुरंत बाद एक बचाव अभियान शुरू किया गया था, लेकिन मलबे के नीचे से शव को निकालने में लगभग 7 घंटे लग गए। रिपोर्ट के अनुसार शव बरामद होने के तुरंत बाद मृतक बुजुर्ग के परिवार वालों ने पुलिस से शव छीन लिया और संबंधित विभाग और ठेकेदार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। वे ठेकेदार के खिलाफ हत्या का मामला तत्काल दर्ज करने और मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे। वहीं गुस्साए लोगों ने रोष प्रदर्शन के दौरान उपराज्यपाल से गुहार लगाते हुए कहा कि उक्त भवन और दीवार के निर्माण में निमभन स्तर की सामग्री का प्रयोग किया गया है। इसकी जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाए और सामग्री की जांच की जाए। इसके अलावा संबंधित ठेकेदार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उसके ठेकेदारी के लाइसेंस को रद्द किया जाए। गुस्साए लोगों ने चेतावनी देते हुआ कहा कि यदि ठेकेदार के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो लोग सड़कोें पर उतर कर प्रदर्शन का सहारा लेंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एडीसी सचिन देव सिंह और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी वास्तविक मांग उच्च अधिकारियों के सामने पेश की जाएगी और जल्द ही पूरी की जाएगी।
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सेना की भी ली गई मदद
बचाव कार्य में सेना की भी मदद ली गई। मलबा हटाने में सेना की जेबीसी मशीन का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही मौके पर सेना के जवानों की भी तैनाती कर दी। जिस स्थान पर जीएमसी स्थित है उसी के पास सेना का एक शिविर भी है। ऐसे में सेना के जवान हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे गए और राहत कार्य में लग गए। जेसीबी से मलबा हटाया जाने लगा, बचाव कार्य में दिक्कतें न हों और लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी सेना के जवान तैनात हो गए।
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घटना के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरू किया गया। मौक़े पर मौजूद कुछ चश्मदीदों ने बताया कि कि दीवार के मलबे को साफ करने में लंबा समय लगा। क्योंकि निर्माणाधीन दीवार बहुत बड़ी थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। घटना के तुरंत बाद एक बचाव अभियान शुरू किया गया था, लेकिन मलबे के नीचे से शव को निकालने में लगभग 7 घंटे लग गए। रिपोर्ट के अनुसार शव बरामद होने के तुरंत बाद मृतक बुजुर्ग के परिवार वालों ने पुलिस से शव छीन लिया और संबंधित विभाग और ठेकेदार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। वे ठेकेदार के खिलाफ हत्या का मामला तत्काल दर्ज करने और मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे। वहीं गुस्साए लोगों ने रोष प्रदर्शन के दौरान उपराज्यपाल से गुहार लगाते हुए कहा कि उक्त भवन और दीवार के निर्माण में निमभन स्तर की सामग्री का प्रयोग किया गया है। इसकी जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाए और सामग्री की जांच की जाए। इसके अलावा संबंधित ठेकेदार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उसके ठेकेदारी के लाइसेंस को रद्द किया जाए। गुस्साए लोगों ने चेतावनी देते हुआ कहा कि यदि ठेकेदार के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो लोग सड़कोें पर उतर कर प्रदर्शन का सहारा लेंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एडीसी सचिन देव सिंह और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी वास्तविक मांग उच्च अधिकारियों के सामने पेश की जाएगी और जल्द ही पूरी की जाएगी।
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सेना की भी ली गई मदद
बचाव कार्य में सेना की भी मदद ली गई। मलबा हटाने में सेना की जेबीसी मशीन का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही मौके पर सेना के जवानों की भी तैनाती कर दी। जिस स्थान पर जीएमसी स्थित है उसी के पास सेना का एक शिविर भी है। ऐसे में सेना के जवान हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे गए और राहत कार्य में लग गए। जेसीबी से मलबा हटाया जाने लगा, बचाव कार्य में दिक्कतें न हों और लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी सेना के जवान तैनात हो गए।
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