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15 वर्षों बाद भी नहीं सुधरी छन्न रंगा सड़क की हालत, लोग परेशान
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छन्न रंगा गांव की खस्ताहालत सड़क। - संवाद।
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। कंडी क्षेत्र के गांव छन्न रंगा और चंदवां पंचायत को जोड़ने वाली सड़क की खस्ता हालत लोगों के लिए दिक्कतें पैदा कर रही है। लोग 15 वर्षों से भी अधिक समय से इस सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
पिछले हफ्ते शनिवार को लोक शिकायत निवारण शिविर में विशेष तौर पर मौजूद उपायुक्त राहुल यादव के सामने भी लोगों ने सड़क की समस्या को रखा था। उपायुक्त ने अपने संबोधन के दौरान आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी। लेकिन, लोगों का कहना है कि इस तरह के आश्वासन उन्हें पिछले कई वर्षों से मिल रहे हैं। परंतु, समस्या का हल नहीं हो रहा है।
पंच बलबीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 से लोग इस सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं। सड़क की हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि यहां वाहन लेकर चलना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है। दो पंचायतों को जोड़ने वाली इस खस्ताहाल सड़क की वजह से लोगों को दूसरे गांवों से होकर आना जाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान की मांग बैक टू विलेज कार्यक्रम में भी की थी। उसके बाद कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी मरम्मत कराने के लिए गुहार लगाई। लेकिन, अभी तक कोई हल नहीं हुआ है।
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स्थानीय निवासी संजय शर्मा ने बताया कि सड़क न होने के कारण गांव में यातायात की सुविधा भी ठप पड़ी है। लोगों को पैदल जाकर दूसरे गांव से गाड़ी पकड़नी पड़ती है। सड़क पूरी तरह से खड्ड में तब्दील हो चुकी है। खास तौर पर रात के समय यहां से दोपिया वाहन लेकर गुजरना खतरे से खाली नहीं है।
अश्वनी कुमार ने बताया कि खस्ताहाल सड़क की वजह से इस गांव में किसी भी यात्री वाहन की आवाजाही नहीं होती है। जिन लोगों के पास निजी वाहन हैं, वह भी इस सड़क पर चलाने की बजाय उन्हें घरों में खड़ा रखना बेहतर समझते हैं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। देश के हर गांव में सड़क की सुविधा का सरकार का दावा पूरी तरह से खोखला है।
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पिछले हफ्ते शनिवार को लोक शिकायत निवारण शिविर में विशेष तौर पर मौजूद उपायुक्त राहुल यादव के सामने भी लोगों ने सड़क की समस्या को रखा था। उपायुक्त ने अपने संबोधन के दौरान आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी। लेकिन, लोगों का कहना है कि इस तरह के आश्वासन उन्हें पिछले कई वर्षों से मिल रहे हैं। परंतु, समस्या का हल नहीं हो रहा है।
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पंच बलबीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 से लोग इस सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं। सड़क की हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि यहां वाहन लेकर चलना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है। दो पंचायतों को जोड़ने वाली इस खस्ताहाल सड़क की वजह से लोगों को दूसरे गांवों से होकर आना जाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान की मांग बैक टू विलेज कार्यक्रम में भी की थी। उसके बाद कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी मरम्मत कराने के लिए गुहार लगाई। लेकिन, अभी तक कोई हल नहीं हुआ है।
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स्थानीय निवासी संजय शर्मा ने बताया कि सड़क न होने के कारण गांव में यातायात की सुविधा भी ठप पड़ी है। लोगों को पैदल जाकर दूसरे गांव से गाड़ी पकड़नी पड़ती है। सड़क पूरी तरह से खड्ड में तब्दील हो चुकी है। खास तौर पर रात के समय यहां से दोपिया वाहन लेकर गुजरना खतरे से खाली नहीं है।
अश्वनी कुमार ने बताया कि खस्ताहाल सड़क की वजह से इस गांव में किसी भी यात्री वाहन की आवाजाही नहीं होती है। जिन लोगों के पास निजी वाहन हैं, वह भी इस सड़क पर चलाने की बजाय उन्हें घरों में खड़ा रखना बेहतर समझते हैं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। देश के हर गांव में सड़क की सुविधा का सरकार का दावा पूरी तरह से खोखला है।