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डीएम के निर्देश पर विशेष टीम ने स्टोन क्रशर साइट का दौरान किया.
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राजोरी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की तरफ से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला मजिस्ट्रेट को स्टोन क्रशर द्वारा किए जा रहे अवैध खनन की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के कड़े निर्देश के बाद मंगलवार को उपायुक्त राजेश कुमार शवन के निर्देश पर एक विशेष टीम ने सरानू सहित अन्य पंचायतों का दौरा किया। साथ ही जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया।
सरपंच आरती शर्मा और अन्य ने बताया कि राजोेरी में पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन में स्टोन क्रेशर कथित रूप से काम कर रहे हैं। उनके द्वारा दायर एक आवेदन में यह निर्देश पारित किया गया कि सरानू में डायमंड स्टोन क्रशर और शंकर स्टोन क्रशर पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं। ये स्टोन क्रशर रिहायशी इलाके और तवी नदी के करीब स्थित हैं। भूजल निकालने के लिए अवैध बोरवेल खोदे गए हैं। आवश्यक पर्यावरण मंजूरी नहीं ली गई है। भारी मशीनरी का उपयोग करके तवी नदी के तट पर अवैध खनन भी किया जाता है, इसके परिणामस्वरूप जल स्तर में कमी, पानी की कमी, कृषि उत्पादकता में कमी, जैव विविधता का नुकसान, भूमि क्षरण, मिट्टी का क्षरण हो रहा है। अनुत्पादक बंजर भूमि, ध्वनि प्रदूषण, धूल प्रदूषण, जल प्रदूषण, वनस्पतियों और जीवों के आवास का नुकसान हो रहा है, जोकि भविष्य के लिए बहुत हानिकारक साबित होगा।
सरपंच आदि ने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर पीसीबी ने स्टोन क्रशर द्वारा उपयोग किए जाने वाले सुरक्षा उपायों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन उनका न तो पालन किया जाता है और न ही उनकी निगरानी की जाती है। इन स्टोन क्रशर में ऐसे स्टोन क्रशर के लिए भारी प्रदूषण और अवैज्ञानिक खनन की संभावना है जिससे पर्यावरण को खराब किया जा रहा है।
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यह देखते हुए कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन करने और वैधानिक नियामकों द्वारा निगरानी की आवश्यकता है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अवैध गतिविधियों को रोकने और पिछले उल्लंघनों के लिए प्रदूषक भुगतान सिद्धांत पर मुआवजे की वसूली सहित निवारक और उपचारात्मक कार्रवाई करने के निर्दश दिए है। टीम ने बताया कि वो अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेगे।
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सरपंच आरती शर्मा और अन्य ने बताया कि राजोेरी में पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन में स्टोन क्रेशर कथित रूप से काम कर रहे हैं। उनके द्वारा दायर एक आवेदन में यह निर्देश पारित किया गया कि सरानू में डायमंड स्टोन क्रशर और शंकर स्टोन क्रशर पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं। ये स्टोन क्रशर रिहायशी इलाके और तवी नदी के करीब स्थित हैं। भूजल निकालने के लिए अवैध बोरवेल खोदे गए हैं। आवश्यक पर्यावरण मंजूरी नहीं ली गई है। भारी मशीनरी का उपयोग करके तवी नदी के तट पर अवैध खनन भी किया जाता है, इसके परिणामस्वरूप जल स्तर में कमी, पानी की कमी, कृषि उत्पादकता में कमी, जैव विविधता का नुकसान, भूमि क्षरण, मिट्टी का क्षरण हो रहा है। अनुत्पादक बंजर भूमि, ध्वनि प्रदूषण, धूल प्रदूषण, जल प्रदूषण, वनस्पतियों और जीवों के आवास का नुकसान हो रहा है, जोकि भविष्य के लिए बहुत हानिकारक साबित होगा।
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सरपंच आदि ने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर पीसीबी ने स्टोन क्रशर द्वारा उपयोग किए जाने वाले सुरक्षा उपायों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन उनका न तो पालन किया जाता है और न ही उनकी निगरानी की जाती है। इन स्टोन क्रशर में ऐसे स्टोन क्रशर के लिए भारी प्रदूषण और अवैज्ञानिक खनन की संभावना है जिससे पर्यावरण को खराब किया जा रहा है।
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यह देखते हुए कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन करने और वैधानिक नियामकों द्वारा निगरानी की आवश्यकता है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अवैध गतिविधियों को रोकने और पिछले उल्लंघनों के लिए प्रदूषक भुगतान सिद्धांत पर मुआवजे की वसूली सहित निवारक और उपचारात्मक कार्रवाई करने के निर्दश दिए है। टीम ने बताया कि वो अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेगे।