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Rajouri News: सेना के उत्तरी कमान प्रमुख ने की एलओसी पर सुरक्षा तैयारियां परखीं
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लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ और राजोरी का किया दौरा
खुफिया समन्वय व सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल की समीक्षा की
जवानों को सतर्क एवं मिशन के लिए हरदम तैयार रहने के निर्देश
फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य तैयारियों का जायजा लेने के लिए सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ और राजोरी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैन्य इकाइयों तथा राजोरी के भीतरी इलाकों में तैनात सैन्य संरचनाओं का निरीक्षण कर मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।
सेना की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार सेना कमांडर को क्षेत्र में सामने आ रही परिचालन चुनौतियों, संयुक्त खुफिया तंत्र तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। समीक्षा का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना, किसी भी संभावित चुनौती से निपटने की तैयारी का आकलन करना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना रहा।
पुंछ और राजोरी दोनों जिले नियंत्रण रेखा के निकट स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में सेना की सतर्कता, सीमा पार से होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर और स्थानीय सुरक्षा तंत्र के साथ समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने अग्रिम सैन्य इकाइयों की तैयारियों की समीक्षा की।
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सेना कमांडर ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को भी महत्वपूर्ण बताया। संयुक्त खुफिया तंत्र के प्रभावी उपयोग और समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान से सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का तेजी से आकलन करने तथा आवश्यक कार्रवाई की तैयारी को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। जवानों को सतर्क और मिशन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
सेना कमांडर ने जवानों से बातचीत करते हुए उनके पेशेवर रवैये, कर्तव्यनिष्ठा और देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने सभी रैंकों के जवानों को सक्रिय, सतर्क और हर परिस्थिति में मिशन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। परिचालन क्षमता को मजबूत बनाए रखने और क्षेत्र में सुरक्षा के प्रभावी नियंत्रण को बरकरार रखने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे के प्रति समय रहते प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनाए रखना है।
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खुफिया समन्वय व सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल की समीक्षा की
जवानों को सतर्क एवं मिशन के लिए हरदम तैयार रहने के निर्देश
फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य तैयारियों का जायजा लेने के लिए सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ और राजोरी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैन्य इकाइयों तथा राजोरी के भीतरी इलाकों में तैनात सैन्य संरचनाओं का निरीक्षण कर मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।
सेना की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार सेना कमांडर को क्षेत्र में सामने आ रही परिचालन चुनौतियों, संयुक्त खुफिया तंत्र तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। समीक्षा का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना, किसी भी संभावित चुनौती से निपटने की तैयारी का आकलन करना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना रहा।
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पुंछ और राजोरी दोनों जिले नियंत्रण रेखा के निकट स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में सेना की सतर्कता, सीमा पार से होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर और स्थानीय सुरक्षा तंत्र के साथ समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने अग्रिम सैन्य इकाइयों की तैयारियों की समीक्षा की।
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सेना कमांडर ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को भी महत्वपूर्ण बताया। संयुक्त खुफिया तंत्र के प्रभावी उपयोग और समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान से सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का तेजी से आकलन करने तथा आवश्यक कार्रवाई की तैयारी को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। जवानों को सतर्क और मिशन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
सेना कमांडर ने जवानों से बातचीत करते हुए उनके पेशेवर रवैये, कर्तव्यनिष्ठा और देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने सभी रैंकों के जवानों को सक्रिय, सतर्क और हर परिस्थिति में मिशन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। परिचालन क्षमता को मजबूत बनाए रखने और क्षेत्र में सुरक्षा के प्रभावी नियंत्रण को बरकरार रखने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे के प्रति समय रहते प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनाए रखना है।