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फिर सवालों के घेरे में शिक्षकों की तबादला नीति
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कठुआ। जिले में दो-दो मुख्य शिक्षा अधिकारियों की कुर्सी निगलने वाली तबादला नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार भी तबादलों की सूची जारी होते ही प्रदर्शनों और रोष का सिलसिला शुरू हो गया है।
विवाद हमेशा विभाग को इसलिए घेर लेते हैं, क्योंकि रसूखदार कर्मचारियों के तबादले जहां कुछ ही वर्षों में उनके मनचाहे स्थानों पर कर दिए जाते हैं, वहीं कई चहेतों को विभाग सात-सात साल बाद भी नई पोस्टिंग देना भूल चुका है। इसी बीच इतनी ही अवधि से दूर दराज इलाकों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों को पूछने वाला भी कोई नहीं है। हाल ही में शिक्षा विभाग की ओर से जिला स्तर पर किए गए तबादलों और एडजस्टमेंट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। जिसके बाद शिक्षक वर्ग और खासकर शिक्षक संघों में भारी रोष व्याप्त है।
शुक्रवार को जहां मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर जम्मू कश्मीर टीचर्स फोरम के सदस्यों ने प्रदर्शन कर, इन तबादलों पर पुनर्विचार की मांग की गई थी, वहीं जिले के दूर दराज बनी सब डिवीजन में भी शिक्षकों ने धरना देने के बाद एसडीएम बनी को ज्ञापन सौंपा है।
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शिक्षक नरेंद्र कुमार ने बताया कि एक जुलाई को शिक्षकों की तबादला सूची जारी की गई। सूची में कुछ ऐसे शिक्षक थे, जो 2013 के बाद पहली बार स्थानांतरित किए गए। लेकिन, वार्षिक तबादला नीति को दरकिनार किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य, शादी, सुरक्षा, स्पाउस्ड पोस्टिंग और पांचवीं प्राथमिकता हार्ड जोन और दूरदराज इलाके वालों को दिए जाने चाहिए थे। सबसे ज्यादा भेदभाव हार्ड जोन और मैच्योर पोस्टिंग वालों के साथ किया गया है।
उन्होंने बताया कि बनी जोन में 155 शिक्षक पांच साल की अवधि एक ही जगह पर पूरा कर चुके थे। शिक्षा सचिव ने जनवरी में वार्षिक तबादलों का आदेश जारी किया था। सचिवालय से जोनल शिक्षा अधिकारी, लेक्चरर, आदि के तबादले किए गए जिनमें आदेश का पूरा पालन हुआ। लेकिन, इससे निचले स्तर पर हुए तबादलों को लेकर डोडा, उधमपुर और कठुआ में प्रदर्शन हो रहे हैं। जो सूचियां तैयार होती हैं, उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। जोनल शिक्षा अधिकारियों से पूछे बिना ही सूची तैयार कर दी जाती है।
नरेंद्र ने कहा कि कठुआ के कार्यालय में बैठे लोगों को कैसे पता होगा कि गुट्टू, मंदरेरा, भंडार कहां हैं? क्षेत्र में कई शिक्षकों का 2016 में नियुक्ति के बाद एक बार भी तबादला नहीं हुआ। जोनल शिक्षा अधिकारी से प्रपोजल गया ही नहीं और सूची में कठुआ कार्यालय में बैठकर ही तबादले कर दिए गए हैं। जो कतई मंजूर नहीं हैं। शिक्षकों की मांग सूचियों को रद्द करने की नहीं, बल्कि रिव्यू किए जाने की है। ताकि, कई वर्षों से तबादलों का इंतजार कर रहे शिक्षकों के साथ अन्याय न हो।
उधर, जम्मू कश्मीर टीचर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से भी रोष प्रकट कर रहे शिक्षकों की मांग को समर्थन दिया गया है। रोष प्रकट करने वालों में संजय कुमार, मदन लाल, सुशील संजान, संजेश लल्हाल, धनी राम, जेरम सिंह, क्रांति लल्हाल, राकेश कुमार, सुभाष चंद्र और मुनीष कुमार, आदि शामिल रहे।
