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Poonch News: अब्दुल मजीद के परिवार ने छह साल में दिए दो बलिदान, भावी पीढ़ी भी तैयार
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देश के लिए बलिदान देने का जज्बा सिखाता रहा बलिदानी का परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। एक तरफ जहां देश में मौजूद देशद्रोही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी सरगनाओं के हाथों की कठपुतली बन कर आतंकियों का साथ दे रहे हैं। वहीं, देश के लिए बलिदान देने का जज्बा रखने वालों की भी यहां कमी नहीं है। गांव अजोट के बलिदानी सेना के पैरा कमांडो हवलदार अब्दुल मजीद का परिवार छह वर्षों में दो सपूत देश पर बलिदान कर चुका है। इसके बाद भी वे भावी पीढ़ी को सेना में भेजने का जज्बा रखते हैं।
जांबाज बेटे अब्दुल मजीद को अंतिम विदाई देने के दौरान बलिदानी के पिता मोहम्मद रशीद, ससुर मीर मोहम्मद, मामा मोहम्मद यूसुफ और नाना चौधरी मोहम्मद फजल ने अपने इरादों को खुलासा किया। कहा कि उन्हें अपने बेटे के बलिदान पर गर्व है। बोले, हमारा परिवार देश की हिफाजत के लिए ही बना है। हमने छह वर्ष पहले एक बेटे हवलदार मोहम्मद नसीर को पुंछ जिले के बालाकोट सेक्टर में देश के लिए बलिदान किया था। परसों राजोरी में हवलदार अब्दुल मजीद को बलिदान कर दिया। जवान बच्चों के बलिदान से भी हमारे हौसले पस्त नहीं होने वाले। बल्कि, बच्चों के बलिदान से हमारा मनोबल बढ़ता है। हम अपने पड़ोसी देश के नापाक इरादों को नाकाम बनाने के लिए हर कुर्बानी देंगे। हमारे परिवार की भावी पीढ़ियां, यहां तक की अब्दुल मजीद के बच्चे भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करेंगे।
पिता ने कहा, मेरा एक और बेटा है। मैं चाहता हूं कि वह भी भाई की तरह देश की सेवा करे। उस पार से आने वाले इन कुत्तों का कुछ तो इलाज करना चाहिए, जो छिप कर पीछे से हमला करते हैं। सेना से सेवानिवृत्त मामा ने कहा कि उनके बेटे सहित करीब 35 से 40 रिश्तेदार सेना में कार्यरत हैं। हम पाकिस्तान से डरने वाले नहीं हैं, बल्कि हम इसी तरह देश के लिए अपने बच्चों को सेना में भेजते रहेंगे। अब पाकिस्तान को नक्शे से मिटा कर 1947 के पहले वाला हिंदुस्तान बना देना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। एक तरफ जहां देश में मौजूद देशद्रोही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी सरगनाओं के हाथों की कठपुतली बन कर आतंकियों का साथ दे रहे हैं। वहीं, देश के लिए बलिदान देने का जज्बा रखने वालों की भी यहां कमी नहीं है। गांव अजोट के बलिदानी सेना के पैरा कमांडो हवलदार अब्दुल मजीद का परिवार छह वर्षों में दो सपूत देश पर बलिदान कर चुका है। इसके बाद भी वे भावी पीढ़ी को सेना में भेजने का जज्बा रखते हैं।
जांबाज बेटे अब्दुल मजीद को अंतिम विदाई देने के दौरान बलिदानी के पिता मोहम्मद रशीद, ससुर मीर मोहम्मद, मामा मोहम्मद यूसुफ और नाना चौधरी मोहम्मद फजल ने अपने इरादों को खुलासा किया। कहा कि उन्हें अपने बेटे के बलिदान पर गर्व है। बोले, हमारा परिवार देश की हिफाजत के लिए ही बना है। हमने छह वर्ष पहले एक बेटे हवलदार मोहम्मद नसीर को पुंछ जिले के बालाकोट सेक्टर में देश के लिए बलिदान किया था। परसों राजोरी में हवलदार अब्दुल मजीद को बलिदान कर दिया। जवान बच्चों के बलिदान से भी हमारे हौसले पस्त नहीं होने वाले। बल्कि, बच्चों के बलिदान से हमारा मनोबल बढ़ता है। हम अपने पड़ोसी देश के नापाक इरादों को नाकाम बनाने के लिए हर कुर्बानी देंगे। हमारे परिवार की भावी पीढ़ियां, यहां तक की अब्दुल मजीद के बच्चे भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करेंगे।
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पिता ने कहा, मेरा एक और बेटा है। मैं चाहता हूं कि वह भी भाई की तरह देश की सेवा करे। उस पार से आने वाले इन कुत्तों का कुछ तो इलाज करना चाहिए, जो छिप कर पीछे से हमला करते हैं। सेना से सेवानिवृत्त मामा ने कहा कि उनके बेटे सहित करीब 35 से 40 रिश्तेदार सेना में कार्यरत हैं। हम पाकिस्तान से डरने वाले नहीं हैं, बल्कि हम इसी तरह देश के लिए अपने बच्चों को सेना में भेजते रहेंगे। अब पाकिस्तान को नक्शे से मिटा कर 1947 के पहले वाला हिंदुस्तान बना देना चाहिए।
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