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हमारा क्या कसूर है जो हमारे जीवन और हमारे बच्चों के भविष्य से खेला जा रहा है,हमने तो विभाग की सेवा में अपने बाजू दे दिए
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पुंछ में विद्युत विभाग में नीडबेस के तोर पर काम करने वाले कर्मचारी जिन्होने कामकरते अपनी बाजू गा?
- फोटो : POONCH
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पुंछ। हमारा क्या कसूर है, जो हमारे जीवन और हमारे बच्चों के भविष्य से खेला जा रहा है, हमने तो विभाग की सेवा में अपने बाजू दे दिए। बीस साल तक बिजली विभाग में दिन रात सेवाएं देने के बाद भी हमें स्थायी नहीं किया गया, उल्टा विभाग को निजी हाथों में सौंप कर बाहर का रास्ता दिखाने का काम किया जा रहा है।
यह कहना है तीन दिन से विद्युत विभाग के निगमीकरण के विरोध में और दिहाड़ीदार कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में शामिल मुनीर हुसैन और मोहम्मद रफीक का। वह 20 वर्ष से विद्युत विभाग में नीड बेस कर्मचारी के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। बिजली की तारों की मरमत के दौरान करंट की चपेट में आ कर अपनी एक-एक बाजू गंवा कर जीवन भर के लिए दिव्यांग हो चुके हैं। इनका कहना है कि किसी भी सरकार ने हमारे साथ न्याय नहीं किया। हमें मोदी सरकार से आशा थी कि वह हमारे साथ न्याय करेगी। क्योंकि हमने पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम करते हुए बिजली विभाग की सेवा में अपने बाजू तक दे दिए। हमारे साथ यह न्याय किया जा रहा है। हमारे जीवन और हमारे बच्चों के भविष्य से खेला जा रहा है। हमें हमारे दिव्यांग होने का मुआवजा देना तो दूर हमें स्थायी तक नहीं किया गया। अब सरकार विद्युत विभाग को निजी हाथों में सौंपने जा रही है।
अगर विभाग का निगमीकरण हो गया तो निजी कंपनियां हम जैसे लोगों को सबसे पहले निकाल बाहर करेंगी। हम और हमारे बच्चों का क्या होगा। मुनीर हुसैन का कहना है कि केवल हम दो लोग ही नहीं है जो बिजली विभाग में सेवाएं देते हुए दिव्यागं हुए हैं, बल्कि हमारे जैसे दर्जन भर लोग केवल जिला पुंछ में हैं और पूरे जम्मू-कश्मीर में तो ऐसे सैकड़ों लोग होंगे। इसलिए सरकार को हमारे और हमारे बाल बच्चों के बारे में कुछ सोचना चाहिए, हमारी मांगों को पूरा करना चाहिए।
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यह कहना है तीन दिन से विद्युत विभाग के निगमीकरण के विरोध में और दिहाड़ीदार कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में शामिल मुनीर हुसैन और मोहम्मद रफीक का। वह 20 वर्ष से विद्युत विभाग में नीड बेस कर्मचारी के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। बिजली की तारों की मरमत के दौरान करंट की चपेट में आ कर अपनी एक-एक बाजू गंवा कर जीवन भर के लिए दिव्यांग हो चुके हैं। इनका कहना है कि किसी भी सरकार ने हमारे साथ न्याय नहीं किया। हमें मोदी सरकार से आशा थी कि वह हमारे साथ न्याय करेगी। क्योंकि हमने पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम करते हुए बिजली विभाग की सेवा में अपने बाजू तक दे दिए। हमारे साथ यह न्याय किया जा रहा है। हमारे जीवन और हमारे बच्चों के भविष्य से खेला जा रहा है। हमें हमारे दिव्यांग होने का मुआवजा देना तो दूर हमें स्थायी तक नहीं किया गया। अब सरकार विद्युत विभाग को निजी हाथों में सौंपने जा रही है।
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अगर विभाग का निगमीकरण हो गया तो निजी कंपनियां हम जैसे लोगों को सबसे पहले निकाल बाहर करेंगी। हम और हमारे बच्चों का क्या होगा। मुनीर हुसैन का कहना है कि केवल हम दो लोग ही नहीं है जो बिजली विभाग में सेवाएं देते हुए दिव्यागं हुए हैं, बल्कि हमारे जैसे दर्जन भर लोग केवल जिला पुंछ में हैं और पूरे जम्मू-कश्मीर में तो ऐसे सैकड़ों लोग होंगे। इसलिए सरकार को हमारे और हमारे बाल बच्चों के बारे में कुछ सोचना चाहिए, हमारी मांगों को पूरा करना चाहिए।
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