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जंगली जानबरों के आंतक से किसान परेशांन
Updated Mon, 17 Sep 2018 01:09 AM IST
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सुंदरबनी। उपजिला सुंदरबनी के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कड़ी मेहनत से तैैयार मक्की तथा सब्जियों की फसलों को जंगली जानवर बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं। उन्होंने राज्यपाल और वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट से जंगली जानवरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। कोई कदम नहीं उठाने से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है।
उपजिला सुंदरबनी के पहाड़ी इलाके के गांवों मरचौला, चन्नी सलेरी आदि के किसानों मुंशी राम, ओमप्रकाश, चंद्रपाल, राज कुमार, सतपाल, कृष्ण लाल, मदनलाल आदि ने बताया कि उनकी मक्की की फसल को जंगली जानवरों ने भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि दिन के समय बंदर फसलों को तबाह की देते हैं और रात के समय जंगली सुअर तथा अन्य जानवर फसलों को तबाह करते हैं। उनका कहना है कि पूरा दिन वह अगर फसलों की रखवाली कर बंदरों से फसल को बचाते हैं, तो रात में सुअर, गीदड़ आदि फसलों का नुकसान पहुंचाते हैं।
किसानों का कहना है कि उनका मुख्य पेशा ही खेतीबाड़ी होने के कारण वह कड़ी मेहनत करके फसलों को तैयार करते हैं कि ताकि छह माह के बाद उनकी मेहनत की कमाई उनके हाथ लगे, लेकिन हर बार जब उनकी फसल तैयार होती हैं, तो जंगली जानवर उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। वे उनकी तैयार फसलों को बर्बाद कर देते हैं, जिससे उनकी मेहनत बर्बाद हो जाती है।
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उन्होंने कहा कि इस समय क्षेत्र में बंदर, जंगली सुअर, गीदड़ की तादात काफी बढ़ गई है। प्रशासन तथा वाइल्ड लाइफ विभाग से कई बार गुहार लगाई गई कि जंगली जानवरों से उनकी फसलों को बचाने के लिए कदम उठाए जाएं, लेकिन कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि विभाग फसल बर्बाद कर रहे जानवरों को पकड़कर कहीं और ले जाए, जिससे किसानों की फसल बच सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मजबूर होकर किसानों को फसल लगाना ही बंद कर देना पड़ेगा। ऐसे में किसानों के भूखे मरने की नौबत तक आ जाएगी।
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उपजिला सुंदरबनी के पहाड़ी इलाके के गांवों मरचौला, चन्नी सलेरी आदि के किसानों मुंशी राम, ओमप्रकाश, चंद्रपाल, राज कुमार, सतपाल, कृष्ण लाल, मदनलाल आदि ने बताया कि उनकी मक्की की फसल को जंगली जानवरों ने भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि दिन के समय बंदर फसलों को तबाह की देते हैं और रात के समय जंगली सुअर तथा अन्य जानवर फसलों को तबाह करते हैं। उनका कहना है कि पूरा दिन वह अगर फसलों की रखवाली कर बंदरों से फसल को बचाते हैं, तो रात में सुअर, गीदड़ आदि फसलों का नुकसान पहुंचाते हैं।
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किसानों का कहना है कि उनका मुख्य पेशा ही खेतीबाड़ी होने के कारण वह कड़ी मेहनत करके फसलों को तैयार करते हैं कि ताकि छह माह के बाद उनकी मेहनत की कमाई उनके हाथ लगे, लेकिन हर बार जब उनकी फसल तैयार होती हैं, तो जंगली जानवर उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। वे उनकी तैयार फसलों को बर्बाद कर देते हैं, जिससे उनकी मेहनत बर्बाद हो जाती है।
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उन्होंने कहा कि इस समय क्षेत्र में बंदर, जंगली सुअर, गीदड़ की तादात काफी बढ़ गई है। प्रशासन तथा वाइल्ड लाइफ विभाग से कई बार गुहार लगाई गई कि जंगली जानवरों से उनकी फसलों को बचाने के लिए कदम उठाए जाएं, लेकिन कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि विभाग फसल बर्बाद कर रहे जानवरों को पकड़कर कहीं और ले जाए, जिससे किसानों की फसल बच सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मजबूर होकर किसानों को फसल लगाना ही बंद कर देना पड़ेगा। ऐसे में किसानों के भूखे मरने की नौबत तक आ जाएगी।