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रंजीत सागर झील में अगले साल मार्च तक शुरू हो जाएंगे वाटर स्पोर्ट्स
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कठुआ/बसोहली। रंजीत सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स सेंटर का वीरवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ई-नींव पत्थर रखा। कहा कि इसे मार्च 2022 तक पूरा किया जाएगा। तीन करोड़ की लागत से इस परियोजना से बसोहली इलाका जल क्रीड़ाओं में राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने को तैयार होगा। उन्होंने बसोहली में चूड़ामणि संस्कृत संस्थान के नए भवन का शिलान्यास किया। बसोहली आर्ट गैलरी का नामकरण साहकी के रूप में किया। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के विकास कार्यों के अलावा दिव्यांग सहायक पहल का शुभारंभ किया। यह विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कृत्रिम सहायता प्रदान करने की पहल है।
उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में वाटर स्पोर्ट्स ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण विकास देखा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की है। रंजीत सागर झील में खेल केंद्र युवा लड़कों और लड़कियों को विभिन्न खेल विषयों में पर्याप्त अवसर प्रदान करेगा। इसके अलावा स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।
उपराज्यपाल ने कहा कि बनारस की तरह जम्मू-कश्मीर हमेशा ही संस्कृत के उत्थान के लिए एक बड़ा केंद्र रहा है। हमारी यह संयुक्त जिम्मेदारी बनती है कि हम इसके इतिहास को और बेहतर करें, उसका नवीनीकरण करें। हमारे जो सामाजिक मूल्य हैं, उनको बचाने, और उन्हें बढ़ावा देने के लिए जो अवसर पैदा करने हैं, वह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। कहा कि संस्कृत ही वह भाषा है जिसने न केवल क्षेत्रों के बीच एकता स्थापित की है, बल्कि गुरु व विधा के बीच मजबूत संबंध भी बनाए रका है। संस्कृत के महत्व को अल्बर्ट आइंस्टीन व मैक्स मूलर ने भी स्थापित किया है। यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि आधुनिक जरूरतों के अनुसार स्कूलों में संस्कृत पढ़ाया जाए। नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुरूप केंद्र शासित प्रदेश संस्कृत के बढ़ावा के लिए प्रयासरत है। इसके लिए अभिनव गुप्त संस्थान भी स्थापित किया जाएगा।
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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ला ने विश्व स्थली के रूप में बसोहली की पहचान को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो कभी संस्कृत सीखने और भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए उत्कृष्टता का केंद्र था। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने उन लोगों को भी सम्मानित किया जो बसोहली कला और संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
डिग्री कालेज का उद्घाटन व अन्य योजनाएं भी की शुरू
उपराज्यपाल ने 8.76 करोड़ रुपये की लागत से तैयार राजकीय डिग्री कॉलेज बनी का ई-उद्घाटन किया। इसके अलावा 8.39 करोड़ रुपये की लागत से पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र की योजनाओं का शुभारंभ किया।
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उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में वाटर स्पोर्ट्स ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण विकास देखा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की है। रंजीत सागर झील में खेल केंद्र युवा लड़कों और लड़कियों को विभिन्न खेल विषयों में पर्याप्त अवसर प्रदान करेगा। इसके अलावा स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।
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उपराज्यपाल ने कहा कि बनारस की तरह जम्मू-कश्मीर हमेशा ही संस्कृत के उत्थान के लिए एक बड़ा केंद्र रहा है। हमारी यह संयुक्त जिम्मेदारी बनती है कि हम इसके इतिहास को और बेहतर करें, उसका नवीनीकरण करें। हमारे जो सामाजिक मूल्य हैं, उनको बचाने, और उन्हें बढ़ावा देने के लिए जो अवसर पैदा करने हैं, वह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। कहा कि संस्कृत ही वह भाषा है जिसने न केवल क्षेत्रों के बीच एकता स्थापित की है, बल्कि गुरु व विधा के बीच मजबूत संबंध भी बनाए रका है। संस्कृत के महत्व को अल्बर्ट आइंस्टीन व मैक्स मूलर ने भी स्थापित किया है। यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि आधुनिक जरूरतों के अनुसार स्कूलों में संस्कृत पढ़ाया जाए। नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुरूप केंद्र शासित प्रदेश संस्कृत के बढ़ावा के लिए प्रयासरत है। इसके लिए अभिनव गुप्त संस्थान भी स्थापित किया जाएगा।
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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ला ने विश्व स्थली के रूप में बसोहली की पहचान को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो कभी संस्कृत सीखने और भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए उत्कृष्टता का केंद्र था। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने उन लोगों को भी सम्मानित किया जो बसोहली कला और संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
डिग्री कालेज का उद्घाटन व अन्य योजनाएं भी की शुरू
उपराज्यपाल ने 8.76 करोड़ रुपये की लागत से तैयार राजकीय डिग्री कॉलेज बनी का ई-उद्घाटन किया। इसके अलावा 8.39 करोड़ रुपये की लागत से पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र की योजनाओं का शुभारंभ किया।