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आतंकवाद पीड़ितों को 5 साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा
अमर उजाला
Updated Mon, 30 Sep 2013 04:03 PM IST
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जम्मू कश्मीर के सांबा में ही पांच साल पहले हुए आतंकी हमले के पीड़ितों को अब तक इंसाफ की दरकार है। सरकार अब तक इन पीड़ितों को मुआवजा नहीं दे पाई है। अब हीरानगर में ताजा आतंकी हमले में मारे गए दो नागरिकों के आश्रितों के लिए भी सरकार ने अब तक किसी मुआवजे की घोषणा नहीं की है।
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सांबा में ही 11 मई 2008 को आतंकियों ने एक घर में घुसकर कई नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था। इस हमले में अपने माता-पिता खो चुके लोक सेवक को सरकार की तरफ से कोई राहत नहीं मिल पाई है।
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पांच साल गुजरने के बाद भी कोई मुआवजा नहीं मिल पाया। अब यही आशंका 26 सितंबर को हुए आतंकी हमले में मारे गए नागरिकों के लिए भी जताई जा रही है।
मुआवजा देने में भी सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए लोक सेवक ने कहा उन्हें अभी तक मुआवजे की रकम नहीं मिली। केंद्र सरकार ने 1 मार्च 2008 को आतंकवाद पीड़ितों को मुआवजा देने की योजना में बदलाव किया।
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मृतक के परिवार को पांच लाख रुपए देने का प्रावधान रखा। पहले आश्रितों को एक लाख रुपए और नौकरी देने का प्रावधान था।
सरकार की तरफ से मृतकों के आश्रितों के लिए 16 लाख रुपए भी आए। उसे खर्च भी कर दिया, लेकिन खर्च कहां किया, नहीं पता चला और उन्हें मुआवजा भी नहीं दिया गया।
घाटी में आतंकवाद पीड़ितों के परिवार को तुरंत मुआवजा जारी किया जाता है और जम्मू में इसमें भी भेदभाव किए जाने का आरोप भी लगाया गया।