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महिलाओं के अधिकारों और योजनाओं पर चर्चा
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राजोरी। बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय (बीजीएसबीयू) में आंतरिक शिकायत समिति और महिला सेल की ओर से महिला सशक्तीकरण पर कार्यक्रम करवाया गया। कुलपति अकबर मसूद ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ करवाया। उन्होंने महिला सशक्तीकरण के लिए लैंगिक संवेदनशीलता की भूमिका पर जोर दिया। कहा कि शिक्षा परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक है और शैक्षिक संस्थाएं जनवादी मुद्दों पर विचारों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
महिला कल्याण अधिकारी डा. अनम मिर्जा ने बाल लिंग अनुपात, सुकन्या समृद्धि योजना, जननी सुरक्षा योजना, उज्जवला योजना, वन स्टॉप सेंटर, महिला सुरक्षा कानूनों के बारे में जानकारी दी। महिला हेल्पलाइन नंबर 181, एसएमएस, आसरा योजना (प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना), जननी सुरक्षा योजना, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, विभिन्न महिला सशक्तीकरण योजनाएं और छात्रवृत्ति बारे बताया। उरनहोंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और संकट में महिलाओं को प्रदान की जाने वाली सामाजिक सहायता के बारे में जागरूकता पैदा की। आईसीसी की संयोजक डॉ रोमिना रशीद ने कहा कि कुछ वर्षों में महिलाओं की साक्षरता दर में वृद्धि के बावजूद कन्या भ्रूण हत्या की दर लगातार बढ़ रही है। समाज में लिंग संतुलन बनाने के लिए लड़के और लड़कियों दोनों को सही तरह की शिक्षा प्रदान करके इन मॉडलों को खत्म किया जा सकता है। आईसीसी के सदस्य डा. फरखंदा अना ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और कार्यक्रम का समन्वय किया। वनस्पति विज्ञान के प्रमुख डॉ सुशील वर्मा और डॉ परवेज अब्दुल्ला ने भी विचार व्यक्त किए।
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महिला कल्याण अधिकारी डा. अनम मिर्जा ने बाल लिंग अनुपात, सुकन्या समृद्धि योजना, जननी सुरक्षा योजना, उज्जवला योजना, वन स्टॉप सेंटर, महिला सुरक्षा कानूनों के बारे में जानकारी दी। महिला हेल्पलाइन नंबर 181, एसएमएस, आसरा योजना (प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना), जननी सुरक्षा योजना, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, विभिन्न महिला सशक्तीकरण योजनाएं और छात्रवृत्ति बारे बताया। उरनहोंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और संकट में महिलाओं को प्रदान की जाने वाली सामाजिक सहायता के बारे में जागरूकता पैदा की। आईसीसी की संयोजक डॉ रोमिना रशीद ने कहा कि कुछ वर्षों में महिलाओं की साक्षरता दर में वृद्धि के बावजूद कन्या भ्रूण हत्या की दर लगातार बढ़ रही है। समाज में लिंग संतुलन बनाने के लिए लड़के और लड़कियों दोनों को सही तरह की शिक्षा प्रदान करके इन मॉडलों को खत्म किया जा सकता है। आईसीसी के सदस्य डा. फरखंदा अना ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और कार्यक्रम का समन्वय किया। वनस्पति विज्ञान के प्रमुख डॉ सुशील वर्मा और डॉ परवेज अब्दुल्ला ने भी विचार व्यक्त किए।
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