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Kathua News: मशरूम उत्पादक से उद्यमी बनकर विमला ने पाया मुकाम
Tue, 29 Apr 2025 01:02 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 29 Apr 2025 01:02 AM IST
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मशरूम उद्यमी बल्लन पाईं निवासी विमला देवी। स्रोत : परिजन
- फोटो : kathua
- परंपरागत कृषक परिवार की गृहिणी से बनी मशरूम उद्यमी
- मशरूम उद्यम से जुड़कर 15 लाख रुपये सालाना कर रही है आमदनी
कठुआ। छन्न अरोड़ियां से सटे गांव बल्लन पाईं की रहने वाली विमला रानी गृहिणी से मशरूम उद्यमी बनकर उभरी हैं। मौजूदा समय में इस व्यवसाय को अपनाकर हर साल 15 लाख रुपये अर्जित कर रही है। इसके अलावा अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर सशक्त भी बना रही हैं।
60 वर्षीय विमला देवी ने बताया कि सामान्य कृषक परिवार से ताल्लुक होने के कारण 20 साल पहले इलाके में गेहूं की बिजाई होने के बाद सामान्य तौर पर किसानों के पास कोई काम नहीं होता था। ऐसे में कृषि विभाग ने उन्हें मशरूम की खेती करने के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में मशरूम की खेती से एक सीजन में 60 से 70 हजार रुपये की आमदनी होती थी। मगर 10 साल पहले उन्होंने रोजगार को आगे बढ़ाते हुए कृषि विभाग के सहयोग से 15 मीट्रिक टन पास्चुराइज्ड कंपोस्ट निर्माण यूनिट स्थापित किया। इसके लिए उन्हें 15 लाख की सब्सिडी मिली। इस तकनीक ने पूरे साल मशरूम उत्पादन को मुमकिन बनाया और क्षेत्र में खेती को एक नई दिशा दी। आज वह रोजगार के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। महिलाओं को भी सशक्त बनाने के लिए हर साल 27 से 30 महिलाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर प्रदान करवा रही है। उन्होंने बताया कि हर साल करीब 45 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर रही है। इस नए उद्यम को अपनाकर उनकी सालाना आय 15 लाख तक पहुंच गई है। विमला ने बताया कि अब वह अपने उत्पादन को बढ़ाने और नए बाजारों की खोज करने की योजना बना रही है। संवाद
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- मशरूम उद्यम से जुड़कर 15 लाख रुपये सालाना कर रही है आमदनी
कठुआ। छन्न अरोड़ियां से सटे गांव बल्लन पाईं की रहने वाली विमला रानी गृहिणी से मशरूम उद्यमी बनकर उभरी हैं। मौजूदा समय में इस व्यवसाय को अपनाकर हर साल 15 लाख रुपये अर्जित कर रही है। इसके अलावा अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर सशक्त भी बना रही हैं।
60 वर्षीय विमला देवी ने बताया कि सामान्य कृषक परिवार से ताल्लुक होने के कारण 20 साल पहले इलाके में गेहूं की बिजाई होने के बाद सामान्य तौर पर किसानों के पास कोई काम नहीं होता था। ऐसे में कृषि विभाग ने उन्हें मशरूम की खेती करने के लिए प्रेरित किया।
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शुरुआत में मशरूम की खेती से एक सीजन में 60 से 70 हजार रुपये की आमदनी होती थी। मगर 10 साल पहले उन्होंने रोजगार को आगे बढ़ाते हुए कृषि विभाग के सहयोग से 15 मीट्रिक टन पास्चुराइज्ड कंपोस्ट निर्माण यूनिट स्थापित किया। इसके लिए उन्हें 15 लाख की सब्सिडी मिली। इस तकनीक ने पूरे साल मशरूम उत्पादन को मुमकिन बनाया और क्षेत्र में खेती को एक नई दिशा दी। आज वह रोजगार के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। महिलाओं को भी सशक्त बनाने के लिए हर साल 27 से 30 महिलाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर प्रदान करवा रही है। उन्होंने बताया कि हर साल करीब 45 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर रही है। इस नए उद्यम को अपनाकर उनकी सालाना आय 15 लाख तक पहुंच गई है। विमला ने बताया कि अब वह अपने उत्पादन को बढ़ाने और नए बाजारों की खोज करने की योजना बना रही है। संवाद
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