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शाहपुर कंडी परियोजना से रियासत को हर वर्ष होगी करोड़ों की बचत
ब्यूरो,अमर उजाला/कठुआ
Updated Sun, 15 May 2016 01:44 AM IST
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केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय योजना घोषित की जा चुकी शाहपुर कंडी परियोजना का काम तो जम्मू-कश्मीर सरकार ने दो वर्ष पहले बंद करा दिया था, लेकिन इसके साथ ही किसानों की किस्मत को ताला लगा दिया था। पंजाब सरकार इस परियोजना के साथ रियासत के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी लेकर आई है, लेकिन इस पर अभी कुछ साफ नहीं हो पाया है।
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पंजाब और जम्मू-कश्मीर के लिए महत्वपूर्ण शाहपुर कंडी परियोजना वर्तमान में राजनीतिक डंक झेल रही है। पिछले वर्ष हुई बैठकों के बावजूद न तो राज्य सरकार के मंत्री इसमें रुचि दिखा रहे हैं और न ही सरकार। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पंजाब के जिन इलाकों को इसका लाभ मिलना तय है, लेकिन फिर भी मामला लटका हुआ है।
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जम्मू संभाग के एक बड़े इलाके की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण इस परियोजना के पूरा होने से रियासती सरकार को हर वर्ष बसंतपुर में पंपिंग स्टेशन पर खर्च किए जाने वाले चौदह करोड़ की राशि भी बचना तय है।
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यही नहीं, परियोजना को लेकर जम्मू-कश्मीर के हिस्से को जोड़ने वाली 2.3 किलोमीटर लंबी नहर बनाकर पंजाब सरकार रियासत की खर्च होने वाली राशि का भार उठाने को भी राजी है। इससे कंडी क्षेत्र में सिंचाई समस्या का समाधान भी तय है। शाहपुर कंडी परियोजना से प्रभावित होने वालों के पुनर्वास के साथ साथ उन्हें रोजगार के साधन भी मिलेेंगे। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब की इस परियोजना में पंद्रह फीसदी रोजगार मिलेगा।
सतवाईं परियोजना में थी पूर्व सरकार की रुचि : पूर्ववर्ती सरकार भी रंजीत सागर समझौते का ठीकरा पंजाब सरकार पर फोड़ती रही और अब भी ऐसा ही हो रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व सरकार के सिंचाई मंत्री चाहते थे कि 235 करोड़ से जम्मू-कश्मीर सतवाईं वाटर लिफ्टिंग परियोजना पर काम करे और पंजाब से दूरी बनाए रखे। इसे लागू कराने के लिए टेंडरिंग प्रक्रिया तक को शुरू कर दिया गया, लेकिन इस सबके पीछे भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया जा रहा था। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने सतवाईं परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
...तो पंजाब सरकार की आपत्ति तय थी : दरअसल, सतवाईं परियोजना में जम्मू-कश्मीर के हिस्से से पानी सीधा बांध से उठाकर रावी-तवी नहर में डालने पर काम शुरू किया जाना था। हालांकि, यदि ऐसा होता तो पंजाब सरकार की आपत्ति तय थी। उस पर मोटी रकम को खर्च कर योजना को अमल में लाया जा रहा था। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि जहां शाहपुर कंडी परियोजना से ग्रेविटी से सीधा पानी जम्मू-कश्मीर के हिस्से को मिलता, वहीं सतवाईं परियोजना में वाटर लिफ्टिंग पर भी करोड़ों की राशि खर्च होती। जम्मू-कश्मीर सरकार ने कैबिनेट में फैसला लेकर जिस तरह से शाहपुर कंडी परियोजना के काम को बंद कराया है, अब कैबिनेट बैठक के बाद यह काम दोबारा शुरू होगा। इसमें जरूरी है कि जम्मू संभाग के नुमाइंदे भी अपना दायित्व किसानों के प्रति निभाएं।