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कोटरंका के गांव में तेंदुए के तीन शावक निर्माणधीन पानी के टैंक में गिरे
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राजोरी। कोटरंका के मोड़ा करग पंचायत के वार्ड-एक में एक निर्माणाधीन पानी के टैंक में तेंदुए के तीन बच्चे मिलने से सनसनी फैल गई। उन्हें वाइल्ड लाइफ विभाग की टीम ने बचाया।
जानकारी के अनुसार उक्त गांव में बुधवार की सुबह जब लोग घरों से निकल कर आगे पीछे जाने लगे तो उन्होंने देखा कि गांव में बन रहे एक पानी के निर्माणाधीन टैंक में तेंदुए के तीन बच्चे पड़े हैं। टैंक गहरा था और तीनों बच्चे छोटे थे। वह अपने स्तर पर छलांग लगा कर बाहर नहीं निकल पा रहे थे। स्थानीय लोगों ने डीसी राजेश कुमार शवन से संपर्क किया। डीसी ने एक टीम को मौक़े पर भेजने के निर्देश दिए। डीसी के निर्देश पर वाइल्ड लाइफ विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने तेंदुए के बच्चों को टैंक से निकाल बेहोश किया और उन्हें अपने कार्यालय लाए।
संबंधित अधिकारी ने बताया कि तेंदुए के तीनों बच्चों की आयु 3 से 5 माह के बीच लग रही है। उनको बेहोश करने के बाद यहां लाया गया और वीरवार तक वह विभाग के डॉक्टरों के ऑब्जरवेशन में रहेंगे। वीरवार को उन्हें वापस जाकर उसी पंचायत के जंगली इलाके में छोड़ा जाएगा। जहां से वह उस पानी के निर्माणाधीन टैंक में गिरे थे। अधिकार ने बताया कि तेंदुए के छोटे बच्चों की मां को यदि 24 घंटे तक बच्चे नहीं मिले तो वो बहुत खूंखार हो जाएगी। ऐसे में वो उक्त इलाके के लोगों को अपना शिकार बनाने का प्रयास करेगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए उन तीनों बच्चों को उसी जंगली इलाके में छोड़ना होगा।
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जानकारी के अनुसार उक्त गांव में बुधवार की सुबह जब लोग घरों से निकल कर आगे पीछे जाने लगे तो उन्होंने देखा कि गांव में बन रहे एक पानी के निर्माणाधीन टैंक में तेंदुए के तीन बच्चे पड़े हैं। टैंक गहरा था और तीनों बच्चे छोटे थे। वह अपने स्तर पर छलांग लगा कर बाहर नहीं निकल पा रहे थे। स्थानीय लोगों ने डीसी राजेश कुमार शवन से संपर्क किया। डीसी ने एक टीम को मौक़े पर भेजने के निर्देश दिए। डीसी के निर्देश पर वाइल्ड लाइफ विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने तेंदुए के बच्चों को टैंक से निकाल बेहोश किया और उन्हें अपने कार्यालय लाए।
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संबंधित अधिकारी ने बताया कि तेंदुए के तीनों बच्चों की आयु 3 से 5 माह के बीच लग रही है। उनको बेहोश करने के बाद यहां लाया गया और वीरवार तक वह विभाग के डॉक्टरों के ऑब्जरवेशन में रहेंगे। वीरवार को उन्हें वापस जाकर उसी पंचायत के जंगली इलाके में छोड़ा जाएगा। जहां से वह उस पानी के निर्माणाधीन टैंक में गिरे थे। अधिकार ने बताया कि तेंदुए के छोटे बच्चों की मां को यदि 24 घंटे तक बच्चे नहीं मिले तो वो बहुत खूंखार हो जाएगी। ऐसे में वो उक्त इलाके के लोगों को अपना शिकार बनाने का प्रयास करेगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए उन तीनों बच्चों को उसी जंगली इलाके में छोड़ना होगा।
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