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Poonch News: धूमधाम से मनाया गया 75वां पुंछ लिंकअप दिवस,शहीदों को श्रदांजली अर्पित करने के साथ रंगा कार्यक्रम का आयोजन

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पुंछ लिंकअप दिवस के अवसर पर शहीदों को श्रदांजली अर्पित करते सेना के उत्तरी कमांडर एंव लोगों से मि - फोटो : POONCH
पुंछ। पुंछ राज्य के आधे से भी कम भाग को एक वर्ष तक पाकिस्तानी सेना एवं कबायलियों के कब्जे से छुड़ाने और उसे भारत के साथ जोड़ने के उपलक्ष्य में मंगलवार को सेना की पुंछ ब्रिगेड द्वारा अवाम के साथ 75वां पुंछ लिंक अप दिवस एवं पुंछ के स्वतंत्रता दिवस को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पुंछ को देश के साथ जोड़ने के साथ ही इसकी रक्षा के लिए 1947, 48, 65, 71 में प्राणों का बलिदान देने वाले सेना के अधिकारियों, जवानों और आम नागरिकों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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पुंछ के भारत से जुड़ने और देश की स्वतंत्रता के एक वर्ष बाद स्वतंत्र होने की खुशी में एक रंगारंग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसमें स्कूली बच्चों, युवाओं और जिले के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इसके साथ ही पुंछ लिंक अप दिवस के उपलक्ष्य में पिछले 22 दिनों से आयोजित कराए जा रहे, कार्यक्रमों का समापन करते हुए उनमें भाग लेने वालों को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। मंगलवार को 75वां पुंछ लिंक अप दिवस के उपलक्ष्य में सेना की पुंछ ब्रिगेड की तरफ से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों, गण्यमान्य नागरिकों और स्कूली बच्चों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुंछ ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर राजेश बिष्ट ने की, जबकि सेना की वाइट नाइट कार्प के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह और सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। सर्वप्रथम सैन्य अधिकारियों एवं पूर्व सैनिकों शहीद स्मारक नमन स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जिसके उपरांत सेना के नाटो आडिटोरियम के बाहर गुब्बारे उढ़ाए गए। उसके उपरांत रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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जीओसी ने पुंछ वासियों को बधाई देते हुए कहा कि देश के लोगों को पुंछ के लोगों से सीखना चाहिए कि किस प्रकार सेना और आवाम के आपसी सहयोग से एक वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद दुश्मन के घेरे को तोड़ कर उसको खदेड़ कर अपने इलाके को आजाद करवाया है। पुंछ की आवाम और सेना का सहयोग आज भी बरकरार है।
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इस अवसर पर संजय रैना एवं पद्मश्री से सम्मानित शंभूनाथ खजूरिया आदि मौजूद रहे।
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