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कच्ची सड़क से आवाजाही करने को मजबूर हैं ग्रामीण
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पुंछ। जिले में भारत-पाक नियंत्रण रेखा से सटे इस्लामाबाद गांव में ग्रामीण कच्ची सड़क से आवाजाही करने को मजबूर हैं। इससे सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। स्कूल के शिक्षकों को वाहन होने के बावजूद करीब ढाई-तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
चौधरी अब्दुल गनी, गुलजार अहमद, समीना बी, मकबूल अहमद आदि का कहना था कि कड़े प्रयास से करीब एक दशक पहले गांव के लिए पुंछ साईंमीरा जियारत सड़क से गांव इस्लामाबाद के लिए संपर्क सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इसमें सड़क की कटाई करने के बाद अब तक आगे का कोई काम नहीं हो पाया है। इससे हर दिन लोगों को कई किलोमीटर पैदल चल कर आना-जाना पड़ता है। इस बारे में कई बार जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को बताया गया लेकिन सड़क पर काम कुछ नहीं हुआ है। ऐसे में हम लोगाें को सबसे अधिक परेशानियां वर्षा के दिनों में उठानी पड़ती हैं, जब यह कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है। हम लोगों का उस पर चलना भी कठिन हो जाता है। ऐसे में हम एक बार फिर जिला प्रशासन से गांव की सड़क पर तारकोल बिछाने की मांग करते हैं। अगर अब हमारी मांग को अनदेखा किया गया तो हमें मजबूरी में आंदोलन का रास्ता पकड़ना पड़ेगा।
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चौधरी अब्दुल गनी, गुलजार अहमद, समीना बी, मकबूल अहमद आदि का कहना था कि कड़े प्रयास से करीब एक दशक पहले गांव के लिए पुंछ साईंमीरा जियारत सड़क से गांव इस्लामाबाद के लिए संपर्क सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इसमें सड़क की कटाई करने के बाद अब तक आगे का कोई काम नहीं हो पाया है। इससे हर दिन लोगों को कई किलोमीटर पैदल चल कर आना-जाना पड़ता है। इस बारे में कई बार जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को बताया गया लेकिन सड़क पर काम कुछ नहीं हुआ है। ऐसे में हम लोगाें को सबसे अधिक परेशानियां वर्षा के दिनों में उठानी पड़ती हैं, जब यह कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है। हम लोगों का उस पर चलना भी कठिन हो जाता है। ऐसे में हम एक बार फिर जिला प्रशासन से गांव की सड़क पर तारकोल बिछाने की मांग करते हैं। अगर अब हमारी मांग को अनदेखा किया गया तो हमें मजबूरी में आंदोलन का रास्ता पकड़ना पड़ेगा।
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