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Poonch News: बफलियाज ब्लाक के लोगों ने मुगलरोड पर ट्रामा सैन्टर बनाने की मांग की
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पुंछ। सुरनकोट के बफलियाज ब्लॉक के मुगलरोड पर स्थित गांव मुगलमाड़ा, खोखर माड़ा एवं सैलां के ग्रामीणों ने मुगलरोड पर ट्रॉमा अस्पताल बनाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी घोषणाओं के वर्षों बाद भी मुगलरोड पर ट्रॉमा अस्पताल नहीं बनाया गया है। इसके कारण इस मार्ग पर होने वाले सड़क हादसों में घायल को तत्काल उपचार उपलब्ध नहीं हो पाता है। इसके कारण अधिकतर की मौत हो जाती है।
गांव मुगलमाड़ा पूर्व सरपंच खालिद मुगल और खोखर माड़ा के पूर्व सरपंच मोहम्मद कासिम ने कहा कि अगर मुगलरोड पर ट्रॉमा अस्पताल हो तो यहां हादसों में लोगों की जाने बचाई जा सकती है। साथ ही क्षेत्र के ग्रामीणों को भी देर सबेर बीमार होने वाले लोगों अथवा गर्भवती को समय पर उपचार उपलब्ध हो सकता है। इनका कहना है कि हम केंद्र सरकार विशेष कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराज्यपाल से मुगलरोड पर चंडीमाडा अथवा सैलां में जल्दी से ट्रॉमा अस्पताल बनाने की अपील करते हैं। साथ ही मार्ग पर जगह-जगह प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्थापित करने और हर दस किलोमीटर की दूरी पर एंबुलेंस तैनात करने और सुरनकोट उपजिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार करने की मांग करते है। ग्रामीणों का कहना है कि मुगलरोड पर जब यातायात बहाल रहता है तो न सिर्फ पुंछ एवं राजोरी जिलों के लोग इस मार्ग पर आने जाने को प्राथमिकता देते हैं, बल्कि जम्मू और श्रीनगर के बीच भी वाहनों की आवाजाही का मुख्य तौर पर इसी मार्ग का प्रयोग किया जाता। इससे हादसों में बढ़ोतरी होने की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में ट्रॉमा अस्पताल होना बहुत जरूरी है।
खालिद मुगल ने कहा कि मुगलरोड पर पुंछ जिले में डोगरेयां से पीर की गली तक सबसे अधिक सड़क हादसे पेश आते हैं। इस क्षेत्र में एक प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तक नहीं है, जिसके कारण सड़क हादसे के घायलों को सुरनकोट पहुंचाने तक कई घंटे लग जाते हैं। सुरनकोट में भी उचित स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के कारण घायलों को जम्मू अथवा श्रीनगर रेफर किया जाता है। वह बीच रास्ते में दम तोड़ देते है। मुगलरोड पर ट्रॉमा सेंटर बनाने की राज्य की पूर्व सरकारों द्वारा कई बार घोषणाएं किए जाने के बाद भी आज तक कोई काम नहीं हो पाया है। अब जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद उपराज्यपाल प्रशासन द्वारा भी ट्रॉमा अस्पताल मंजूर किए जाने की घोषणा की गई थी। इसलिए हमारी मांग है कि ट्रॉमा अस्पताल मुगलरोड पर सैलां से चंडीमाडा के बीच में किसी स्थान पर जल्दी बनाया जाए।
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गांव मुगलमाड़ा पूर्व सरपंच खालिद मुगल और खोखर माड़ा के पूर्व सरपंच मोहम्मद कासिम ने कहा कि अगर मुगलरोड पर ट्रॉमा अस्पताल हो तो यहां हादसों में लोगों की जाने बचाई जा सकती है। साथ ही क्षेत्र के ग्रामीणों को भी देर सबेर बीमार होने वाले लोगों अथवा गर्भवती को समय पर उपचार उपलब्ध हो सकता है। इनका कहना है कि हम केंद्र सरकार विशेष कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराज्यपाल से मुगलरोड पर चंडीमाडा अथवा सैलां में जल्दी से ट्रॉमा अस्पताल बनाने की अपील करते हैं। साथ ही मार्ग पर जगह-जगह प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्थापित करने और हर दस किलोमीटर की दूरी पर एंबुलेंस तैनात करने और सुरनकोट उपजिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार करने की मांग करते है। ग्रामीणों का कहना है कि मुगलरोड पर जब यातायात बहाल रहता है तो न सिर्फ पुंछ एवं राजोरी जिलों के लोग इस मार्ग पर आने जाने को प्राथमिकता देते हैं, बल्कि जम्मू और श्रीनगर के बीच भी वाहनों की आवाजाही का मुख्य तौर पर इसी मार्ग का प्रयोग किया जाता। इससे हादसों में बढ़ोतरी होने की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में ट्रॉमा अस्पताल होना बहुत जरूरी है।
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खालिद मुगल ने कहा कि मुगलरोड पर पुंछ जिले में डोगरेयां से पीर की गली तक सबसे अधिक सड़क हादसे पेश आते हैं। इस क्षेत्र में एक प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तक नहीं है, जिसके कारण सड़क हादसे के घायलों को सुरनकोट पहुंचाने तक कई घंटे लग जाते हैं। सुरनकोट में भी उचित स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के कारण घायलों को जम्मू अथवा श्रीनगर रेफर किया जाता है। वह बीच रास्ते में दम तोड़ देते है। मुगलरोड पर ट्रॉमा सेंटर बनाने की राज्य की पूर्व सरकारों द्वारा कई बार घोषणाएं किए जाने के बाद भी आज तक कोई काम नहीं हो पाया है। अब जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद उपराज्यपाल प्रशासन द्वारा भी ट्रॉमा अस्पताल मंजूर किए जाने की घोषणा की गई थी। इसलिए हमारी मांग है कि ट्रॉमा अस्पताल मुगलरोड पर सैलां से चंडीमाडा के बीच में किसी स्थान पर जल्दी बनाया जाए।
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