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पशुओं को जिले के भीतर भी लाने ले जाने पर लगी रोक
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कठुआ। पशुओं में लंपी बीमारी तेजी से फैलने लगी है। जिले में भले ही मामलों की आधिकारिक पुष्टि न हुई हो लेकिन संदिग्ध लक्षणों के बाद पशुओं की मौत के सिलसिले ने बीमारी की ओर साफ इशारा कर दिया है। जिले में लंपी के संदिग्ध संक्रमित 2686 पशु रिपोर्ट हो चुके हैं जबकि पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीन पशुओं की मौत भी हो चुकी है। इनमें से दो पशु मढ़ीन और डिंगा अंब इलाके से थे। प्रशासन ने लगातार बढ़ रहे मामलों और इसके और फैलने की आशंका को देखते हुए पशुओं के जिले के भीतर और बाहर लाने और ले जाने पर रोक लगा दी है।
जिला मजिस्ट्रेट कठुुआ राहुल पांडेय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुओं को एक-दूसरे जिले व राज्यों से लाने व ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ-साथ पशुओं को जिले के भीतर भी लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी गई। पुलिस को भी हिदायत दी गई है कि नाकों के दौरान पशुओं के लाने ले जाने के मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
दरसअल, सितंबर महीने के आगाज के साथ ही गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोगों को पहाड़ी इलाकों से मैदानों को लौटने का सिलसिला तेज हो जाएगा। सर्दियों की दस्तक से पहले यह डेरे मैदानों तक हर साल कूच करते हैं। इनके साथ हजारों की तादाद में मवेशियों के झुंड भी चलते हैं। ऐसे में संक्रमित मवेशियों के संपर्क में आने से अन्य मवेशियों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसे देखते हुए पशुपालन विभाग भी दूर दराज इलाकों में कैंप कर पशु पालकों और खाना बदोशों को समझाने में जुट गया है।
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जिला मजिस्ट्रेट कठुुआ राहुल पांडेय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुओं को एक-दूसरे जिले व राज्यों से लाने व ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ-साथ पशुओं को जिले के भीतर भी लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी गई। पुलिस को भी हिदायत दी गई है कि नाकों के दौरान पशुओं के लाने ले जाने के मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
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दरसअल, सितंबर महीने के आगाज के साथ ही गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोगों को पहाड़ी इलाकों से मैदानों को लौटने का सिलसिला तेज हो जाएगा। सर्दियों की दस्तक से पहले यह डेरे मैदानों तक हर साल कूच करते हैं। इनके साथ हजारों की तादाद में मवेशियों के झुंड भी चलते हैं। ऐसे में संक्रमित मवेशियों के संपर्क में आने से अन्य मवेशियों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसे देखते हुए पशुपालन विभाग भी दूर दराज इलाकों में कैंप कर पशु पालकों और खाना बदोशों को समझाने में जुट गया है।
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