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भारी बर्फ के बीच जान जोखिम में डाल कर पुंछ एंव कश्मीर के बीच सम्पर्क बहाल करने के लिए जी जान से जुटे दर्जनों कर्मचारी
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पुंछ जिले की तरफ से मुगलरोड पर गिरी भारी बर्फ,बर्फ हटाने में लगी मशीने और कर्मचारी
- फोटो : POONCH
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पुंछ। मुगलरोड तीन दिन से बर्फबारी के चलते बंद थी। उसे दोबारा वाहनों की आवाजाही के लिए खोलने के लिए पुंछ की तरफ से पीडब्लूडी मेकेनिकल इकाई और मुगलरोड अथारिटी के दर्जनों कर्मचारी एवं अधिकारी आधुनिक मशीन के साथ जान जोखिम में डालकर पुंछ और कश्मीर के बीच संपर्क बहाल करने में जुटे हैं। जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी तक चार बार होने वाली बर्फबारी के कारण बार बार बंद होने वाली मुगलरोड को खोलने के लिए संबधित विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को किस प्रकार की कठिनाईयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
पुंछ जिले की तरफ से 45 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर एक से चार फुट तक बर्फ की मोटी परत के बीच ग्राउंड पर जमा है। समुद्र तल से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर नीचे बिछी चार फुट मोटी बर्फ और ऊपर से तेज बर्फीली हवाओं के थपेड़ों में जहां मशीनें भी हांफने लगती हैं। वहीं दर्जनों कर्मचारी एवं अधिकारी अपने बुलंद हौसलों के साथ सड़क से बर्फ हटाने के काम को अंजाम देने में जुटे नजर आए। भारी बर्फबारी के बाद हर तरफ बिछी सफेद चादर के बीच इस बात का अंदाजा लगाना भी कठिन होता है कि कहां सड़क है कहां गड्ढे के बावजूद इसके पीडब्लूडी मेकेनिकल इकाई की मशीनें और कर्मचारी आगे ही बढ़ते दिखीं। शून्य के नीचे के तापमान में कम कर रहे कर्मचारियों से बात की गई कि मुगलरोड को यातायात के लिए खोलने में किस प्रकार की कठिनाइयां पेश आती हैं तो वहां मौजूद ताहिर न्याज एवं मोहम्मद सफीर ने बताया कि हमारे लिए सबसे बड़ी कठिनाई मुगलरोड पर कई स्थानों पर आने वाले एवलांच और पहाड़ से गिर रहे पत्थरों के बीच मशीनों और साथियों की जान को सुरक्षित बचते हुए अपने काम को अंजाम सबसे कठिन काम होता है। उस पर जबरदस्त ठंड और पलक झपकते ही मौसम का बदल जाना, सड़क पर कई इंच मोटा पाला जम जाना जिस पर मशीनें भी फिसलने लगती हैं। वह एक चुनौती रहती है। परंतु अपने काम के प्रति लगन और बुलंद हौसलों से हम हमेशा अपने काम को बखूबी अंजाम देते हैं। क्योंकि मुगलरोड पुंछ एवं राजोरी के लोगों के लिए बहुत अहम मार्ग है। इससे होकर तीन से चार घंटों में कम खर्च में यहां के विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीज कश्मीर में उच्च प्रकार के उपचार के लिए पहुंच जाते हैं। ऐसे में विपरीत परिस्थितियों में काम करते समय हमारे मन में दो बातों का ख्याल रहता है कि हमें अपनी ड्यूटी को हर हाल में अंजाम देना है। हमारी थोड़ी सी कुर्बानी से सैकड़ों लोगों का भला हो जाएगा।
उधर पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल इकाई के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मोहम्मद तारिक खान का कहना है कि हमें जब तक उच्च अधिकारियों की तरफ से आदेश मिलते रहेंगे। हम हर प्रकार से प्रयास कर मुलरोड पर यातायात बहाल करने के लिए इसे खोलने का काम अंजाम देते रहेंगे।
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गौरतलब है कि जिले में जब भी मौसम खराब होता है तो मुगलरोड पर छह इंच से लेकर दो तीन फुट तक बर्फ गिर जाती है।
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पुंछ जिले की तरफ से 45 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर एक से चार फुट तक बर्फ की मोटी परत के बीच ग्राउंड पर जमा है। समुद्र तल से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर नीचे बिछी चार फुट मोटी बर्फ और ऊपर से तेज बर्फीली हवाओं के थपेड़ों में जहां मशीनें भी हांफने लगती हैं। वहीं दर्जनों कर्मचारी एवं अधिकारी अपने बुलंद हौसलों के साथ सड़क से बर्फ हटाने के काम को अंजाम देने में जुटे नजर आए। भारी बर्फबारी के बाद हर तरफ बिछी सफेद चादर के बीच इस बात का अंदाजा लगाना भी कठिन होता है कि कहां सड़क है कहां गड्ढे के बावजूद इसके पीडब्लूडी मेकेनिकल इकाई की मशीनें और कर्मचारी आगे ही बढ़ते दिखीं। शून्य के नीचे के तापमान में कम कर रहे कर्मचारियों से बात की गई कि मुगलरोड को यातायात के लिए खोलने में किस प्रकार की कठिनाइयां पेश आती हैं तो वहां मौजूद ताहिर न्याज एवं मोहम्मद सफीर ने बताया कि हमारे लिए सबसे बड़ी कठिनाई मुगलरोड पर कई स्थानों पर आने वाले एवलांच और पहाड़ से गिर रहे पत्थरों के बीच मशीनों और साथियों की जान को सुरक्षित बचते हुए अपने काम को अंजाम सबसे कठिन काम होता है। उस पर जबरदस्त ठंड और पलक झपकते ही मौसम का बदल जाना, सड़क पर कई इंच मोटा पाला जम जाना जिस पर मशीनें भी फिसलने लगती हैं। वह एक चुनौती रहती है। परंतु अपने काम के प्रति लगन और बुलंद हौसलों से हम हमेशा अपने काम को बखूबी अंजाम देते हैं। क्योंकि मुगलरोड पुंछ एवं राजोरी के लोगों के लिए बहुत अहम मार्ग है। इससे होकर तीन से चार घंटों में कम खर्च में यहां के विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीज कश्मीर में उच्च प्रकार के उपचार के लिए पहुंच जाते हैं। ऐसे में विपरीत परिस्थितियों में काम करते समय हमारे मन में दो बातों का ख्याल रहता है कि हमें अपनी ड्यूटी को हर हाल में अंजाम देना है। हमारी थोड़ी सी कुर्बानी से सैकड़ों लोगों का भला हो जाएगा।
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उधर पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल इकाई के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मोहम्मद तारिक खान का कहना है कि हमें जब तक उच्च अधिकारियों की तरफ से आदेश मिलते रहेंगे। हम हर प्रकार से प्रयास कर मुलरोड पर यातायात बहाल करने के लिए इसे खोलने का काम अंजाम देते रहेंगे।
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गौरतलब है कि जिले में जब भी मौसम खराब होता है तो मुगलरोड पर छह इंच से लेकर दो तीन फुट तक बर्फ गिर जाती है।