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कल रात पाकिस्तानी सेना ने जिस प्रकार की गोलाबारी की हमारे बचने की कोई उमीद ही नहीं थी
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पुंछ जिले के गांव करमाडा में पाकिस्तानी गोलाबारी के बाद गोलों के टुक्कडे दिखाते ग्रामीण
- फोटो : POONCH
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पुंछ। वीरवार की रात हमारे गांव को निशाना बना कर जिस प्रकार पाकिस्तानी सेना ने गोलाबारी की, उसमें हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। हमें तो खुदा ने बचा लिया। हमारे घरों के आसपास ऐसे गोले गिर रहे थे, मानाें ओले बरस रहे हों।
यह कहना है भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के करमाड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों महमूद अहमद, अब्दुल रशीद, मोहम्मद सलीम का। इन लोगों का कहना है कि वीरवार शाम को सात बजे के पहले ही पाकिस्तानी सेना ने गोलाबारी शुरू कर दी। इसके बाद वह देर रात तक गांव को निशाना बना कर गोले बरसाते रहे। गांव के अधिकतर लोगों ने खाना भी नहीं खाया था कि गोले गिरने लगे। अधिकतर लोग रात को खाना भी नहीं खा पाए, क्योंकि हमारे घरों के पास गिरने वाले हर गोले के धमाके से ऐसा लग रहा था कि अगला गोला हमारे घर पर गिरेगा और हमारा काम तमाम कर देगा। क्योंकि गांव में जो निजी बंकर बने हैं हमें उन तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिला। हमारे हर घर के पास आज तक निजी बंकर नहीं बनाए गए है। गोलाबारी इतनी जोरदार थी कि बच्चे डर कर रात भर रोते रहे।
महमूद अहमद ने कहा कि पाकिस्तानी सेना तो हमारी जान की दुश्मन है। वह हमें मारना चाहती है। हमारी केंद्र सरकार ने नियंत्रण रेखा के हम जैसे लोगों को बचाने के लिए करोड़ों रुपये बंकर निर्माण के लिए मंजूर किए हैं, परंतु ग्रामीण विकास विभाग भी हमारी जान की परवाह नहीं करता है। जो आज तक गांव में हर घर के पास बंकरों का निर्माण नहीं करा पाया है। चंद सामुदायिक बंकरों का निर्माण कराया गया है। जो हमारे घरों से दूर हैं। जहां तक गोलाबारी के बीच पहुंचा ही नहीं जा सकता है। हमारी उपराज्यपाल प्रशासन से विनती है कि हमारी जान बचाने के लिए जल्दी ही हर घर के पास निजी बंकर बनाया जाए।
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यह कहना है भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के करमाड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों महमूद अहमद, अब्दुल रशीद, मोहम्मद सलीम का। इन लोगों का कहना है कि वीरवार शाम को सात बजे के पहले ही पाकिस्तानी सेना ने गोलाबारी शुरू कर दी। इसके बाद वह देर रात तक गांव को निशाना बना कर गोले बरसाते रहे। गांव के अधिकतर लोगों ने खाना भी नहीं खाया था कि गोले गिरने लगे। अधिकतर लोग रात को खाना भी नहीं खा पाए, क्योंकि हमारे घरों के पास गिरने वाले हर गोले के धमाके से ऐसा लग रहा था कि अगला गोला हमारे घर पर गिरेगा और हमारा काम तमाम कर देगा। क्योंकि गांव में जो निजी बंकर बने हैं हमें उन तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिला। हमारे हर घर के पास आज तक निजी बंकर नहीं बनाए गए है। गोलाबारी इतनी जोरदार थी कि बच्चे डर कर रात भर रोते रहे।
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महमूद अहमद ने कहा कि पाकिस्तानी सेना तो हमारी जान की दुश्मन है। वह हमें मारना चाहती है। हमारी केंद्र सरकार ने नियंत्रण रेखा के हम जैसे लोगों को बचाने के लिए करोड़ों रुपये बंकर निर्माण के लिए मंजूर किए हैं, परंतु ग्रामीण विकास विभाग भी हमारी जान की परवाह नहीं करता है। जो आज तक गांव में हर घर के पास बंकरों का निर्माण नहीं करा पाया है। चंद सामुदायिक बंकरों का निर्माण कराया गया है। जो हमारे घरों से दूर हैं। जहां तक गोलाबारी के बीच पहुंचा ही नहीं जा सकता है। हमारी उपराज्यपाल प्रशासन से विनती है कि हमारी जान बचाने के लिए जल्दी ही हर घर के पास निजी बंकर बनाया जाए।
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