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आंगनबाड़ी केंद्रों में एक महीने से लटके ताले
राजोरी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2015 07:02 PM IST
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मंजाकोट तहसील के 25 आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले एक महीने से ताले लटके हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं इन केंद्रों को खोलने ही नहीं पहुंची हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
दरअसल, सीडीपीओ मंजाकोट की अध्यक्षता में सुपरवाइजरों की टीम सोमवार को मंजाकोट तहसील के दूरदराज गांवों में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाओं और बच्चों की संख्या की जांच करने निकली थी। यह जांच जिला कार्यक्रम अधिकारी नजीर शेख के निर्देश पर की जा रही थी।
जांच में पाया गया कि 25 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं खोलने ही नहीं पहुंची हैं। पता चला कि मंजाकोट, ककोड़ा मिडिल, दरेरी, कोटली, कालाबन, देरी रल्योट, मोड़ा रलयोट, राजधानी लोवर, राजधानी अपर, कलाली, कलाई, राखी खैर, पंजग्राई, खरजूला, परयाली, पलुलियां, देरी दरा समेत पच्चीस आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जहां पिछले एक महीने से ताले लटके हैं।
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केंद्रों के बंद होने के चलते एक महीने से न तो बच्चों की कक्षाएं लगाई गईं और न ही उन्हें न्यूट्रिशन दिया गया। एक महीने का राशन कहां गया और वर्करों ने क्यों केंद्र नहीं खोले, इस पर बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। साथ ही सभी को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भविष्य में केंद्र बंद रखे तो बिना जानकारी के ही उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण का भी ध्यान रखा जाता है।
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दरअसल, सीडीपीओ मंजाकोट की अध्यक्षता में सुपरवाइजरों की टीम सोमवार को मंजाकोट तहसील के दूरदराज गांवों में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाओं और बच्चों की संख्या की जांच करने निकली थी। यह जांच जिला कार्यक्रम अधिकारी नजीर शेख के निर्देश पर की जा रही थी।
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जांच में पाया गया कि 25 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं खोलने ही नहीं पहुंची हैं। पता चला कि मंजाकोट, ककोड़ा मिडिल, दरेरी, कोटली, कालाबन, देरी रल्योट, मोड़ा रलयोट, राजधानी लोवर, राजधानी अपर, कलाली, कलाई, राखी खैर, पंजग्राई, खरजूला, परयाली, पलुलियां, देरी दरा समेत पच्चीस आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जहां पिछले एक महीने से ताले लटके हैं।
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केंद्रों के बंद होने के चलते एक महीने से न तो बच्चों की कक्षाएं लगाई गईं और न ही उन्हें न्यूट्रिशन दिया गया। एक महीने का राशन कहां गया और वर्करों ने क्यों केंद्र नहीं खोले, इस पर बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। साथ ही सभी को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भविष्य में केंद्र बंद रखे तो बिना जानकारी के ही उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण का भी ध्यान रखा जाता है।