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मंडी तैहसील में रीछ हमले में एक ग्रामीण घायल हालत गंभीर
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पुंछ जिले की मंडी तेहसील में रीछ हमले में घायल ग्रामीण उपजिला अस्पताल मंडी में उपचाराधिन
- फोटो : POONCH
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पुंछ। मंडी तहसील में शनिवार देर शाम को एक रीछ के हमले से एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया है। परिजनों ने ग्रामीण को उपजिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
रीछ हमले में घायल ग्रामीण की पहचान गुलाम नबी लोन (45) पुत्र कमाल लोन निवासी गांव कलसां बायला के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुलाम नबी अपने घर के बाहर बैठा हुआ था। तभी एक रीछ ने उस पर हमला कर दिया। गुलाम नबी जान बचाने के लिए चिल्लाने लगा। उसकी चीखें सुन कर परिजन और आसपास के लोग मौके पर एकत्र हुए। लाठी, डंडों और पत्थरों से उन्होंने रीछ को वहां से खदेड़ा और गंभीर रूप से घायल गुलाम नबी को उपजिला अस्पताल पहुंचाया।
इस घटना से गुलाम नबी के परिजनों एवं ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी रोष है। उनका कहना है कि हर बार मक्की के मौसम में रीछ हमलों में गांव के दर्जनों लोग ऐसे ही घायल हो जाते हैं। परंतु विभाग की तरफ से कुछ भी नहीं किया जाता। गांव में रीछ देखे जाने के बाद बार बार बुलाने पर भी विभाग का कोई अधिकारी नहीं आता। और न ही रीछ को भगाने के लिए पटाखे, आदि उपलब्ध कराए जाते हैं। यहां तक कि रीछ हमलों के बाद पुंछ या जम्मू के अस्पतालों में महीनों जिंदगी और मौत से जूझने वाले घायलों को सरकारी सहायता तक प्रदान नहीं की जाती है।
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रीछ हमले में घायल ग्रामीण की पहचान गुलाम नबी लोन (45) पुत्र कमाल लोन निवासी गांव कलसां बायला के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुलाम नबी अपने घर के बाहर बैठा हुआ था। तभी एक रीछ ने उस पर हमला कर दिया। गुलाम नबी जान बचाने के लिए चिल्लाने लगा। उसकी चीखें सुन कर परिजन और आसपास के लोग मौके पर एकत्र हुए। लाठी, डंडों और पत्थरों से उन्होंने रीछ को वहां से खदेड़ा और गंभीर रूप से घायल गुलाम नबी को उपजिला अस्पताल पहुंचाया।
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इस घटना से गुलाम नबी के परिजनों एवं ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी रोष है। उनका कहना है कि हर बार मक्की के मौसम में रीछ हमलों में गांव के दर्जनों लोग ऐसे ही घायल हो जाते हैं। परंतु विभाग की तरफ से कुछ भी नहीं किया जाता। गांव में रीछ देखे जाने के बाद बार बार बुलाने पर भी विभाग का कोई अधिकारी नहीं आता। और न ही रीछ को भगाने के लिए पटाखे, आदि उपलब्ध कराए जाते हैं। यहां तक कि रीछ हमलों के बाद पुंछ या जम्मू के अस्पतालों में महीनों जिंदगी और मौत से जूझने वाले घायलों को सरकारी सहायता तक प्रदान नहीं की जाती है।
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