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Kathua News: लखनपुर पर मंडरा रहा रावी का खतरा, रुख बदल चुका है दरिया

Sun, 31 Aug 2025 01:04 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Sun, 31 Aug 2025 01:04 AM IST
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The danger of Ravi looms over Lakhanpur, the river has changed its direction
कठुआ। रावी दरिया का रौद्र रूप एक बार फिर तबाही लेकर आया है। पंजाब के पठानकोट स्थित माधोपुर बैराज और हेडवकर्स के फ्लडगेट न खुलने से रावी का जलप्रवाह जम्मू-कश्मीर के लखनपुर कस्बे की ओर मुड़ गया है। बुधवार को दो फ्लडगेट टूटने से एक चार्जमैन की मौत हो गई, जबकि दर्जनों गांव जलमग्न हो गए और सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि डूब गई।
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लखनपुर कस्बे की स्थिति बेहद गंभीर है। जहां दरिया का पानी कस्बे के बीचों बीच तक नहर के जरिए पहुंच चुका है। खराब मौसम के बीच बाढ़ के साए ने शनिवार को भी लोगों की नींद उड़ा रखी थी। रावी का रुख बदल चुका है। कब लखनपुर पर इसका कहर बरप जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में लखनपुर को बचाने के लिए जलस्तर कम होने के साथ ही रावी के तटबंध स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया है।
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सूत्रों के अनुसार बुधवार को माधोपुर बैराज के पास जल प्रवाह 4 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया, जबकि बांध से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। भारी सिल्ट, लाल मिट्टी और पत्थरों ने गेट्स को जाम कर दिया। विभागीय टीम द्वारा मैन्युअली गेट खोलने की कोशिश में दो गेट टूट गए और एक कर्मचारी बह गया। किसी तरह 60 लोगों को बचाया गया, लेकिन हैरत की बात है कि बाढ़ की रफ्तार बढ़ने के 12 घंटे पहले तक तीस फीसदी गेट भी नहीं खुल पाए थे। गेट्स की सपाट बनावट और तेज बहाव के कारण उन्हें खोलना बेहद मुश्किल हो गया है। मरम्मत कार्य तब तक संभव नहीं जब तक जल स्तर कम न हो। फिलहाल 40 से 60 हजार क्यूसेक पानी पाकिस्तान की ओर बह रहा है, लेकिन लखनपुर की दिशा में बहाव को रोकने की कोई तैयारी नहीं दिख रही है।
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1822 में महाराजा रंजीत सिंह द्वारा अमृतसर तक जल पहुंचाने के लिए बनाई गई नहर और 1872 में ब्रिटिश काल में बने हेडवकर्स के बाद 1955 में सिंधु जल संधि के तहत बैराज का निर्माण हुआ था, लेकिन दशकों से इन 54 फ्लडगेट्स का कोई उन्नयन नहीं हुआ। रंजीत सागर बांध बनने के बाद भी इन गेट्स की अनदेखी जारी रही। 1988 की विनाशकारी बाढ़ के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और इस बार हालात उससे भी बदतर हो गए हैं।

माधोपुर हेडवकर्स से निकलने वाली 5.26 किमी लंबी कश्मीर नहर, जो जम्मू-कश्मीर और पंजाब को सिंचाई जल देती है, वह भी प्रभावित हुई है। चकंदर फीडर और कठुआ नहर में 400 क्यूसेक डिस्चार्ज होता है, जबकि यूबीडीसी से अमृतसर, तरणतारन, गुरदासपुर, पठानकोट और राजस्थान तक जल आपूर्ति होती है। इस संकट से 70 पंजाब, 20 राजस्थान और 10 जम्मू-कश्मीर प्रभावित हो सकते हैं।
रावी के किनारे आबादी वाले इलाकों को बचाने के लिए तटबंध बनाए जाने और सुरक्षा उपायों की जरूरत है। मामला उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।


अबनीश कुमार, कार्यकारी अभियंता, बाढ़ नियंत्रण विभाग, कठुआ
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