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13 अप्रैल को राजोरी में अवकाश घोषित किया जाए : विबोध
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राजोरी। पूर्व एमएलसी और भाजपा जम्मू-कश्मीर के महासचिव एडवोकेट विबोध गुप्ता ने बलिदान स्तंभ पर 1947 के राजोरी नरसंहार के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्हाेंने 13 अप्रैल को ''राजोरी दिवस'' पर जिले में अवकाश घोषित करने की मांग की।
विबोध गुप्ता ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के भारत में विलय के बाद, आदिवासी आक्रमणकारियों (कबालियों) के वेश में सशस्त्र पाकिस्तानी सैनिकों ने सात नवंबर, 1947 को राजोरी पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 11 नवंबर 1947 को दिवाली की पूर्व संध्या पर एक क्रूर हमला हुआ। मातृभूमि के लिए लड़ते हुए 3000-3500 महिलाओं सहित लगभग 10,000 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। विबोध ने कहा कि 13 अप्रैल 1948 को भारतीय सेना की बहादुरी और लोगों की सहायता से शहर को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया। तब से 13 अप्रैल को राजोरी दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि राजोरी की मुक्ति के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों के बलिदान और वीरता को याद किया जा सके। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को प्रभावी रूप से अलग-थलग कर दिया है, जिससे कश्मीर में आतंकवाद में उल्लेखनीय कमी आई है। भाजपा नेता वरुण चंदन ने कहा कि 13 अप्रैल 1948 को राजोरी की मुक्ति हमारे इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। रैडिश शर्मा ने कहा कि इस दिन को सरकारी छुट्टी के रूप में मनाने से राजोरी के लोगों में गर्व और देशभक्ति की भावना बढ़ेगी। पूर्व पार्षद संजय शर्मा ने कहा कि राजोरी की मुक्ति के दौरान भारतीय सैनिकों की ओर से दिए गए सर्वोच्च बलिदानों के कारण ही हमें अपनी स्वतंत्रता और शांति मिली है। एसडीएस राजोरी के महासचिव निशु गुप्ता ने कहा कि राजोरी दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है, बल्कि हमारी भूमि की मुक्ति के लिए वीरता और बलिदान की एक शक्तिशाली याद दिलाता है।
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विबोध गुप्ता ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के भारत में विलय के बाद, आदिवासी आक्रमणकारियों (कबालियों) के वेश में सशस्त्र पाकिस्तानी सैनिकों ने सात नवंबर, 1947 को राजोरी पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 11 नवंबर 1947 को दिवाली की पूर्व संध्या पर एक क्रूर हमला हुआ। मातृभूमि के लिए लड़ते हुए 3000-3500 महिलाओं सहित लगभग 10,000 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। विबोध ने कहा कि 13 अप्रैल 1948 को भारतीय सेना की बहादुरी और लोगों की सहायता से शहर को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया। तब से 13 अप्रैल को राजोरी दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि राजोरी की मुक्ति के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों के बलिदान और वीरता को याद किया जा सके। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को प्रभावी रूप से अलग-थलग कर दिया है, जिससे कश्मीर में आतंकवाद में उल्लेखनीय कमी आई है। भाजपा नेता वरुण चंदन ने कहा कि 13 अप्रैल 1948 को राजोरी की मुक्ति हमारे इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। रैडिश शर्मा ने कहा कि इस दिन को सरकारी छुट्टी के रूप में मनाने से राजोरी के लोगों में गर्व और देशभक्ति की भावना बढ़ेगी। पूर्व पार्षद संजय शर्मा ने कहा कि राजोरी की मुक्ति के दौरान भारतीय सैनिकों की ओर से दिए गए सर्वोच्च बलिदानों के कारण ही हमें अपनी स्वतंत्रता और शांति मिली है। एसडीएस राजोरी के महासचिव निशु गुप्ता ने कहा कि राजोरी दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है, बल्कि हमारी भूमि की मुक्ति के लिए वीरता और बलिदान की एक शक्तिशाली याद दिलाता है।
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