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पुंछ मुठभेड़: कभी आतंकियों का गढ़ था यही इलाका, पुराने ठिकानों के पास हुए हमले इस साजिश की ओर कर रहे इशारा

Sat, 16 Oct 2021 02:00 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sat, 16 Oct 2021 02:00 AM IST
सार

चमरेड़ में हुए आतंकी हमले को देखें तो उसके आसपास का इलाका मस्तानदरा व दराबा से सटा हुआ है। हाल ही के भाटादूड़ियां हमले में भी संगयोट, नक्का मंजयाड़ी व गुरसाई का इलाका शामिल है। ये इलाके आतंकवाद के दौर में आतंकियों का गढ़ होते थे।

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Poonch encounter terrorists are again active in areas dominated by Pakistan terrorists
पुंछ मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में करीब दो दशक पहले पाकिस्तान परस्त आतंकियों के वर्चस्व वाले इलाकों में दहशतगर्द एक बार फिर से सक्रिय होते जा रहे हैं। चार दिन के भीतर सुरक्षाबलों पर उन क्षेत्रों में हमला हुआ जहां 2002 से पहले आतंकियों का गढ़ था। सुरक्षाबलों ने तब इन इलाकों में कई ऑपरेशन को अंजाम देकर आतंकियों का समूल नाश कर दिया था।

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लेकिन इस सप्ताह हुए हमलों से संकेत मिल रहे हैं कि जिले में आतंकियों को समर्थन, पनाह और स्थानीय मदद मजबूती के साथ मिल रही है। दूसरा कारण इन इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी की सटीक जानकारी भी एजेंसियों से दूर होती नजर आ रही है। ऐसा हाल 1990 से 2000 के बीच था। तब सुरक्षाबलों-खुफिया एजेंसियों को आतंकियों की सूचना कम मिलती थी।
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यह भी पढ़ें- सात जवानों की शहादत: क्या पुंछ में हैं आतंकियों के मददगार, कहां से आ रहा है खाना, ऐसा संभव कैसे?    

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आतंकियों के पुराने ठिकाने के आसपास ही हुए हमले

जिले में आतंकवाद के दौर में जहां सुरनकोट तहसील के सुरन नदी के उस पार के क्षेत्रों में आतंकियों के बड़े ठिकाने थे। तहसील के मस्तानदरा, मुगलमाड़ा, देहरागली, दराबा में और मेंढर तहसील के संगयोट, मक्का मजंयाड़ी, भाटादूड़ियां व गुरसाई आतंकियों का गढ़ माना जाता था। ऐसे में अगर चमरेड़ में हुए आतंकी हमले को देखें तो उसके आसपास का इलाका मस्तानदरा व दराबा से सटा हुआ है। हाल ही के भाटादूड़ियां हमले में भी संगयोट, नक्का मंजयाड़ी व गुरसाई का इलाका शामिल है। ये इलाके आतंकवाद के दौर में आतंकियों का गढ़ होते थे। आतंकी गतिविधियों पर गौर किया जाए तो इस तरह के हमले स्थानीय सहयोग के संभव नहीं है। हमलों को अंजाम देने के लिए आतंकियों को कई दिनों तक उसी क्षेत्र में रहना होता है। जहां उन्हें खाने-पीने से लेकर आश्रय लेने तक की जरूरत होती है।


 

आईएसआई पुंछ और राजोरी में फिर आतंकवाद को जिंदा करने में जुटी

हाल ही के हमलों से यह बात भी पूरी तरह सही साबित हो रही है कि आतंकी संगठनों के आका, आईएसआई और पाकिस्तानी सेना पुंछ व राजोरी में फिर से आतंकवाद की आग में झोंकने का काम कर रही है। राजोरी के थन्नामंडी, सुरनकोट के चमरेड़, और मेंढर के भाटादूड़ियां में हुए हमलों में शामिल आतंकी घुसपैठ करने के बाद घाटी में न जाकर यहीं डेरा डाले हुए हैं। उनकी पूरी साजिश बड़े हमलों को अंजाम दे की है।

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