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जवानों को तनाव में ला रहा मोबाइल फोन
Rajouri
Updated Fri, 30 May 2014 05:32 AM IST
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राजोरी। मोबाइल फोन और उस पर सोशल मीडिया के साथ पूरी कनेक्टिविटी। हर समय अपनों के संपर्क में रहना। ये सब चीजें जवानों को तनावग्रस्त कर रहा है। परिवार की छोटी-छोटी परेशानी से वे तुरंत बावस्ता हो रहे हैं, जिसे वे झेल नहीं पाते हैं और आवेश में आकर अपनी जान खुद गंवा बैठते हैं। मनौचिकित्सों की मानें तो मोबाइल फोन ही जवानों के तनाव का सबसे बड़ा कारण है।
जब मोबाइल सेवा नहीं थी, तब तो जवानों का तनाव में आना स्वाभाविक लगता था, लेकिन अब उनके पास मनोरंजन और अपनों से संपर्क में रहने के कई तरीके हैं, लेकिन फिर जवान तनाव के शिकार होकर आत्महत्या कर रहे हैं। बेशक भारतीय सेना में मोबाइल का इस्तेमाल करने पर रोक है, लेकिन हकीकत तो यह है कि लगभग हर जवान के पास मोबाइल फोन उपलब्ध है। अधिकारियों से लेकर जवानों तक सब इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां तक कि फेसबुक और व्हाटसएप जैसे सोशल मीडिया साइट के माध्यम से भी जवान अपने संगे संबंधियों, दोस्तों, अपने परिवार से जुड़े हुए हैं। फिर भी वे तनाव का शिकार हो रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक डा. जगदीश थापा का कहना है कि जवानों के पास मोबाइल फोन होना ही उनके तनाव का कारण है। दरअसल, पहले जब मोबाइल नहीं थे तो जवानों पर दबाव नहीं था। क्योंकि उनके परिवार में कोई बात होती थी तो महीनों के बाद पता चलती थी। बिना दबाव के जवान काम करते थे। लेकिन घर की हर बात से तुरंत रूबरू होते रहते हैं। दूर रहने के कारण अपने को बेवस पाकर आपा खो बैठते हैं।
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जब मोबाइल सेवा नहीं थी, तब तो जवानों का तनाव में आना स्वाभाविक लगता था, लेकिन अब उनके पास मनोरंजन और अपनों से संपर्क में रहने के कई तरीके हैं, लेकिन फिर जवान तनाव के शिकार होकर आत्महत्या कर रहे हैं। बेशक भारतीय सेना में मोबाइल का इस्तेमाल करने पर रोक है, लेकिन हकीकत तो यह है कि लगभग हर जवान के पास मोबाइल फोन उपलब्ध है। अधिकारियों से लेकर जवानों तक सब इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां तक कि फेसबुक और व्हाटसएप जैसे सोशल मीडिया साइट के माध्यम से भी जवान अपने संगे संबंधियों, दोस्तों, अपने परिवार से जुड़े हुए हैं। फिर भी वे तनाव का शिकार हो रहे हैं।
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मनोवैज्ञानिक डा. जगदीश थापा का कहना है कि जवानों के पास मोबाइल फोन होना ही उनके तनाव का कारण है। दरअसल, पहले जब मोबाइल नहीं थे तो जवानों पर दबाव नहीं था। क्योंकि उनके परिवार में कोई बात होती थी तो महीनों के बाद पता चलती थी। बिना दबाव के जवान काम करते थे। लेकिन घर की हर बात से तुरंत रूबरू होते रहते हैं। दूर रहने के कारण अपने को बेवस पाकर आपा खो बैठते हैं।
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