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Kathua News: शहरी इलाकों में पानी की व्यवस्था दुरुस्त, ग्रामीणों के लिए नहीं इंतजाम
Sun, 23 Mar 2025 01:06 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 23 Mar 2025 01:06 AM IST
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जलशक्ति विभाग के कर्मी मांगों को लेकर कठुआ में प्रदर्शन करते अस्थायी कर्मचारी। संवाद
- फोटो : kathua
अस्थायी कर्मियों ने कार्यकारी अभियंता कार्यालय में किया प्रदर्शन, 30 फीसदी बढ़ी निजी टैंकरों से पानी की मांग
कठुआ। नियमित किए जाने के साथ अन्य लंबित मांगों को लेकर गत वीरवार से शुरू हुई जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों की हड़ताल जारी है। शनिवार को विभाग कार्यकारी अभियंता कार्यालय में जमा हुए कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते जम्मू-कश्मीर की अब तक की सरकारों पर उसका शोषण करने का आरोप लगाया है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेता शक्ति सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जब चुनाव आते हैं तो राजनीतिक पार्टियों को अस्थायी कर्मियों की संख्या का पता चल जाता है, लेकिन जब उन्हें उनका हक देने की बात आती है तब सरकार इनकी संख्या का पता लगाने के लिए विभाग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहती है। जयदेव ने कहा कि दशकों से हर मौसम में दिनरात सेवाएं देने वाले अस्थायी कर्मचारियों को देने के लिए सरकार के पास न वेतन है और न नियमित किए जाने के लिए कोई प्रावधान बनाया गया।
बता दें कि अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल से निपटने के लिए जहां शहरी इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्था कर विभाग जैसे तैसे पानी की सप्लाई को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। मगर ग्रामीण इलाकों में ऐसी व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है। इससे वहां जलसंकट गहराने लगा है। पेयजल के लिए लोग विभागीय लाइन पर निर्भर हैं, मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गई हैं। संवाद
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कठुआ। नियमित किए जाने के साथ अन्य लंबित मांगों को लेकर गत वीरवार से शुरू हुई जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों की हड़ताल जारी है। शनिवार को विभाग कार्यकारी अभियंता कार्यालय में जमा हुए कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते जम्मू-कश्मीर की अब तक की सरकारों पर उसका शोषण करने का आरोप लगाया है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेता शक्ति सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जब चुनाव आते हैं तो राजनीतिक पार्टियों को अस्थायी कर्मियों की संख्या का पता चल जाता है, लेकिन जब उन्हें उनका हक देने की बात आती है तब सरकार इनकी संख्या का पता लगाने के लिए विभाग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहती है। जयदेव ने कहा कि दशकों से हर मौसम में दिनरात सेवाएं देने वाले अस्थायी कर्मचारियों को देने के लिए सरकार के पास न वेतन है और न नियमित किए जाने के लिए कोई प्रावधान बनाया गया।
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बता दें कि अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल से निपटने के लिए जहां शहरी इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्था कर विभाग जैसे तैसे पानी की सप्लाई को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। मगर ग्रामीण इलाकों में ऐसी व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है। इससे वहां जलसंकट गहराने लगा है। पेयजल के लिए लोग विभागीय लाइन पर निर्भर हैं, मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गई हैं। संवाद
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