{"_id":"30-49435","slug":"Rajouri-49435-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह गांवों के लिए सिर्फ एक डिस्पेंसरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह गांवों के लिए सिर्फ एक डिस्पेंसरी
Rajouri
Updated Fri, 27 Jun 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजोरी। सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है। इसके बावजूद सेवाएं जनता तक नहीं पहुंच पाती हैं। शहर के पोठा क्षेत्र के आसपास के करीब छह गांवों के लिए केवल एक सरकारी डिस्पेंसरी खोली गई है, जहां न कोई डाक्टर नियुक्त किया गया है न ही कोई एंबुलेंस सेवा प्रदान की गई है। ऐसे में लोगों को उपचार कराने के लिए दरबदर होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार पोडा, डांगरी, सरानू, बल, बडून, अड़गी आदि गांवों में स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए एक सरकारी डिस्पेंसरी खोली गई थी। 30 वर्षों में न तो उसका दर्जा बढ़ाया गया न ही कोई सुविधा प्रदान की गई। स्थानीय निवासी एडवोकेट विनोद शर्मा ने राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि छह गांवों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के लिए उन्हें दरबदर होना पड़ता है। डिस्पेंसरी में केवल एक फार्मासिस्ट और एक नर्स को नियुक्त किया गया है। डाक्टर के नहीं होने से लोगों को किसी भी समस्या के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है। उन्होंने राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द क्षेत्र में किसी डाक्टर की नियुक्ति नहीं की गई और एंबुलेंस नहीं दी गई तो लोग प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द डिस्पेंसरी का दर्जा बढ़ाकर उसे पीएचसी बनाया जाए।
इस बारे में जब विभाग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा राजीव शर्मा से बात की गई तो उन्होंने जल्द समस्या का समाधान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी में हफ्ते में तीन दिन के लिए एक डाक्टर को नियुक्त किया गया था, वह क्यों नहीं वहां जाते इसकी जांच की जाएगी। जल्द एंबुलेंस प्रदान करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी का दर्जा बढ़ाने के लिए भी उच्च अधिकारियों को लिखित में भेजा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार पोडा, डांगरी, सरानू, बल, बडून, अड़गी आदि गांवों में स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए एक सरकारी डिस्पेंसरी खोली गई थी। 30 वर्षों में न तो उसका दर्जा बढ़ाया गया न ही कोई सुविधा प्रदान की गई। स्थानीय निवासी एडवोकेट विनोद शर्मा ने राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि छह गांवों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के लिए उन्हें दरबदर होना पड़ता है। डिस्पेंसरी में केवल एक फार्मासिस्ट और एक नर्स को नियुक्त किया गया है। डाक्टर के नहीं होने से लोगों को किसी भी समस्या के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है। उन्होंने राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द क्षेत्र में किसी डाक्टर की नियुक्ति नहीं की गई और एंबुलेंस नहीं दी गई तो लोग प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द डिस्पेंसरी का दर्जा बढ़ाकर उसे पीएचसी बनाया जाए।
विज्ञापन
इस बारे में जब विभाग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा राजीव शर्मा से बात की गई तो उन्होंने जल्द समस्या का समाधान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी में हफ्ते में तीन दिन के लिए एक डाक्टर को नियुक्त किया गया था, वह क्यों नहीं वहां जाते इसकी जांच की जाएगी। जल्द एंबुलेंस प्रदान करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी का दर्जा बढ़ाने के लिए भी उच्च अधिकारियों को लिखित में भेजा जाएगा।
विज्ञापन