{"_id":"5704144e4f1c1b2833c8165f","slug":"rain-in-shahpur-mandar-and-kearney","type":"story","status":"publish","title_hn":"शाहपुर, कीरनी और मंधार क्षेत्र में मौसम ने बरपाया कहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शाहपुर, कीरनी और मंधार क्षेत्र में मौसम ने बरपाया कहर
ब्यूरो,अमर उजाला/पुंछ
Updated Wed, 06 Apr 2016 01:12 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंगलवार को तड़के जिले में हुई भारी वर्षा के साथ नियंत्रण रेखा से सटे गांव शाहपुर, कीरनी और मंधारी में भारी ओलावृष्टि हुई।
इससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। कटाई की कगार पर खड़ी फसल को ओलों बर्बाद कर दिया है।
किसानों ने कहा कि इतनी भारी मात्रा में ओले गिरे हैं जैसे बर्फ बारी में सफेद चादर की बिछ जाती है। जिले के कई क्षेत्रों में दो घंटे भारी बारिश हुई है।
नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव शाहपुर, कीरनी और मंधार में बिना पानी बरसे लगातार ओले बरसते रहे।
इससे फसलें और फल बर्बाद हो गए। गांव शाहपुर निवासी मोहम्मद वकार रसूल, शौकत चौधरी, वजाहत हुसैन और रेशमा बेगम का कहना है कि जब सुबह जागे तो देखा कि घरों के आसपास और खेतों में सफेद चादर बिछी हुई थी जैसे कि बर्फबारी हुई हो।
ओलों ने फसल को बर्बाद कर दिया था। पेड़ों से पलमप, खुबानी, आलू बुखारे और नाशपाती के फल क्या पत्ते तक झड़ कर जमीन पर पडे़ हुए थे। गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई है।
पीड़ित किसानों और बागबानों ने सरकार से मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि नियंत्रण रेखा के आसपास के गांव में उनकी रोजी रोटी का यही साधन है जिसे ओलों ने समाप्त कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। कटाई की कगार पर खड़ी फसल को ओलों बर्बाद कर दिया है।
किसानों ने कहा कि इतनी भारी मात्रा में ओले गिरे हैं जैसे बर्फ बारी में सफेद चादर की बिछ जाती है। जिले के कई क्षेत्रों में दो घंटे भारी बारिश हुई है।
नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव शाहपुर, कीरनी और मंधार में बिना पानी बरसे लगातार ओले बरसते रहे।
इससे फसलें और फल बर्बाद हो गए। गांव शाहपुर निवासी मोहम्मद वकार रसूल, शौकत चौधरी, वजाहत हुसैन और रेशमा बेगम का कहना है कि जब सुबह जागे तो देखा कि घरों के आसपास और खेतों में सफेद चादर बिछी हुई थी जैसे कि बर्फबारी हुई हो।
ओलों ने फसल को बर्बाद कर दिया था। पेड़ों से पलमप, खुबानी, आलू बुखारे और नाशपाती के फल क्या पत्ते तक झड़ कर जमीन पर पडे़ हुए थे। गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई है।
विज्ञापन
पीड़ित किसानों और बागबानों ने सरकार से मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि नियंत्रण रेखा के आसपास के गांव में उनकी रोजी रोटी का यही साधन है जिसे ओलों ने समाप्त कर दिया है।
विज्ञापन