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विवाद हमेशा विभाग को इसलिए घेर लेते हैं, क्योंकि रसूखदार कर्मचारियों के तबादले जहां कुछ ही वर्षों में उनके मनचाहे स्थानों पर कर दिए जाते हैं, वहीं कई चहेतों को विभाग सात-सात साल बाद भी नई पोस्टिंग देना भूल चुका है। इसी बीच इतनी ही अवधि से दूर दराज इलाकों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों को पूछने वाला भी कोई नहीं है। हाल ही में शिक्षा विभाग की ओर से जिला स्तर पर किए गए तबादलों और एडजस्टमेंट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। जिसके बाद शिक्षक वर्ग और खासकर शिक्षक संघों में भारी रोष व्याप्त है।
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शुक्रवार को जहां मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर जम्मू कश्मीर टीचर्स फोरम के सदस्यों ने प्रदर्शन कर, इन तबादलों पर पुनर्विचार की मांग की गई थी, वहीं जिले के दूर दराज बनी सब डिवीजन में भी शिक्षकों ने धरना देने के बाद एसडीएम बनी को ज्ञापन सौंपा है।
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शिक्षक नरेंद्र कुमार ने बताया कि एक जुलाई को शिक्षकों की तबादला सूची जारी की गई। सूची में कुछ ऐसे शिक्षक थे, जो 2013 के बाद पहली बार स्थानांतरित किए गए। लेकिन, वार्षिक तबादला नीति को दरकिनार किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य, शादी, सुरक्षा, स्पाउस्ड पोस्टिंग और पांचवीं प्राथमिकता हार्ड जोन और दूरदराज इलाके वालों को दिए जाने चाहिए थे। सबसे ज्यादा भेदभाव हार्ड जोन और मैच्योर पोस्टिंग वालों के साथ किया गया है।
उन्होंने बताया कि बनी जोन में 155 शिक्षक पांच साल की अवधि एक ही जगह पर पूरा कर चुके थे। शिक्षा सचिव ने जनवरी में वार्षिक तबादलों का आदेश जारी किया था। सचिवालय से जोनल शिक्षा अधिकारी, लेक्चरर, आदि के तबादले किए गए जिनमें आदेश का पूरा पालन हुआ। लेकिन, इससे निचले स्तर पर हुए तबादलों को लेकर डोडा, उधमपुर और कठुआ में प्रदर्शन हो रहे हैं। जो सूचियां तैयार होती हैं, उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। जोनल शिक्षा अधिकारियों से पूछे बिना ही सूची तैयार कर दी जाती है।
नरेंद्र ने कहा कि कठुआ के कार्यालय में बैठे लोगों को कैसे पता होगा कि गुट्टू, मंदरेरा, भंडार कहां हैं? क्षेत्र में कई शिक्षकों का 2016 में नियुक्ति के बाद एक बार भी तबादला नहीं हुआ। जोनल शिक्षा अधिकारी से प्रपोजल गया ही नहीं और सूची में कठुआ कार्यालय में बैठकर ही तबादले कर दिए गए हैं। जो कतई मंजूर नहीं हैं। शिक्षकों की मांग सूचियों को रद्द करने की नहीं, बल्कि रिव्यू किए जाने की है। ताकि, कई वर्षों से तबादलों का इंतजार कर रहे शिक्षकों के साथ अन्याय न हो।
उधर, जम्मू कश्मीर टीचर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से भी रोष प्रकट कर रहे शिक्षकों की मांग को समर्थन दिया गया है। रोष प्रकट करने वालों में संजय कुमार, मदन लाल, सुशील संजान, संजेश लल्हाल, धनी राम, जेरम सिंह, क्रांति लल्हाल, राकेश कुमार, सुभाष चंद्र और मुनीष कुमार, आदि शामिल रहे।