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नियंत्रण रेखा पर अंतिम गांव फकीरदरा में सामुदायिक एवं निजी बंकर बन कर तैयार
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पुंछ। जिले में भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के करमाड़ा सेक्टर के अंतिम गांव फकीरदरा में कई सामुदायिक और निजी बंकर बन कर तैयार हो जाने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि केंद्र ने जो वादा किया था उसे पूरा कर दिया है। अब पाकिस्तानी सेना की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी से उनका परिवार सुरक्षित रहेगा।
मोहम्मद मजीद, मोहम्मद हनीफ, सुलतान अहमद ने बताया कि यहां बनाए गए बंकर काफी मजबूत है। इनका स्लैब करीब डेढ़ फीट मोटा है। इसके ऊपर पालीथिन की तिरपाल बिछाने के साथ ही उसके ऊपर तीन फीट मिट्टी डाल कर इसमें घास आदि उगा दी गई है। उस पर सीधे तौर पर पाकिस्तानी गोला गिरने से भी कोई नुकसान नहीं होगा। ग्रामीणों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से लगातार गांव को निशाना बना कर भारी गोलाबारी की जाती है। इसके चलते गांव के कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लोगों के घरों का बुरा हाल हो गया है। अब बंकरों का निर्माण कार्य पूरा हो जाने से हमें अपनी जान बच जाने की पूरी आस हो गई है वर्ना पहले हर समय गोलाबारी में जान जाने का डर बना रहता था। अब जैसे ही गोलाबारी शुरू होती है तो सभी इन बंकरों में शरण ले लेते हैं।
370 हटाने के बाद लगार गोलाबारी
ग्रामीणों का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्तान हर दिन गांव में गोलाबारी कर रहा है। उनकी एक ही मांग है कि नियंत्रण रेखा के आसपास के जिन क्षेत्रों में अभी बंकर पूरी तरह नहीं बन पाए हैं उन्हें जल्द तैयार किया जाए। बंकर बन कर तैयार होने से खुश ग्रामीण प्रधानमंत्री समेत केंद्र सरकार का धन्यवाद अदा करते नहीं थकते है। जो घर पाकिस्तानी चौकियों के एक दम सामने हैं वहां के ग्रामीण तो रात होते ही बंकरों में आश्रय ले लेते हैं। सुबह उजाला होने के बाद उनसे बाहर निकलते हैं। गौरतलब है कि गांव करमाड़ा में बनाए गए सामुदायिक बंकरों में दो भूमिगत बडे़ कमरे बनाए गए हैं जिनमें एक महिलाओं के लिए दूसरा पुरुषों के लिए बनाया गया है। इसके अलावा बंकर के मुख्यद्वार के साथ शौचालय का भी निर्माण किया गया है। निजी बंकरों में एक ही भूमिगत कमरे का निर्माण कराया गया है।
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मोहम्मद मजीद, मोहम्मद हनीफ, सुलतान अहमद ने बताया कि यहां बनाए गए बंकर काफी मजबूत है। इनका स्लैब करीब डेढ़ फीट मोटा है। इसके ऊपर पालीथिन की तिरपाल बिछाने के साथ ही उसके ऊपर तीन फीट मिट्टी डाल कर इसमें घास आदि उगा दी गई है। उस पर सीधे तौर पर पाकिस्तानी गोला गिरने से भी कोई नुकसान नहीं होगा। ग्रामीणों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से लगातार गांव को निशाना बना कर भारी गोलाबारी की जाती है। इसके चलते गांव के कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लोगों के घरों का बुरा हाल हो गया है। अब बंकरों का निर्माण कार्य पूरा हो जाने से हमें अपनी जान बच जाने की पूरी आस हो गई है वर्ना पहले हर समय गोलाबारी में जान जाने का डर बना रहता था। अब जैसे ही गोलाबारी शुरू होती है तो सभी इन बंकरों में शरण ले लेते हैं।
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370 हटाने के बाद लगार गोलाबारी
ग्रामीणों का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्तान हर दिन गांव में गोलाबारी कर रहा है। उनकी एक ही मांग है कि नियंत्रण रेखा के आसपास के जिन क्षेत्रों में अभी बंकर पूरी तरह नहीं बन पाए हैं उन्हें जल्द तैयार किया जाए। बंकर बन कर तैयार होने से खुश ग्रामीण प्रधानमंत्री समेत केंद्र सरकार का धन्यवाद अदा करते नहीं थकते है। जो घर पाकिस्तानी चौकियों के एक दम सामने हैं वहां के ग्रामीण तो रात होते ही बंकरों में आश्रय ले लेते हैं। सुबह उजाला होने के बाद उनसे बाहर निकलते हैं। गौरतलब है कि गांव करमाड़ा में बनाए गए सामुदायिक बंकरों में दो भूमिगत बडे़ कमरे बनाए गए हैं जिनमें एक महिलाओं के लिए दूसरा पुरुषों के लिए बनाया गया है। इसके अलावा बंकर के मुख्यद्वार के साथ शौचालय का भी निर्माण किया गया है। निजी बंकरों में एक ही भूमिगत कमरे का निर्माण कराया गया है।
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